: खुद राडिया ने किया खुलासा : एक मैग्जीन निकालकर एक आदमी इतना ”बड़ा” संपादक बन बैठा कि वह मैग्जीन को भूलकर सत्ता की दलाली करने लगा. और दलाली भी ऐसी वैसी नहीं. विजय माल्याओं के प्रोजेक्ट को पास करने की दलाली. बड़े बड़े औद्योगिक घरानों की दलाली. इस शख्स का नाम है सतीश ओहरी. इस कम चर्चित नाम सतीश ओहरी को सुनकर आप भी चौंकेंगे लेकिन इस आदमी के कारनामें बड़े बड़े हैं. यह खुद को संपादक बताता है. संपादक ही नहीं, मालिक भी, मुद्रक भी और प्रकाशक भी.
जिस मैग्जीन को ये प्रकाशित करता है उसका नाम है ”बिजनेस ऐट जीरो आवर”. संपादक सतीश ओहरी को आसमानों की बहुत चिंता थी. और उतनी ही चिंता भारत सरकार के उड्डयन मंत्रालय की भी थी. तभी तो ओहरी भारत सरकार के उड्डयन मंत्रालय के विदेशी निवेश प्रक्रिया (एफडीआई पालिसी) के बारे में सब कुछ जान लेना चाहता था. ओहरी को इस बात की भी चिंता थी कि भारत सरकार की गलत पालिसी के कारण आसमान से धन नहीं बरस रहा है. भारतीय आसमान में विदेशी एयरलाइंस कंपनियों की रूचि भी लगातार कम होने से निराश ओहरी एयरलाइंस कम्पनी किंगफिशर के मालिक विजय माल्या की एफडीआई प्रक्रिया में सुस्ती से भी परेशान था.
सतीश ओहरी का किसी कॉरपोरेट घराने से सीधा संबंध नहीं है. उसका परिचय है मासिक पत्रिका बिजनस एट जीरो आवर के सम्पादक के रूप में. जी हाँ, कुख्यात कॉरपोरेट दलाल नीरा राडिया ने सतीश का यही परिचय सीबीआई के अधिकारियों को दिया. ज्ञात हो कि नीरा राडिया के टेलीफ़ोन रिकॉर्ड में नीरा और सतीश की भी बातचीत के टेप सीबीआई अधिकारियों के हाथ लगे थे, जिसके बाद नीरा ने सतीश के बारे में यह सब राज खोला. हालाँकि ओहरी की पत्रिका बिजनस एट जीरो आवर वर्ष 2009 में ही शुरू हुई है और बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं है. सतीश इस पत्रिका के मालिक, प्रकाशक और सम्पादक भी है. इस अखबार का रजिस्टर्ड कार्यालय शिवालिक, पंचशील, गीतांजलि रोड, नई दिल्ली (आरएनआई कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार) बताया गया है. हैरान करने वाली बात यह कि नीरा राडिया ने इस पत्रिका के बारे में सीबीआई के अधिकारियों को बताया कि यह पत्रिका राजनीतिक विकास, संसद और राष्ट्रीय मामलों के ख़बरों वाली पत्रिका है. यानि विशुद्ध रूप से राजनीतिक पत्रिका. पर पत्रिका के सम्पादक का कृत्य हैरतंगेज है.
नीरा राडिया ने सीबीआई अधिकारियों को इस बात की भी जानकारी दी कि सतीश ओहरी ही वह शख्स है जिसने नीरा राडिया को इस बात की जानकारी दी थी कि स्वान टेलीकॉम और रिलायंस की जांच केन्द्रीय सतर्कता कार्यालय (सीवीसी) द्वारा की जा रही है. यहाँ तक कि सतीश ओहरी को इस बात की भी जानकारी थी कि स्वान टेलिकॉम और रिलायंस के इस विवाद को पीआईएल के माध्यम से अदालत में भी ले जाया जा रहा है. और तो और, सबसे बड़ा खुलासा यह कि रिलायंस को मदद करने के लिए तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रुमक प्रमुख करूणानिधि को पैसे दिए गए है और इस पैसे का भुगतान लन्दन में किया गया है. हालाँकि नीरा राडिया ने इस तरह के किसी भुगतान की जानकारी होने से इनकार किया. बहरहाल लाख टके की बात यह कि सतीश ओहरी को इस मामले की पूरी जानकारी थी कि ए. राजा को कब-कब पैसे दिए गए. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मामले की जांच कर रहे विभाग सतीश ओहरी से कब पूछताछ करते हैं ताकि इस हाई प्रोफाइल घोटाले में शामिल
सभी लोग बेनकाब हो संके.
लेखक अनंत कुमार झा झारखंड की पत्रकारिता में एक दशक से सक्रिय हैं. प्रिंट और टीवी दोनों माध्यमों में काम कर चुके हैं. इन दिनों दिल्ली में हैं.












Sunil Jain
April 16, 2011 at 11:08 am
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