Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

स्क्रिप्ट तो लोकसभा, विधानसभा चुनाव वाली है

[caption id="attachment_18305" align="alignleft" width="73"]अनिल यादवअनिल यादव[/caption]यूपी में इतने उपद्रवी पंचायत चुनाव पहले कभी नहीं हुए कि सरकार को रासुका लगाने और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का आदेश देना पड़े। गांवों के प्रपंच तंत्र से अनजान जो लोग ‘अहा, ग्राम्य जीवन भी क्या है’ टाइप कविताओं और ग्रामीणों के भोलेपन के किस्सों की खुराक पर पले हैं उन्हें ताज्जुब हो सकता है कि इतनी मारकाट क्यों हो रही है।

अनिल यादव

अनिल यादव

यूपी में इतने उपद्रवी पंचायत चुनाव पहले कभी नहीं हुए कि सरकार को रासुका लगाने और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का आदेश देना पड़े। गांवों के प्रपंच तंत्र से अनजान जो लोग ‘अहा, ग्राम्य जीवन भी क्या है’ टाइप कविताओं और ग्रामीणों के भोलेपन के किस्सों की खुराक पर पले हैं उन्हें ताज्जुब हो सकता है कि इतनी मारकाट क्यों हो रही है।

चुनाव लड़ने वालों का ऐसा क्या दांव पर लगा है जिसे बचाने के लिए वे हर हथकंडा अपनाने पर आमादा हैं। अगर पंचायती राज अधिनियम के अक्षरों को मंत्र मानकर आदर्शवादी ढंग से सोचा जाए तो लग सकता है कि यह मारकाट वे लोग कर रहे हैं जिन्हें लगता है कि उन्हें अपने गांव की तरक्की और ग्रामीणों की सेवा के महान अवसर से उनके प्रतिद्वंदी वंचित कर सकते हैं। लेकिन असलियत उलट है। हर गांव में सेवा के धागे से बंधी मेवों की झालर लटक रही है जिसे झपटने के लिए एक दूसरे को धकियाते प्रत्याशी उछल रहे हैं। ‘मेवा झपट प्रतियोगिता’ के नियमों को पालन हो इसलिए पुलिस, पीएसी और आचार संहिता का बंदोबस्त है।

पंचायत चुनाव का क्या रंग होगा इसका आभास तभी मिलने लगा था जब लाल बत्ती की गाड़ियां अदना कहे जाने वाले इस चुनाव के प्रत्याशियों के समर्थन में जा पहुंची, धार्मिक अन्नक्षेत्रों की तर्ज पर असली-नकली मदिरा के ‘पेयक्षेत्र’ शाम ढले गुलजार होने लगे, जाति-धर्म के ध्रुवीकरण के माहिर कारीगर काम पर लगा दिए गए और जो वोटर किसी भी सूरत नहीं माने उनकी कीमत लगाई जाने लगी।

लेकिन यह सिर्फ ट्रेलर है। अभी जब जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव की बारी आएगी तो चुने गए सदस्यों को बटोर कर धनबली तीनतारा, पंचतारा होटलों में ठहराएंगे, गोवा, खजुराहो औऱ जूहू-चौपाटी की सैर कराएंगे, जिनके दिमाग इतनी खातिरदारी से भी नहीं फिरेंगे उनकी काउन्सलिंग बाहुबलियों से कराई जाएगी। इस दौरान जो नई शत्रुताएं पैदा होंगी वे गांवों के जमीन को अगले कई सालों से तक खून से सींचती रहेंगी।

दांव पर ढेर सारा सरकारी पैसा है जिसे हड़पने का एक कुशल तंत्र विकसित किया जा चुका है। बस आपको किसी तरह एक बार चुन लिया जाना है फिर यह पैसा खामोशी से अपने आप चल कर आप तक आएगा। छोटा पद छोटा पैसा, बड़ा पद बड़ा पैसा। नरेगा के जॉब कार्ड, विधवा-विकलांग-वृद्धावस्था पेंशन, गरीबी रेखा से नीचे के राशन कार्ड समेत तमाम कल्याणकारी योजनाएं कैसे ‘कामधेनु’ में जादुई ढंग से बदल जाती हैं इसे जानने के लिए उन सब जांचों को याद कर लेना काफी है जो पूरी हो चुकी हैं या चल रही हैं।

इस परिदृश्य को देखकर लगता है कि स्क्रिप्ट लोकसभा, विधानसभा चुनाव वाली है लेकिन नाटक ग्रामसभा के स्टेज पर खेला जा रहा है। ग्रामीण प्रत्याशियों ने जो ‘बड़ों’ से सीखा है उसे ही तो आजमा रहे हैं। भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ नेता अक्सर दहाड़ते पाए जाते हैं कि ‘जनता सबक सिखा देगी’ लेकिन जब जनता को भी अपने ही रंग में रंग लिया जाएगा तो वह सिखाने लायक रह कहां जाएगी। फिलहाल गांव लोकतंत्र के सबक सीखने में व्यस्त हैं।

लखनऊ के मार्केट में आज से कदम रख चुके पायनियर हिंदी में ‘यथार्थ’ नामक कालम में ‘लोकतंत्र के सबक’ शीर्षक से वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव का आलेख प्रकाशित हुआ है. वहीं से साभार लेकर आलेख को यहां प्रकाशित किया गया  है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...