: कई सांध्य अखबारों का प्रकाशन बंद : श्री गंगानगर जिला मुख्यालय पर जब धरने-प्रदर्शन होते हैं तब जितने लोग नहीं होते उनसे ज्यादा वहां पत्रकार इकट्ठे हो जाते हैं, लेकिन पड़ोसी जिले में हालात इसके विपरीत हैं. हनुमानगढ़ में इन दिनों पत्रकारों का भयंकर टोटा चल रहा है, जिसके चलते तीन सांध्य दैनिक अख़बार बंद हो चुके हैं, वहीं अन्य कई की हालत भी इन दिनों पतली हो गई है. अभाव का कारण पत्रकारों का कम होना तो है ही, बहुत से पत्रकार पत्रकारिता छोड़ कर अन्य काम-धंधे करने लगे हैं.
पत्रकारों की कमी के चलते सांध्य दैनिक माणिक्य, बेपर्दा-सच, लोकरुचि के प्रकाशन बंद हो चुके हैं. सांध्य दैनिक सायंकाल टाइम्स के संपादक सुभाष लोकवाणी और योर्कर के सम्पादक कपिल शर्मा इन दिनों खुद ही पत्रकार, कंप्यूटर ओपरेटर, सर्कुलेशन इंचार्ज और मार्केटिंग का काम कर रहे हैं. योर्कर को पुराने साथी रोशन अरोड़ा छोड़ चुके हैं. मॉर्निंग अख़बारों में दैनिक तेज को कंप्यूटर ऑपरेटर निर्मल और पत्रकार विशु वाट्स, सुभाष गुप्ता छोड़ गए. मशीन में योगेन्द्र ने भी कार्य छोड़ दिया. तेज केसरी में तो गत कई वर्षों से संदीप और संजय शर्मा स्वंय ही सारे कार्य करते हैं.
हनुमानगढ़ भास्कर में कार्यरत सुभाष बिश्नोई तथा राकेश सहारण ने भास्कर से किनारा कर लिया है. सुभाष बिश्नोई खुद का व्यवसाय करने लग गए हैं. भास्कर छोड़ने बाद छगन श्रीमाली सरकारी अध्यापक बन गये हैं, वहीं जूडो कोच विनीत बिश्नोई भी कुछ समय के लिए सांध्य दैनिक सम्पादक बन पत्रकारिता का शौक पूरा कर फिर से ग्राउंड में बच्चों को खेल-खिलाने में लग गए हैं. पत्रिका से भी ब्यूरो चीफ सोम पारीक गंगानगर चले गए हैं. गंगानगर से प्रकाशित दैनिक सीमा सन्देश से वर्षों से जुड़े सुभाष गुप्ता और नरेश विद्यार्थी ने भी कार्य छोड़ दिया और जानकारी मिली है कि ब्यूरो चीफ पद पर कार्यरत पत्रकार संघ अध्यक्ष अनिल जांदू भी सीमा सन्देश से विदाई ले रहे हैं. वे अपने अन्य व्यवसायिक कार्यों में व्यस्त रहने लगे हैं.
न्यूज़ चैनलों को छोड़ने के बाद अब विश्वाश भटेजा राजस्थान पंजाब केसरी को भी लगभग छोड़ चुके हैं. विकास भटेजा ने न्यूज़ चैनल और अमित मिड्ढा ने प्रेस-फोटोग्राफरी का कार्य छोड़कर मेडिकल लाइन से जुड़ चुके हैं. लोकसम्मत छोड़ सुनील धुड़ियाँ ने प्रॉपर्टी डीलिंग व सांध्य अख़बारों का मार्केटिंग कार्य छोड़ गुरचरण धुड़ियाँ ने सोडा-शॉप खोल लिया हैं. गंगानगर से प्रकाशित होने वाले दैनिक अख़बारों में देनिक भोर, समाचार भारती, हांसल समाचार, सीमा किरण, प्रताप केसरी, राष्ट्रीय छवि, इवनिंग फाइटर, लोकसम्मत, हाईलाइन, सांध्य बॉर्डर टाइम्स के संपादकों ने अपना हनुमानगढ़ जिला कार्यालय खोलने के लिए पूरा जोर लगा लगा रखा है पर पत्रकार नहीं मिल रहे. इन अख़बारों के संपादक और उनकी टीम रोजाना जिला मुख्यालय के चक्कर लगाकर गिने-चुने पुराने पत्रकारों को टटोलने में लगी रहती है.
इसके अलावा गंगानगर से प्रकाशित सीमावर्ती, भू-मीत, वैश्य आभा, खेती गंगा, राजस्थान खेती जैसी कलर मैगजीनों के सम्पादक भी हनुमानगढ़ में रोजाना आते हैं पर हर बार नाकामयाबी ही हासिल होती है. कई बड़े अख़बार जैसे राष्ट्रदूत, ट्रिब्यून, सहारा समाचार भी समय-समय पर हनुमानगढ़ आकर प्रतिनिधि की नियुक्तियां करते रहते हैं और अभी भी हनुमानगढ़ में अपना अख़बार स्थापित करने का सपना संजोये हुए हैं. हनुमानगढ़ में कई साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक अख़बार बंद हो चुके हैं, वहीं अन्य भी किस्तों में चल रहे हैं. ताज़ा जानकारी के अनुसार भास्कर में भी कुछ नए आए पत्रकार अभी जमे ही नहीं हैं कि उससे पहले ही छोड़ने की बातें भी करने लगे हैं.
