राष्ट्रीय सहारा वाराणसी से एक खबर है कि यहां भी हेड ऑफिस की तरह ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। सभी कर्मचारियों को पैंट-शर्ट-टाई पहनने का हुक्मनामा जारी किया गया है। तत्संबंधी 16 सूत्री हुक्मनामा वाराणसी आ चुका है। ड्रेस कोड लागू होने के साथ ही बिना हेलमेट दुपहिया चलाने या फिर चार पहिया के आगे बैठने वालों के लिए सीट बेल्ट बांधना अनिवार्य कर दिया गया है।
सहारा के किसी ने भी भले ही वह चपरासी ही क्यों न हो, ऐसे किसी सदस्य को बिना हेलमेट या फिर बिना सीट बेल्ट के शहर के किसी भी कोने में, गली में, नुक्कड़ पर या कहीं भी देख लिया और दफ्तर रिपोर्ट कर दी तो कोई एन्क्वायरी नहीं, कोई पूछताछ नहीं सीधे सैलरी से दस प्रतिशत वेतन उड़ा दिया जाएगा। यह सर्कुलर तीन दिन पहले ही वाराणसी आया है।
पहले से ही दबाव में काम कर रहे लोगों के लिए यह अचंभे भरा हुक्मनामा है। यही नहीं अपशब्दों का प्रयोग करने पर भी दस फीसदी सैलरी उड़ाने का प्रावधान है। कल्चर्ड तरीके से बात करने पर ही पूरी पगार मिलने की बात कही गयी है। हुक्मनामे में आगे कहा गया है कि किसी से कोई रगड़ा हो तो मामला पहले विभागाध्यक्ष के पास जाना चाहिए। उनसे ही बात करनी होगी।
हुक्मनामे की कुछ शर्तें इस प्रकार हैं- धोती-कुर्ता-दुपट्टा या कुर्ता-पायजामा-चप्पल नाट एलाउड। यानी इसे पहनना है तो घर में पहनो। दफ्तर आना है तो ड्रेस कोड में आओ। यही नहीं समूह बनाकर घूमने-बतियाने पर भी रोक है। यानी कार्यालय में धारा 144 जैसे माहौल में अपना काम करते दिखो। मतलब बिल्कुल स्कूल के शालीन बच्चों की तरह कार्यालय में पेश आओ, अगर शोर करते, बदमाशी करते या स्कूली बच्चों वाली कोई शरारत करते नजर आए तो आर्थिक दंड तय।
कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे तानाशाही वाला कदम करार दिया है। एक तो छुट्टियां मिलती नहीं दूसरी ओर काम का दबाव इतना कि अनेक लोग भागने-पराने के मूड में हैं। बेकार की गपशप अब सहारा वाराणसी में पुराने दिनों की बातें हो जाएंगी। मजे की बात यह कि प्रसार व्यवस्थापक टीबी सिंह पर कभी भी ड्रेस कोड कहीं भी लागू नहीं हुआ, न अमर उजला, न आज, न पायनियर और न हिंदुस्तान में।
अब टीबी सिंह को काली पैंट, झक सफेद शर्ट और सहारा की काली टाई पहननी होगी। टाई तो उन्होंने कभी लगाई नहीं और शर्ट भी हमेशा बाहर करके ही पहनते हैं। ड्रेस कोड लागू होने के बाद टाई-पैंट पहने टीबी सिंह को देखना दिलचस्प होगा। जागरण के प्रसार व्यवस्थापक राजेश यादव, हिंदुस्तान के प्रसार व्यवस्थापक सी पी राय और अमर उजाला के नेशनल हेड प्रसार यादवेश कुमार के लिए टी बी सिंह को टाई-शर्ट-पैंट-बूट पहने जेंटलमैन बने टीबी सिंह को देखना अचंभे से कम न होगा। साभार : पूर्वांचलदीप












EK SUBHCHINTAK
March 28, 2011 at 5:44 am
Bau Sb….
Ab to Kare k hi padi ………;)
😉
Rishi
March 28, 2011 at 7:29 pm
SAHARA KO KHABRON SE KAM, AUR NAUTANKI SE KUCH JADA HI LAGAO HAI. YE KOI NAI BAAT NHI, PATNA OFFICE ME BHI YE NAATAK AKSAR DIKHAI DETA HAI
EK SUBHCHINTAK
March 29, 2011 at 7:49 am
Bau Sb . !!! सी पी राय Jee wait kar rahe hai iska !!!!!!!! 😉
sanjay
March 30, 2011 at 2:50 pm
sahara me yehi sab hota hai
kabhi kabhi patna me bhi hona chahiye
Sushil Mishra
April 1, 2011 at 6:36 pm
Sahara wale ab sathiya gaye hain, Lagta hai ab unka business thapp hota ja raha hai. Falswaroop iski bhadas Karmachariyon par nikali ja rahi hai.
duggal
April 21, 2011 at 9:21 am
yaha to yahi sab nautanki hi chalti hai kam to kuch hota nahi
kumar kalpit
June 23, 2011 at 11:38 pm
YASHWANT JEE YAH TUU HONA HEE THA . AARE JB VE AMITABH BACHCHAN, VESHWARYA RAI, T.N.SHESHN ,RAJ BABAR AUR BHARATIY KREKAT TEEM KO WARDEE PANA KAR SAHARA PRANAAM KARA LIYA TUU VARANSHEE RASHTRYA SAHARA KE LOG KISH KHET KEE MOOLEE HAI