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हिंदुस्‍तान ने चुराई कॉम्‍पैक्‍ट की खबर!

हिंदुस्‍तान आगरा में न जाने क्या हो रहा है। पहले यहां भास्कर, भोपाल की खबरें एक महिला रिपोर्टर के नाम से छापी जा रही थीं। इसके सबूत भड़ास को दिए जा चुके हैं। लेकिन अब तो हद ही हो गई है। आगरा के अखबारों की खबरें भी चोरी करके छापी जा रही हैं और वो भी बाईलाइन यानी रिपोर्टर के नाम से।

हिंदुस्‍तान आगरा में न जाने क्या हो रहा है। पहले यहां भास्कर, भोपाल की खबरें एक महिला रिपोर्टर के नाम से छापी जा रही थीं। इसके सबूत भड़ास को दिए जा चुके हैं। लेकिन अब तो हद ही हो गई है। आगरा के अखबारों की खबरें भी चोरी करके छापी जा रही हैं और वो भी बाईलाइन यानी रिपोर्टर के नाम से।

अमर उजाला के बच्चा अखबार कॉम्पैक्ट में 15 मार्च को पेज-तीन पर खबर छपी। इसका शीर्षक था- शिल्पग्राम में महसूस होगा ताजमहल। लखनऊ में डीजी टूरिज्म, आगरा के मंडलायुक्त और सहायक निदेशक पर्यटन के बीच हुई बैठक में जो तय हुआ था, वह खबर में जस का तस प्रस्तुत कर दिया गया। इसमें बताया गया था कि ताजमहल में जाने से पूर्व ही शिल्पग्राम में यह अहसास होगा कि आप ताजमहल में हैं।

हिन्दुस्तान ने यही खबर 16 मार्च को पेज नंबर-एक पर किन्ही मनोज मिश्र के नाम से  प्रकाशित की है। इसका हेडिंग बदल दिया गया है- अब एक टिकट में दो बार देखिए ताजमहल। बाकी सभी तथ्य वही हैं जो कॉम्पैक्ट छाप चुका है। इस खबर में मुख्य हेडिंग और सब हेडिंग रिपीट हो रही है। लगता है हिन्दुस्तान के सिटी और डेस्क इंचार्ज दूसरे अखबार नहीं पढ़ते हैं। अगर आगरा के अन्य अखबार पढ़ रहे होते तो इस तरह से खबरें रिपीट नहीं होती।

हिन्दुस्तान, आगरा के संपादक नए हैं। उन्हें नहीं पता कि यहां के अखबारों में क्या छप चुका है, क्या नहीं। उनकी नजर में अपने नंबर बढ़ाने के लिए रिपोर्टर से लेकर इंचार्ज तक कुछ भी कर रहे हैं। लेकिन जो लोग मीडिया पर नजऱें रखे हुए हैं, उनसे कैसे बच सकते हैं।

आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. manish agarwal

    March 18, 2011 at 6:45 am

    यह सब यहां के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है। ऐसा लगता है कि स्थानीय संपादक और समाचार संपादक आंखें बंद कर काम कर रहे हैं। क्या शशि शेखर को इनकी अक्षमता दिखाई नहीं देती। रही बात रिपोर्टर की तो यहां के रिपोर्टर फोन से ही सारी रिपोर्टिंग करते हैं। फील्ड में जाएं तो असलियत पता चले। कुल मिलाकर अखबार की लुटिया डुबोने में कहीं कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ रहा।

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