: कोर्ट ने सरकार को नोटिस देने से मना किया : सेबी ने सहारा की दो कंपनियों को ओएफसीडी (आप्शनल फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर) के जरिए उगाही रकम को 15 फीसदी ब्याज समेत निवेशकों को लौटाने का जो आदेश दिया था, उसके खिलाफ सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सहारा ने पक्ष रखा कि उसकी दोनों कंपनियां (सहारा इंडिया रीयल एस्टेट व सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट) लिस्टेड नहीं हैं.
लिस्टेड न होने के कारण इन कंपनियों के बारे में ऐसा आदेश देना सेबी के अधिकारक्षेत्र में नहीं आता. कायदे से यह प्रकरण कारपोरेट मंत्रालय का बनता है. अतः सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को नोटिस जारी करे. पर सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की याचिका को खारिज करके कहा कि वह इस प्रकरण पर सबसे पहले सेबी का पक्ष जानना चाहेगी. इस तरह सुप्रीम कोर्ट के जरिए केंद्र सरकार को नोटिस भिजवाने के सहारा समूह के मंसूबे पर पानी फिर गया.
मुख्य न्यायाधीश एसएच.कपाड़िया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वे नहीं चाहते कि सरकार अभी इस मामले में आए. पीठ ने सेबी से इस प्रकरण में अपनी राय स्पष्ट करने को कहा है. सेबी यह पता लगाया जाएगा कि ओएफसीडी का विचार कहां से मिला. सेबी के वकील पी. वेणुगोपाल के आग्रह पर पीठ ने इस मामले पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी. सेबी ने कहा है कि सहारा समूह ने उसके समक्ष कुछ दस्तावेज जमा कराए हैं, नियामक उनका अध्ययन करना चाहता है.













PK tejwani
July 11, 2011 at 9:28 am
सहारा वालों ने कभी भी किसी का पैसा वक्त पर वापस किया है क्या? वे इस मामले को खींचते जायेंगे, खीचते जायेंगे और बाजार भाव से करोड़ों का ब्याज कमा लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर महीनों बाद रूपया लौटा देंगे. सहारा में केवल लेने के खाते वक्त पर चालू रहते हैं देने के नहीं. अब इनवेस्टर खुद भुगतें.
DDPAndey
July 13, 2011 at 9:11 am
kitana paisa sahara ne liya Tumaha tejwani detail do sara paisa dila doonga sahara se
Deepak
July 16, 2011 at 11:25 am
Are thoda to raham karo bhai sahara walo pe