भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज की खिंचाई की और पूछा कि इसने किस आधार पर वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर्स (ओएफसीडी) को सूचीबद्ध होने योग्य ठहराने पर सहारा समूह को प्रमाणपत्र दिया है। सेबी का यह रुख तब आया है जब सहारा समूह ने बीएसई के एक अधिकारी द्वारा भेजे गए ई-मेल की प्रति प्रमाण के तौर पर सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल के समक्ष पेश की।
इस ई-मेल में लिखा था, ‘ओएफसीडी बीएसई पर सूचीबद्ध नहीं है।’ सहारा ने इस बयान का इस्तेमाल अपने दावे के समर्थन में किया कि ओएफसीडी फिक्स्ड प्राइस कन्वर्टिबल इंस्ट्रूमेंट होने के कारण शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं किए जा सकते हैं। बीएसई क अनुसार यह ई-मेल एक कनिष्ठ अधिकारी ने भेजा था और यह नियमन संबंधी आदेश नहीं है। इस बारे में बीएसई के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘वेबासाइट पर काम करने वाले हमारे लोगों ने एक मौखिक पूछताछ का जवाब ई-मेल के जरिये दिया।
उन्होंने कहा कि बीएसई में कोई ओएफसीडी सूचीबद्ध नहीं है और यह स्थिति अब तक की है। इसका यह मतलब नहीं कि इससे पहले कभी बीएसई में ओएफसीडी सूचीबद्ध नहीं हुए थे या आगे नहीं हो सकते हैं।’ अधिकारी ने कहा कि इसी आधार पर एक्सचेंज ने सेबी के प्रश्न का जवाब दिया है। बीएसई के जवाब को ऑन रिकॉर्ड लेते हुए सेबी ने एसएटी को नया शपथ पत्र सौंपा है और सहारा के उस दावे को चुनौती दी है कि ओएफसीडी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हो सकते हैं। एसएटी ने नए शपथ पत्र पर आज सेबी और कंपनियों का पक्ष सुना और कहा कि मामले पर फैसला देते हुए इनकी दलीलों पर गौर किया जाएगा।
ट्राइब्यूनल ने सेबी, कंपनी मामलों के मंत्रालय और सहारा समूह की दो कंपनियों की सुनवाई एक महीने पहले पूरी कर ली है। इसने सभी पक्षों को अपना अंतिम लिखित जवाब देने को कहा था और अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अंतिम जवाब के तौर पर सहारा समूह ने बीएसई अधिकारी के इस ई-मेल को प्रस्तुत किया था। अगस्त में उच्चतम न्यायालय ने ट्राइब्यूनल को सहारा समूह की दो कंपनियों की उस अपील पर सुनवाई के लिए कहा था, जिनमें इन्होंने अपने खिलाफ सेबी के आदेश को चुनौती दी थी। दोनों कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प और सहारा हाउसिंग इन्वेस्ट कॉर्प ने ओएफसीडी जारी 2.96 करोड़ निवेशकों से 24,029 करोड़ रुपये जुटाए थे। साभार : बीएस











