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दुख-दर्द

हिंदुस्‍तान की पूर्व महिला पत्रकार ने जहर खाकर आत्‍महत्‍या की!

बनारस से खबर आ रही है हिंदुस्‍तान की स्ट्रिंगर रह चुकी ज्‍योति श्रीवास्‍तव ने जहर खाकर आत्‍महत्‍या कर लिया है. इस मामले में ज्‍योति के परिवार वालों ने चुप्‍पी साध रखी है. अपुष्‍ट खबरों के अनुसार ज्‍योति ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा है. ज्‍योति ने हिंदुस्‍तान अखबार से निकाले जाने से कुछ समय पहले अपने एक वरिष्‍ठ सहयोगी पर शारीरिक शोषण का आरोप भी लगाया था.

बनारस से खबर आ रही है हिंदुस्‍तान की स्ट्रिंगर रह चुकी ज्‍योति श्रीवास्‍तव ने जहर खाकर आत्‍महत्‍या कर लिया है. इस मामले में ज्‍योति के परिवार वालों ने चुप्‍पी साध रखी है. अपुष्‍ट खबरों के अनुसार ज्‍योति ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा है. ज्‍योति ने हिंदुस्‍तान अखबार से निकाले जाने से कुछ समय पहले अपने एक वरिष्‍ठ सहयोगी पर शारीरिक शोषण का आरोप भी लगाया था.

जानकारी के अनुसार ज्‍योति गांडीव से ट्रेनी के रूप में काम करने के बाद हिंदुस्‍तान पहुंची थी. यहां उन्‍हें पहले फीचर पेज पर काम दिया गया था फिर उनका तबादला न्‍यूज डेस्‍क पर कर दिया गया. यहीं काम करने के दौरान उन्‍होंने अपने एक वरिष्‍ठ सहयोगी पर आरोप लगाया था. जिसके बाद प्रबंधन ने मामले की सुनवाई करने की बजाय लीपापोती करते हुए ज्‍योति को ही काम करने से मना कर दिया और संस्‍थान से बाहर निकाल दिया. जबकि वरिष्‍ठ सहयोगी को बख्‍श दिया गया.

इसके बाद से ज्‍योति कहीं काम नहीं कर रही थीं. इस घटना के बाद से ज्‍योति मानसिक रूप से काफी परेशान चल रही थीं. हालांकि ज्‍योति की आत्‍महत्‍या की खबर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. कहा यह भी जा रहा है कि ज्‍योति की अचानक तबीयत खराब हो जाने के चलते मौत हुई है. हालांकि जागरण ने ज्‍योति के जहर खाने की एक छोटी सी खबर छापी है. जिस समय खबर छापी गई उस समय ज्‍योति का इलाज वाराणसी के सिंह एवं मेडिकल रिसर्च सेंटर में चल रहा था तथा हालत गंभीर बनी हुई थी.

बनारस के मीडिया हलकों से जो खबर छनकर आ रही है उसके मुताबिक ज्‍योति ने जहर सांध्‍य अखबार के एक पत्रकार के घर पर खाया था. इस मामले में ज्‍योति के परिवार वाले भी अपनी जुबान खोलने को तैयार नहीं है. पत्रकारों से जुड़ा होने की वजह से इस मामले को पूरी तरह दबाने की कोशिश की गई. इस मामले में कहीं भी पुलिस इनवाल्‍ब नहीं हुई. ना ही ज्‍योति के परिवार वालों ने किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. जिससे ज्‍योति की मौत और उसके कारणों को लेकर रहस्‍य बरकरार है.

सूत्रों का कहना है कि बनारस के कुछ वरिष्‍ठ पत्रकारों के दबाव, परेशानी तथा बदनामी के डर से ज्‍योति के परिवार के लोग इस मामले में सच या झूठ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं कि आखिर ज्‍योति की मौत कैसे हुई. मामला पुलिस तक नहीं पहुंचने की वजह से ज्‍योति का पोस्‍टमार्टम भी नहीं कराया जा सका. अपुष्‍ट खबर यह भी है कि कुछेक दिन पहले ज्‍योति हिंदुस्‍तान कार्यालय गई थी जहां उसे काफी कुछ बोला गया, जिससे वह परेशान थी.

