राज एक्सप्रेस भोपाल से नवाज शरीफ ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत हिंदुस्तान, मुजफ्फरपुर से करने जा रहे हैं. उन्हें यहां भी सब एडिटर बनाया गया है. नवाज ने अपने करियर की शुरुआत नई दुनिया, भोपाल के साथ की थी. वे ईटीवी से भी जुड़े रहे.
हिदुस्तान, बरेली विनोद जोशी ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर डिजाइनर थे. वे अपनी नई पारी अमर उजाला, बरेली से कर रहे हैं. वे पिछले काफी समय से हिंदुस्तान से जुड़े हुए थे. माना जा रहा है कि उन्होंने कार्यालय की आंतरिक दिक्कतों के कारण इस्तीफा दिया है.












mohan singh
April 22, 2011 at 3:14 pm
बरेली से तो तमाम लोगो को हिंदुस्तान छोड़कर जाना है क्योकि यहाँ चूतियों की फ़ौज काम कर रही है जो जितना बड़ा चमचा है उसकी उतनी ही मौज है यानि चूतियों की फ़ौज में चमचो की मौज. देखते रहो भाई आगे क्या होता है बस इंतज़ार की घडिया ख़तम होने वाली है सही लोग हिंदुस्तान जल्दी ही छोड़ देंगे वैसे विनोद भाई आपको बधाई की आपने इसकी शुरुआत की……………
rakesh
April 23, 2011 at 12:52 pm
दैनिक हिंदुस्तान प्रबंधन किस प्रकार से कर्मचारी विरोधी अभियान में लगा हुआ है इसे आप एग्रीमेंट लेटर को ही देख कर जान गए होंगे, समझ गए होंगे। हालांकि वह एंग्रीमेंट लेटर तो अभी मौखिक आदेश के द्वारा प्रतिबंधित हो गया है पर प्रबंधन ने अपनी बदनीयती नहीं छोड़ी है। इसलिए वह हर उन जगहों पर प्रहार कर रहा है जहां उसे कुछ संभावना दिख जाती है।
खबर है कि प्रबंधन इस समय बिहार में आतंक मचाए हुए है। इसके तहत प्रबंधन ने मौखिक आदेश जारी कर दिया है कि जो लोग मोटी तनख्वाह पाने वाले हैं उन्हें किसी प्रकार से बाहर किया जाय औऱ जो लोग बेज बोर्ड वालों हों उनपर इतना अत्याचार किया जाय कि वे स्वयं ही संस्थान छोड़कर भाग जाए। इसलिए उनसे वह काम लिया जा रहा जिसके लिए वह योग्य ही नही हैं औऱ न ही उन्होंने जीवन में ऐसा कोई काम किया है। प्रबंधन की कोशिश है कि वेज बोर्ड वालों से किसी प्रकार से संस्थान से मुक्ति मिल जाए।
सूत्रों ने बताया कि मोटी तनख्वाह पाने वालों में बिहार में सबसे पहले प्रबंधन ने मुजफ्फरपुर के डीएनई अजय वर्मा को शिकार बनाया है। उन्हें संपादक ने अपने केबिन में बुला कर कहा कि मैं इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। आदेश है। इसलिए आप संस्थान से इस्तीफा दे दें या फिर कंपनी आपको बर्खास्त कर देगी जिसके बाद आप को दिक्कत हो सकती है। मसलन उनसे डरा धमका कर संपादक ने एक मोटी रकम पाने वाले से मुक्ति पा ली। सूत्र बता रहें हैं कि वे जिस उम्र में हैं वे कहीं जा भी नहीं सकते और जिम्मेदारी का बोझ इतना बड़ा है कि संभव ही है कि वे उठा पाएं। क्योंकि अभी उनको अपनी बिटिया की शादी भी करनी है।
वहीं सूत्र बता रहे हैं कि प्रबंधन की निगाह में वे लोग भी इस समय खटक रहे हैं जो वेज बोर्ड बाले हैं। कंपनी की कोशिश है कि किसी प्रकार से इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाय या फिर उन्हें इतना प्रताडि़त किया जाय कि वे स्वयं ही संस्थान छोड़कर भाग जाएं। इसके लिए कंपनी उनसे वह काम ले रही है जिसका न उन्हें अनुभव है और न ही उसके लिए वह योग्य है। पटना में सभी वेज वोर्ड बालों को इस समय सेंटर पर भेजा जा रहा है। मसलन आप एचआऱ में काम करते हो, या फिर संपादकीय में या फिर आप किसी भी विभाग में हों…. आपको तीन बजे सुबह उठकर सेंटर पर पहुंचना है और वहां जाकर आपको देखना है कि कहां कापी जा रही है कहां नहीं जा रही है। कंपनी को इससे मतलब नहीं है कि कंपनी ने किस व्यक्ति को किस लिए अप्वाइंट किया है, या किससे कौन सा काम लेना है कंपनी का मकसद सिर्फ इतना है कि इन्हें इतना प्रताडि़त करो कि ये स्वयं ही कंपनी से भाग खड़े हो ..छोड़ दें। पर सूत्रों का कहना है कि वेज बार्ड वाले अपने अधिकार जानते हैं इसलिए किसी दिन ऐसी नौबत न आ जाए कि कंपनी के बड़े अधिकारी कोर्ट के दरवाजे पर नाक रगडते हुए दिखे।