2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की पूरी कहानी बयां करते कार्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की आला हस्तियों से बातचीत के बहुचर्चित टेप देश से दगा कर रही राजनेताओं, कारोबारियों और मीडिया के स्वयंभू “दिग्ग्जों” की खतरनाक तिकड़ी को बेनकाब करती है। देश के इस सबसे बड़े घोटाले के कई खिलाडियों को बेपर्दा कर चुके राडिया के इन टेपों से छींटे मध्यप्रदेश से शुरू होकर राजस्थान और हाल ही में झारखंड पहुंचे एक हिन्दी अखबार पर भी पड़े हैं। इस अखबार का जिक्र टाटा समूह के मुखिया रतन टाटा और नीरा राडिया की बातचीत में भी हुआ। पेश हैं इस बातचीत के संबंधित अंश-
टाटा- इन सब (घोटालों) का पर्दाफाश क्यों नहीं होता?
नीरा- रतन, वे (दूसरा औद्योगिक घराना) मीडिया को खरीद रहे हैं। वे मीडिया को खरीदने की अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं… हर विज्ञापन के लिए जो वे मीडिया में देते हैं। …मीडिया के साथ मेरी जो बातचीत हुई है, वह मैं आपको बता नहीं सकती। खासकर टाइम्स समूह व दैनिक भास्कर।…अग्रवाल परिवार के लोग जिनसे आप मिल चुके हैं।
टाटा-हां…।
नीरा- वे कहते हैं कि कभी हम उनके बारे में नकारात्मक खबर छापते हैं, वे विज्ञापन वापस ले लेते हैं। तो मैंने कहा कि ठीक है तो दूसरे लोग भी विज्ञापन वापस ले सकते हैं।… वे अपने मीडिया बजट का हर डालर यह सुनिश्चित करने के लिए खर्च करते हैं कि उन्हें नकारात्मक प्रचार न मिले। मीडिया बेहद बेहद लालची है…
साभार : पत्रिका













बिल्लू
December 7, 2010 at 8:00 am
दैनिक भास्कर का कहना है कि जिद करो दुनिया बदलो। अब कहेंगे जिद करो, माल बनाओ। जिद करो, घपला करो। कल्पेश याज्ञनिक जैसे भाषणबाज अब कहां हैं जो केवल भास्कर को ही हिंदी का एक मात्र अखबार मानते हैं बाकी सब कूडेबाज हैं जिनके लिए। जय हो इस घोटालेबाज अखबार का।
mahesh bihari sharma lalsot
December 7, 2010 at 10:19 am
Bhaskar ki pol ab khul rhi hi ki oh paper ke ad mi kya kya glat kam dhanda krta hi
thnks to patrika
bhhhgjj
December 7, 2010 at 12:45 pm
बिना सैटिंग के कोई इतना बड़ा ग्रुप कैसे बन सकता है। सेलेक्टेड एप्रोच के साथ भास्कर ने जितना खुलासा किया. वही काफ़ी है। बची कसर पत्रिका ने निकाल दी। ही ही। अपना तो यही मानना है कि इक-दूजे की चड्डी उतारने का ये सिलसिला चलते रहना चाहिए। हमाम में सभी नंगों के चेहरे जनता देख ले तो भला होगा पत्रकारिता का। ये काम अंदर के लोगों को करना चाहिए। ख़बर दबाने से पत्रकारिता मर जाएगी। अगर हिम्मत नहीं है तो दूसरों को पहुंचा दो ताकि ख़बर छप जाए और आप पर भी आंच ना आए।
jayad ahieer
December 8, 2010 at 5:23 am
agar is desh me nyay hai to bhaskar ke upar lage aropon ki bhee janch honi jaruree hai malik log aur unke dalle jel jaroor jayenge.
gsdfgsdfg
December 9, 2010 at 2:09 pm
Chhee Chhee Ram Ram