काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता, खादी ग्रामोद्योग समिति के पूर्व अध्यक्ष, प्रमुख समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की अंग्रेजी पत्रिका ‘जनता’ के पूर्व संपादक, प्रख्यात लेखक और पत्रकार तथा समाजवादी चिंतक सुरेंद्र मोहन के निधन को बुद्धिजीवियों ने देश और विशेष रूप से गरीबों, दलितों, पिछड़ों तथा शोषित लोगों के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
उधमसिंह नगर के गदरपुर में विधि, शिक्षा, लेखन, पत्रकारिता आदि से जुड़े लोगों की एक शोक सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्व. मोहन सत्ता से दूर रहकर भी दलितों, शोषितों, गरीबों और वंचितों के हकों के लिए ईमानदारी से आजीवन लड़ते रहे। देश ने एक महान जन नेता खो दिया है। वक्ताओं ने कहा कि स्व. मोहन को सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि उनके काम-काज को ईमानदारी से आगे बढ़ाया जाए। शोक व्यक्त करने वालों में दिनेश कुमार, राजेश कुमार, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, प्रकाश भट्ट, नरेश कुमार, अरविंद सिंह, प्रताप सिंह, कैलाश चंदोला, रूपेश कुमार सिंह, जावेद खान, जगीर सिंह गिल आदि शामिल थे।












Girish Mishra
December 18, 2010 at 2:24 pm
Surendra Mohan was not in the BHU but in Kashi Vidypaith’s Sociology Department whose head was Rajaram Shastri, an eminent socialist of his time.
You may get details from Krishnanathji whose elder brother, Ranganathji too was there.
Both Krishnanathji and Ranganathji were socialists, the latter was General Secretary of the Socialist Party of Dr. Lohia after he quit the PSP.