सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सरकार समाचार पत्रों, एजेंसियों तथा दृश्य मीडिया के श्रमजीवी पत्रकारों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन निर्धारण पर मजीठिया आयोग की सिफारिशें लागू करने पर निर्णय ले सकती है. न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया. इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि यह मामला न्यायालय के विधाराधीन होने की वजह से वह इन सिफारिशों पर निर्णय नहीं ले सकती.
न्यायालय ने हालांकि यह भी कहा कि आयोग की सिफारिशों पर सरकार का निर्णय इसे चुनौती देने वाली समाचार पत्रों तथा एजेंसियों की याचिकाओं की सुनवाई के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा. आनंद बाजार पत्रिका, टाइम्स ऑफ इंडिया और कई समाचार एजेंसियों ने सर्वोच्च न्यायालय में आयोग की सिफारिशों को चुनौती दी है. मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को करेगी. मजीठिया आयोग ने समाचार पत्र, एजेंसियों, टेलीविजन के श्रमजीवी पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों के वेतन में कई गुना वृद्धि की सिफारिश की है. साभार : आजतक












CAMERAMAN
September 21, 2011 at 6:29 pm
ये काम तो जल्दी करो i चैनल मैं नीचे तबके के करमचारियों की पगार बहुत कम होती है चैनल वाले कम से कम 5 हजार और ज्यादा से ज्यादा 8 हजार देते है इतने कम पैसो मैं भला क्या होता है मंहगाई के जमाने मैं कम्पनियों के मालिको को सोचना चाहिए की हम लोग अपना गुजरा कैसे चलायें
कम तनख्वा के दायरे मैं ज्यादा तर cameraman होते है जो सबसे ज्यादा काम करते है
मेरा तो बस ये ही कहना है की इन पर भी ध्यान दो
please
thanks
kumarkalpit
September 21, 2011 at 9:09 pm
suprim cort ko bahut-bahut badhee . akhbar wale kish munh se cort gagy they. sarkar se suvidha ki liye katora ye faylaye rahnege.dene ke naam par sanp sungh jata hai. jo akhbar walon ne adalaat ka darwaja khatkhataya hai ve sarkaree vgyapan ke liya naak ? ragarte hai. sarkar se suvdha lena hai to sarkar ko vetan tay karne ka adhikar hona chahiye.
yogesh kumar gupta
September 21, 2011 at 10:02 pm
upa-2 ke garbh mein 9 maah se pal rahaa hai wage board kee sifaarishon kaa bhrood. aaiye dekhen, kab bachhe mein tabdeel hotaa hai yah bhrood. Haalaanki bachhaa paidaa ho bhee gayaa to kans roopee jyaadaatar niyokataa poorv ki bhanti usakee tatkaal hatyaa kar denge.
Meraa bhaarat mahaan…..YOGESH KUMAR GUPTA.
sarvjeet bawa
September 22, 2011 at 11:39 am
मैं एक पत्रकार हु . और अपने पत्रकार भाईओं की मज़बूरी देख कर रोना आता है और तरस भी… मैं टी वी चैनेल चलने वालो को अद्विसे देना चाहता हु की पत्रकारों का शोषण बंद करो … जिनके द्वारा दी गयी न्यूज़ के आधार पर आपके चैनल चल रहे हैं उनकी भी सोचो … आप अपने पत्रकारों को जो जिला लेवल पर काम कर रहें हैं उन्हें पन्द्र हजार रुपे महिना तनखा दें और और उनसे महीने में २५ से जयादा चैनल लेवल की न्यूज़ की डिमांड रखें और जो ३० से जयादा न्यूज़ भेजता है उसे एक्स्ट्रा पेमेंट की जाये ताकि पत्रकार के घर का गुजरा सही चल सके और मार्केट में पत्रकार के साथ साथ जिस चैनेल से वेह जुदा हाउ उसकी भी इज्जत रह सके की वेह चैनल अपने पत्रकार का पूरा धयान रखता है … जिस चैनेल के पत्रकार की माली हालत सही होगी उसके चैनल की भी इज्जत होगी ….हरियाणा से एक पत्रकार ….
bablu buxar
September 22, 2011 at 3:02 pm
bhai mufucil patkaro ke bare me to socne wala na to parkaro ka koie unian hai ………na he patkar bane adkari . t v news me kam karme wale stringer ko to regnal or head office me kam lene wale adkarie patkar log kasie rob se bat karte hai stringer me kam kare wale sathi he jante hai …….. manrega se ve kam kabar ke magdurie dene wale ……. manegment ke chamce type ke log apne kursie or pate jab tak varte range tab tak sarkar me bate neta ge log stringer kalane wale ham jasie patkaro ko magdurie ke nam par chand rupaye fake kar magdurie karate ranege ……… is liea strringr kalane wale patkar bhai is gosna se jada kuse nahie ho …….. ise me he ham stringer kalane wale patkar ke valie hai .
susheel tripathi
June 3, 2014 at 2:27 am
apne bilkul dil ki bat khae hai aisa hona he chaye maliko ko isme sochna bhaut jaruri hai insan ki majburi na samje balki uske tailent ko pechane ,,,,,,,,,,,,,,,,,