हालांकि बनारस के अखबारों की यह सच्‍चाई है कि छोटे पदों पर काम करने वालों को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया जाता है. सही होते हुए भी ज्‍यादातर इन्‍हें ही अखबारों से बाहर कर दिया जाता है. कमोवेश सभी बड़े अखबारों के हालात ऐसे ही हैं. ज्‍योति शायद अन्‍य पत्रकारों की तरह हालातों से लड़ नहीं पाई जिसके चलते उसने मौत को गले लगाने का निर्णय ले लिया. ज्‍योति के मौत कारण चाहे जो हो, परन्‍तु अखबार के प्रबंधन को इससे सबक लेने की जरूरत है कि उनकी एकतरफा कार्रवाई किसी की जान भी ले सकती है.

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0 Comments

  1. jainarayn mishra

    July 21, 2011 at 8:36 pm

    पत्रकारिता में पनप रही माफिया संस्‍कृति की परिणति है ज्‍योति श्रीवास्‍तव की आत्‍महत्‍या। बनारस में लगभग सभी मीडिया हाउसों में बहुत से दलाल और गुंडे पत्रकार के वेश में बैठे हैं। उनका काकस इतना मजबूत है कि वे किसी असली पत्रकार को मुंह तक खोलने नहीं देते हैं। ज्‍योति श्रीवास्‍तव के साथ भी वही हुआ। यौन उत्‍पीड्न के खिलाफ मुंह खोलने पर संस्‍थान से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया। दोषी संदीप त्रिपाठी को भुर्रा और संपादक का वरदहस्‍त होने के चलते बाल बांका भी नहीं हुआ। ज्‍योति की मौत में कई राज छिपे हैं। यदि निश्‍पक्ष जांच हुई तो कई चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। जहर खई वह एक पत्रकार के घर। भर्ती कराई गई मलदहिया के एक अस्‍पताल में। मौत के बाद पुलिस को सूचना दिये बिना आनन फानन में लाश जला दी गई की राज न खुले। और उसके घरवालों को इतना डरा दिया गया कि असलियत बोलने में उन्‍हें मौत नजर आ रही है। इसलिए वे चुप हैं। जयनारायण मिश्र, अस्‍सी, वाराणसी

  2. arvind

    July 22, 2011 at 5:45 am

    पूलिस इसकी जांच करे। हद हो गयी, सारे लोग जानते है कि ज्‍योति का हिंदुस्‍तान में यौन शोषण हुआ है।

  3. s.p singh

    July 23, 2011 at 4:52 am

    sach samne anna chahiye ,taki jyoti ko insafe mil sake . is mout par lipapoti karne walo ko v sakth saja milni chahiye . kisi ki mout itni sasti nahi hoti hai

  4. sunil kumar mishra

    July 28, 2011 at 2:07 pm

    jyoti ko insaaf har hal mein milna chahiye..she was a good student..patrakarita jagat ke liye yah khabar nishchit taur par sharmshar karne wali hai..patrakarita jagat mein kuchh bhi karne ki aazadi samajhne wale dalal patrakaro ko saja milni chahiye..jisse aur koi jyoti is tarah ka kadam na uthaye…bhagwan mritak ki atma ko shanti pradan karein aur us neech patrakar ko saja…

  5. shilpee seth

    July 28, 2011 at 6:20 pm

    jyoti ko nyaay milna hi chahiye… na sirf police prashashan ki or se ,, balki media ki traf se bhi… otherwise… mhila karmchariyo ki sankhyaa lgaatar kam hogi.. aur media karmiyo se wiswas bhi..

  6. prashant tripathi rashtriya sahara

    July 30, 2011 at 3:18 am

    jeete ji to jyoti ko insaf nahi mila kam se kam marne ke bad to uske gunahgaro ko saza mile. mai eak sawal apne media ke respected logo se karna chahta hu ke puri duniya ka dukh dard batne wala patrkar apne mamlo me itna ashay kyo ho jata hai aur media jagat ke sammanit log sirf is per vichar deker apni kartbyo ke iti kyo ker lete hai . media pariwar ka bada hone ke nate kya unki yahi jimmedari banti hai . prashant tripathi rashatriya sahara …….varanasi…..09450110473

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