सोचता हूं कि क्या सुख.. पैसा, नौकरी और इज्जत की जमकर लानत मलानत करने के बाद… सब कुछ को छोड़छाड़ कर… उत्तर प्रदेश के किसी गांव में हमेशा के लिए बस जाने में है… लेकिन हां वो गांव बसा पंजाब में हो… मौसम वहां हिमाचल प्रदेश जैसा हो और सुविधाएं दिल्ली के किसी गांव वाली हों…। हंहंहंहहंहंहहंह……। आप कहेंगें मियां दिनै में सपना देखत हैं…
गोया नौकरी भारतीय सरकारी टाइप हो… सैलरी अमेरिकन टाईप… बीवी रशियन टाईप…. और बच्चे ब्रिाटिश टाइप गोरे गोल मटोल…। लेकिन हुजूर सच मानिए पिछले काफी घन्टो से काम करते… खबरों को उलटते पलटते…दूसरे चैनल्स के रिपोट्र्स को ईश्या से घूरते… लोगों से बतियाते गपियाते… खाते पीते.. मैं इसी बात को सोच रहा था कि क्या घर परिवार… सेहत, आत्मविश्वास को छोड़कर इतनी दूर आकर मैं क्या खुश हूं…। अगर नहीं तो… आखिर कहां है सुख…। सोचता हूं कि क्या सुख इस मुगालते में रहने में है कि आने वाला समय सुखों से लबा लबा.. टपा टप.. टाइप भरा हुआ होगा…। मानों एक दिन सुबह सो कर उठूंगा और हथेली में अचानक से एक नई रेखा सी उगी दिखेगी…
और बस फिर क्या.. बाथरूम तक पहुंच भी नहीं पाउंगां.. कि डोर बेल बज उठेगी…। सामने लोगों की भीड़ ही भीड़… साहब हमारा देश भी लंगड़ा हो चुका है…. उसे बचा लो ना प्लीज…। बिल्कुल नायक फिल्म की तरह…।ना… ना… जिन्दगी भर का जिद्दी नास्तिक अगर इस मुगालते में जीता रहा तो……। अबे जाने दे ना यार… क्यों सीधे सादे इस सवाल को तू क्राइम की स्पेशल स्टोरी बना रहा है बे…।सोच में डूबा ही हूं.. कि मोबाइल की स्क्रीन पर एक एसएमएस चमकने लगता है…। इन्ज्वाय लाईफ… विद कैटरिना… फार ओनली ट्वैन्टी पैसा पर केबी…। साला… हद है… जाहिर है मैं इसे हद मान रहा हूं तो लाखों ट्वेन्टी पैसा पर केबी पर डाउनलोड कर कैटरीना-करीना के साथ मोबाइल पर सुख ढूंढते ही होंगे…। कुछ लोग नहीं भी ढूंढते…। अबे हटा ना यार…।तो फिर से लौटते हैं… सुख कहां है… सुख कहां है…।
आज तो तय कर लिया है इस सवाल का जवाब तलाश कर ही लूंगा कि आखिर ये साला सुख है कहां… किस जगह… किस काम में है ये…। और क्या… बस कल से वही काम करना है… बाकी दुनिया की मां का साकी-नाका…। अपन को तो कल से सुखी रहना है बस…। आपके दिमाग में कोई आईडिया हो तो कमेंटियाइयेगा जरूर..।
जर्नलिस्ट जयंत चड्ढा के ब्लाग नई कलम से साभार.