हनुमानगढ़ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. इस बारे में जिस किसी को अपनी बात कहनी हो वो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकता है.












Lila Dhar
February 12, 2011 at 5:05 am
wahan ab sayad dukandari chalti nahi hogi ,ya wahan ke log samaj gaye honge
rajesh aggarwal
February 12, 2011 at 7:42 am
यशवंत जी,
मेरे विचार से इस आलेख को लिखने वाले पत्रकार वास्तव में पत्रकार हैं ही नहीं। उन्हें यह तक नहीं पता कि श्रीगंगानगर से प्रकाशित होने वाला समाचार भारती कब का बंद हो चुका है और जिन मैग्जीनों के हनुमानगढ़ कार्यालय खोलने में आ रही दिक्कतों की बात इन महोदय ने कही है, उनके प्रतिनिधि बड़े ही उत्साह से कार्यरत हैं। ऐसे में या तो इन लेखक महोदय की खुद की दाल-रोटी नहीं बन पा रही है और वे ऐसी अनाब-शनाब और झूठी खबरें प्रेषित कर रहे हैं। आप भी जानते हैं कि किसी के रहने या न रहने से अखबार बंद नहीं हुआ करते। कुछ पत्रकारों के पेशा बदल लेने का मतलब यह नहीं है कि पत्रकारिता खत्म हो गई है। नए लोग आ रहे हैं और आते रहेंगे।
राजेश अग्रवाल
श्रीगंगानगर।
samndar singh
February 12, 2011 at 1:50 pm
भैय्या जी, यह स्वीकार करने में गुरेज नहीं होना चाहिए कि पत्रकारिता अन्य की अपेक्षा अच्छा केरियर नहीं रह गया है। केरियर इसलिए कि मिशन तो अब यह रही नहीं। जब ना काम की परिस्थियां अच्छी होगी और ना ही अच्छा पैसा मिलेगा तो नई खैप क्यों आएगी…जरा गौर फरमाएं।
no nam,e
February 12, 2011 at 5:20 pm
भाई राजेश अग्रवाल जी हो सकता है की श्रीगंगानगर से प्रकाशित होने वाले समाचार भारती बंद होने का हमारे इस पत्रकार भाई को पता न हो ..? लेकिन जिन मैग्जीनों के हनुमानगढ़ कार्यालय खोलने में आ रही दिक्कतों की बात इन महोदय ने कही है, वो लगभग सही है क्यों की संजीव भाटिया की मेग्जिन में पहले अनिल जांदू थे और अब भास्कर से रिटायर्ड मदन अरोड़ा सिर्फ नाम मात्र के ही है और ”भू-मीत” के सम्पादक कृषण वृस्पति और खेती गंगानगर के संपादक मासूम गंगानगरी आज भी हनुमानगढ़ में पत्रकार ढूंढ़ रहे है | हनुमानगढ़ में इन दिनों पत्रकारों का भयंकर टोटा चल रहा है, जिसके चलते तीन सांध्य दैनिक अख़बार बंद हो चुके हैं, वहीं अन्य कई की हालत भी इन दिनों पतली हो गई है. यह बात सोला आना सही है |
saran
February 12, 2011 at 6:04 pm
aajkal kuch log afwahe failne lage hai jo media k liye maiyne rakhti hi
mahandra singh rathore
February 13, 2011 at 8:50 am
khabar ke bahane yah to pata chal gya ki hanumangarh mai koun-koun journilst hain. media mai to essa hi hai aaya ram-gaya ram. jisne bhi report likhi hai wo hai pura jankar or pakka journilst. jankari ke leye badhai ho. hanumangarh se hun isliye comments likha.
Subhashchander Gupta
March 7, 2011 at 2:25 pm
is khabar me vishu watts ke baare me galat likha hua hai. wo aaj bhi tej me kaam kar raha hai. is patrkar bhai ko poori jankaari nahi hai. thoda sachaai ka pata kar hi khabar likhe to theek rahta.
raju
March 24, 2011 at 6:47 pm
lila dhar ji, apki konsi dukan h vo to bata do, ya fir aap de do in patrakaro ko tankhwah, bolo tab jab okat ho. samje kya.
rk sethi
April 15, 2011 at 5:23 pm
hanumangarah ke sabhi saathiyon ko slaam….2004 me main bhi vahan job kr aaya hoon…halaat pta nhi kaise hain, pta krta hoon.
vishwas
November 7, 2014 at 5:13 am
ये पत्र लिखने वाले भाई साहिब के पास अधूरी जानकरी है 🙁