राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार अलंकरण समारोह भोपाल में आयोजित हुआ। जिसमें वर्ष 2008 का गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार माधव गोविंद वैद्य, 2009 के लिये हृदय नारायण दीक्षित और वर्ष 2010 आनंद प्रकाश मिश्र अभय को दिया गया। वर्ष 2009 का माणिकचन्द्र वाजपेयी पुरस्कार राधेश्याम शर्मा और वर्ष 2010 का पुरस्कार जयकृष्ण गौड़ और वर्ष 2008 का विद्यानिवास मिश्र पुरस्कार वेदप्रताप वैदिक, वर्ष 2009 का जगदीश उपासने और वर्ष 2010 का दीपक चौरसिया को प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा के साथ पत्रकारिता करने वाले और मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिये समर्पित पत्रकारों की सहायता के लिये श्रद्धा निधि स्थापित की जायेगी। इस निधि की रूप रेखा शीघ्र तय की जायेगी। चौहान यहां रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश शासन के जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी, स्व. माणिकचन्द्र वाजपेयी और आचार्य विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में स्थापित राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया द्वारा सरकार के कार्यकलापों और गतिविधियों की स्वस्थ आलोचना स्वागत-योग्य है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था नहीं सुधरेगी, घोटाले और भ्रष्टाचार नहीं रूकेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के सभी क्षेत्रों में विकृतियां आने के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी विकृतियां आई लेकिन समर्पित पत्रकार ईमानदारी से अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं। पत्रकारिता ने पहले स्वतंत्रता के लिये फिर स्वतंत्र भारत में विकास के लिये एवं आपातकाल में नागरिक स्वतंत्रता के अधिकारों के लिये संघर्ष किया है।
जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि प्रदेश में छोटे अखबारों को स्वस्थ पत्रकारिता के प्रोत्साहन देने के लिये सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से उजागर हुई कमियों से व्यवस्थाएं सुधारने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कारों की स्थापना गणेश शंकर विद्यार्थी, माणिक चन्द्र वाजपेयी, आचार्य विद्या निवास मिश्र की स्मृति को सम्मान स्वरूप की गई है। उन्होंने अगले वर्ष से इलेक्ट्रानिक मीडिया में उत्कृष्टता के लिये अखिल भारतीय स्तर का पुरस्कार स्थापित करने की घोषणा की। समारोह में मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष आयोजित संगोष्ठी में हुए विचार-विमर्श पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया।
माधव गोविंद वैद्य ने राष्ट्र और राज्य के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पित होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता राज्य को दिशा देने का कार्य करती है, इसलिये राज्य के बजाय राष्ट्र के लिये समर्पित रहना जरूरी है। आयुक्त जनसम्पर्क राकेश श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कारों की स्थापना के उद्देश्य और पृष्ठभूमि की चर्चा की।
पुरस्कार स्वरूप सभी लोगों को शाल-श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र और दो लाख रूपये की राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर श्रीधर पराड़कर सहित सभी अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये गये। आभार प्रदर्शन अपर संचालक जनसम्पर्क लाजपत आहूजा ने किया। प्रशस्ति-वाचन संयुक्त संचालक ध्रुव शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का संचालन विनय उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सुश्री सुहासिनी जोशी ने वंदे मातरम और मध्यप्रदेश गान का गायन किया।












Girish Mishra
March 27, 2011 at 4:18 am
Good public relations by BJP-controlled outfit. Award-getting people belong to the Parivar or are foot-loose journalists. I hope, they will serve their political maters faithfully.
om prakash gaur
March 27, 2011 at 10:28 am
सर, वैचारिक असहमति का स्वागत है. राष्ट्र, विचारधारा, समाज और सामाजिक सरोकारों के लिए पत्रकारिता करने वाले सभी का सम्मान किया जाना चाहिए.