हिंदुस्तान, कानपुर यूनिट की स्थिति को लेकर यहां काम करने वाले पत्रकारों में असमंजस है. यहां रोज समीक्षाएं चल रही हैं. लखनऊ के संपादक नवीन जोशी और यूनिट हेड रजत कुमार आए दिन यहां डेरा जमा रहे हैं. कानपुर के संपादक विशेश्वर कुमार तथा यूनिट हेड नरेश पांडेय के भविष्य को लेकर भी कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए हैं. दिल्ली की टीम भी लगातार इस यूनिट का दौरा कर रही है.
जिस तरह से दिल्ली और लखनऊ के लोगों का दौरा कानपुर हो रहा है, उससे सब कुछ ठीक ठाक नहीं लग रहा है. पिछले कुछ दिनों में नवीन जोशी और रजत कुमार कई बार कानपुर आ चुके हैं. दो दिन पहले तो रजत कुमार ने फरुर्खाबाद, कन्नौज और हरदोई का दौरा किया. यहां के हिंदुस्तानियों से मिले. कहा जा रहा है कि कानपुर यूनिट की बदहाली देखकर हिंदुस्तान प्रबंधन बहुत नाराज है. विशेश्वर कुमार के यहां का प्रभार संभालने के बाद इस यूनिट की स्थिति और बदतर हो चुकी है.
सूत्र बताते हैं कि विशेश्वर कुमार के कार्यकाल में दो दर्जन से ज्यादा लोग खुद निकल गए या फिर निकाल दिए गए. जिनमें हिंदुस्तान के पुराने तथा वफादार लोग भी शामिल थे. अपकंट्री में भी आधा दर्जन से ज्यादा ब्यूरो हेड हिंदुस्तान को सलाम कह कर निकल गए. जिसके चलते कानपुर यूनिट से जुड़े जिलों में अखबार के सर्कुलेशन एवं आय में काफी कमी आ गई. इसे लेकर ही दिल्ली और लखनऊ परेशान है. पुरनियों को किनारे करके जिन नए लोगों को हिंदुस्तान से जोड़ा गया, वे लोग अपने कामों में खरे नहीं उतरे.
कानपुर यूनिट में जिस तरह दिल्ली और लखनऊ का दखल बढ़ा है, उससे इस यूनिट तथा विशेश्वर कुमार और नरेश पांडेय को लेकर तमाम तरह की सुगबुगाहट होने लगी है. इन लोगों के कामों की समीक्षा किए जाने की भी खबर मिल रही है. नवीन जोशी एवं रजत कुमार लगातार कानपुर में डेरा डाले हुए हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि हिंदुस्तान, कानपुर का हाल देखकर प्रबंधन अब विशेश्वर कुमार और नरेश पांडेय का बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी कर रहा है. जिस तरह से हिंदुस्तान का उच्च स्तरीय प्रबंधन परेशान है, उसे देखकर लग रहा है कि कुछ ना कुछ तो होने वाला है.











