हिंदुस्तान ने बिहार में तहसील स्तर के पत्रकारों के लिए नया फरमान जारी किया है. अब तक फोन-फैक्स के सहारे अपनी खबरों को ब्यूरो कार्यालय भेजने वाले पत्रकारों को स्पष्ट कह दिया गया है कि अब वे लैपटॉप और इंटरनेट की व्यवस्था करें अथवा कहीं और नौकरी की तलाश कर लें. प्रबंधन के इस फरमान के बाद से ही तहसील स्तर के पत्रकार परेशान हैं. उनके लिए एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई बन गई है.
सूत्रों का कहना है कि यह निणर्य उच्च स्तर पर लिया गया है. प्रबंधन इससे तहसील एवं प्रखंड के नाम पर कई जगहों पर खुले कार्यालयों को बंद करके अपना खर्च कम करना चाहता है, पर इसके लिए बकरा तहसील स्तर के स्थानीय प्रतिनिधियों को बनाया जा रहा है. इन प्रतिनिधियों को लैपटॉप खरीदने को मजबूर किया जा रहा है, जो प्रतिनिधि पैसे के बारे में कह रहे हैं उन्हें साफ कह दिया जा रहा है कि फिर आप अपनी व्यवस्था कहीं और कर लीजिए. प्रतिनिधि परेशान हैं.
प्रबंधन के इस निर्णय से तहसील यानी अनुमंडल स्तर के पत्रकार परेशान हैं, क्योंकि अखबार उन्हें इतना पैसा नहीं देता है कि वो लैपटॉप खरीदने लायक बचत कर सकें. ज्यादातर विज्ञापन से मिलने वाले कमीशनों पर निर्भर रहते हैं. निकाले जाने से परेशान हिंदुस्तान के पत्रकार अब कर्ज-उधार लेकर अपने लिए लैपटॉप खरीद रहे हैं. जो खरीद पाने में सक्षम नहीं हैं अब वे भरे मन से दूसरे अखबारों में जुगाड़ लगाने लगे हैं. कुछेक प्रतिनिधियों का कहना है कि अवसरों की मारामारी देखते हुए वो कैसे भी लैपटॉप खरीदने को मजबूर हैं. उन्हें संस्थान की तरफ से कोई सहायता भी नहीं दी जा रही है.












kamal sharma
September 8, 2011 at 7:39 am
लैपटॉप में ज्यादा पैसा निवेश करने से अच्छा है नेटबुक खरीद लें। लाने ले जाने में सुगम, एक किलो से ज्यादा वजन नहीं। काम लैपटॉप से ज्यादा अच्छा। कीमत तकरीबन 16 से 18 हजार रुपए।
arun kumar chaubey
September 8, 2011 at 10:21 am
sahi bat kharidana chahiye othrerwise company chode. hindustan to kahata hi hai ki jisko asuvidha ho wah chod de koi doctor to kaha nahi hai.
anand
September 8, 2011 at 12:05 pm
good idia sir jee
श्रीकांत सौरभ
September 8, 2011 at 3:43 pm
जमाना तकनीकी का है . कब तक इस सच्चाई से मुंह मोड़कर रहोगे भाई . पटना के हरिनिवास कामप्लेक्स मे असुस(asus) का नवीनतम नेटबुक 12 हजार में आ जाएगा . इसे खरीद कर प्रयोग में लाया जा सकता है .
puran chand
September 8, 2011 at 3:51 pm
अरे भाई ,
भ्रष्ट अधिकारी, काले व्यापारी , थाना , कस्टम , एसएसबी वाले , चोर -पाकिटमार, चरसी -स्मैकिये , नेता, तथाकथित समाजसेवी किस दिन काम आयेंगे ?
किसी से लैपटॉप मोच लीजिये !
कौन सी बड़ी बात है ?
टीवी चैनेल के स्ट्रिंगरों को भारी-भारी कैमरा कंपनी वाले दिये हैं क्या ?
नव्बे परसेंट स्ट्रिंगरों को दो से चार चक्के वाली गाड़ियाँ हिंदुस्तान से मिलीं हैं ?
दिन भर हकासे-पियासे, दनदनाये, दफ्तरे -दफ्तर घूमते रहते हो .
पेट्रोल क्या शशि शेखर के पिछवाड़े से आता है ?
saurabhjaisawal
September 13, 2011 at 3:55 pm
shashi shekher ji tuglaki farman mat lkgu karo. tahsilon ke reporters ko dalali kane ko prarit mat karo.tahsil ke reporter chori chhipe jo kar rahe hai wah sadak per aajayega. aap kaya dete ho ?aapke staffer ki tarh dalali nahi ker rahi hai.shashi shekher i industan me aapke ane se pahle kam dalali hoti thi aab cham per hai.Bareilly, kanpur,varansi, agra me khulker upri kamai ho rahi hai. Bareilly ke reporter to c han mahino me malamal ho gaye hai.