पत्रकार संजय बाजपेई का अपहरण के साथ ही लूटपाट व मारपीट के मामले में आरोपी पंचायत सचिव व अन्य की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित स्थानीय पत्रकारों ने रविवार को नगर में बस स्टैण्ड चौराहे पर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के बैनर तले एकत्र होकर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। पत्रकारों का नेतृत्व करते हुये हुए ग्रापए के तहसील अध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव ने दबंग सिक्रेटरी की गिरफ्तारी के अलावा उसकी बर्खास्तगी की मांग की। कहा कि ईट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा।
बताते चले कि 26 फरवरी की सुबह लखनऊ से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के स्थानीय संवाददाता भरखनी निवासी संजय बाजपेई भरखनी से बाइक पर सवार होकर पाली की ओर आ रहे थे। सांडी खेड़ा ग्राम के पास इन्हें जबरन बल पूर्वक पंचायत सचिव सर्वेश कुमार व चार अन्य ने गाड़ी में डाल लिया। दबंग सेक्रेटरी ने पत्रकार के साथ मारपीट की व सात हजार रुपये भी लूट लिये। तीन घण्टे बंन्धक बनाने के बाद पत्रकार को शाहाबाद कोतवाली के समीप छोड़ दिया। घटनाये से गुस्साये पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन को मामले से अवगत कराया। जिस पर पुलिस ने धारा 395 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया था, लेकिन अभियुक्तों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित पत्रकारों ने पाली के बस स्टैण्ड चौराहे पर रविवार को ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के बैनर तले काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन का नेत्तृत्व करते हुये ग्रापए मे तहसील अध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव कहा कि पत्रकार संजय बाजपेई पर हमला नहीं यह लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर एक प्रशासनिक गुण्डे का प्रहार है। पत्रकारों का उत्पीड़न किसी भी प्रकार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि खबर छापने पर बौखलाये सेक्रेटरी ने घटना को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि दबंग भ्रष्ट सेक्रेटरी को गिरफ्तार करने के अलावा उसे बर्खास्त भी किया जाये। साथ ही इसकी अकूत सम्पत्ति की सीबीआइ जाँच करायी जाए। पत्रकार शिवाकान्त बाजपेई ने कहा कि जब तक दोषियों को दण्ड नहीं मिल जाता विरोध जारी रहेगा। पत्रकार जर्नादन मिश्रा ने कहा कि दबंग सेक्रेटरी मुंह तोड़ जवाब दिया जायेगा। कलम के सिपाही अब चुप नहीं बैठेंगे।
विरोध प्रदर्शन में प्रशान्त मिश्रा, मनोज कुशवाहा, शिवकुमार रस्तोगी, शोभित मिश्रा, संजय मिश्रा, उदयराज सिंह, प्रवेश शुक्ला, अनुपम पाठक, वीरेन्द्र चौहान, लकी रस्तोगी, हरिवंश अवस्थी, वरुण शुक्ला आदि मौजूद रहे।












sanket mishra
March 13, 2011 at 7:30 pm
patrakar biradari k logon k liye badi sharam ki bat hai ki ek patrakar k upar hmla krne wala sarkari naokar 15 din se arest nhi hua hai…yh misal hai or hkekat hai aaj ke patrakaron ki wastwik hakekat qa hai….:(