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अमरीकियों के नाम लादेन का आख़िरी पैग़ाम

[caption id="attachment_20328" align="alignleft" width="94"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]आधी रात के वक्त जब अमरीकी फौजों ने ओसामा बिन लादेन के सिर पर बंदूकें तान दी थीं, तो लादेन वीडियो रिकार्डिंग ख़त्म करके सोने की तैयारी कर रहा था। आईएसआई ने उसे पहले ही बता दिया था कि उसका खेल ख़त्म हो चुका है, क्योंकि सीआईए के दबाव में आख़िरकार उसे बताना पड़ गया है कि उसने लादेन को कहाँ छिपा रखा है। आईएसआई से ख़बर मिलने के बाद ओसामा ने फौरन अपने वीडियोग्राफर को बुलाया और अपनी आख़िरी रिकार्डिंग करवाई।

मुकेश कुमार

मुकेश कुमार

आधी रात के वक्त जब अमरीकी फौजों ने ओसामा बिन लादेन के सिर पर बंदूकें तान दी थीं, तो लादेन वीडियो रिकार्डिंग ख़त्म करके सोने की तैयारी कर रहा था। आईएसआई ने उसे पहले ही बता दिया था कि उसका खेल ख़त्म हो चुका है, क्योंकि सीआईए के दबाव में आख़िरकार उसे बताना पड़ गया है कि उसने लादेन को कहाँ छिपा रखा है। आईएसआई से ख़बर मिलने के बाद ओसामा ने फौरन अपने वीडियोग्राफर को बुलाया और अपनी आख़िरी रिकार्डिंग करवाई।

वीडियो रिकार्डिंग का टेप उसने अल जजीरा टीवी को भेजने के आदेश दिए और अपनी मनपसंद व्हिस्की मँगाकर दो बड़े पैग लिए। इसके बाद अल्लाह का शुक्र अदा किया और बिस्तर पर लेटकर आँखें मूँद लीं। अभी वह फ्लैश बैक में गया ही था कि उसे अपने सिर पर चुभन सी महसूस हुई। इस चुभन को वह खूब पहचानता था। वह समझ गया कि अंत आ गया है। उसने धीरे से आँखें खोलीं और मुस्करा दिया। अमरीकी सैनिकों को उसका मुस्कराना अच्छा नहीं लगा। उन्हें अपेक्षा थी कि वह घबरा जाएगा और उनके पैरों पर पड़कर ज़िंदगी बख्शने के लिए गिड़गिड़ाएगा। अमरीकी साम्राज्य का गुस्सा उनके चेहरों पर तैरने लगा और उन्होंने ट्रिगर दबा दिया। ओसामा की खोपड़ी में सुराख बन गया।

उधर, घात लगाकर बैठे सैनिकों ने वीडियो रिकार्डिंग ले जा रहे आदमी को धर-दबोंचा। एक गोली उस पर भी खर्च की और टेप अपने कब्ज़े में कर लिया। ये टेप अब कोई नहीं देख पाएगा। मगर वीडियोग्राफी करने वाले को उसका मजमून बखूबी याद रह गया था। आख़िर ये ओसाम का आख़िरी पैग़ाम था। उसने एक पाकिस्तानी पत्रकार को ये पैग़ाम हू ब हू सुना दिया। वह पत्रकार इस मजमून को बड़े अख़बारों को बेचने की तैयारी कर रहा है और ओसामा के आख़िरी लम्हे नाम से किताब भी लिख रहा है। किसी को न बताने की शर्त पर उसने मुझे फोन पर जो ओसामा के पैग़ाम की जो बातें बताईं वे इस तरह हैं-

मेरे अमरीकी दोस्तों,

मैं जानता हूँ कि तुम लोग मेरी मौत का इंतज़ार कर रहे हो और जैसे ही तुम्हें ख़बर मिलेगी तुम खुशी से झूम उठोगे। तुम्हारे अंदर जल रही बदले की आग तुम्हे बेइंतहा खुशी देगी और तुम्हारा सीना इस फ़ख्र के साथ और चौड़ा हो जाएगा कि तुम दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुल्क के शहरी हो जो अपने दुश्मन को किसी भी मुल्क में घुसकर मार सकता है। तुम्हारी ये प्रतिक्रिया लाज़िमी  है, क्योंकि तुम बरसों से बदले की आग से सुलग रहे हो और पूरा सच नहीं जानते। तुम उतना ही सच जानते हो जितना तुम्हें बताया गया है और जितना तुम्हारे दिमाग़ों में भर दिया गया है। ये सच भी गढ़ा हुआ सच है। अमेरिकी साम्राज्य ने दुनिया पर राज करने के लिए बहुत सारे सच गढ़े हैं और गढ़ता रहता है। इन सचों का मक़सद अपने आर्थिक और सामरिक वर्चस्व का विस्तार होता है बस। लोकतंत्र के नाम पर वह दुनिया भर में कठपुतली हुकूमतें बनाता है और इस तरह अपनी कंपनियों को लूटने की राहें आसान करता है।

बहरहाल, मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि असली सच ये है कि मुझे जिहादी बनाने वाला और कोई नहीं तुम्हारा मुल्क अमेरिका  ही है। इसी ने मुझ जैसे लोगों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में बंदूक थमाई और कहा कि रूसी फौजों के साथ जिहाद करो। सऊदी अरब और पाकिस्तान की पिट्ठू हुकूमतें उसके साथ थीं। लाखों लोगों को इस जिहाद के नाम पर ख़ूनी  जंग में झोंक दिया गया। अमरीकी डॉलर और गोला-बारूद से हमने हज़ारों लोगों को मौत के घाट उतारा और हमारे भी हज़ारों लोग हलाक हो गए। इस झूठी जिहाद ने हमारी रगों में नफरत और हिंसा का ज़हर भर दिया और फिर ये पूरी दुनिया में फैलता चला गया। पढ़ने-लिखने वाले तालिबान खूंख्वार जानवर बन गए। एक पूरी नस्ल तरक्की के रास्ते पर चलने के बजाय खुद को तबाह करने में लग गई। यही नहीं, इसके जवाब में दूसरे मजहब के लोगों में भी उसी तरह की हिंसा और नफरत पैदा हुई और उसके घातक नतीजे सामने आए।

मैं चाहता हूँ कि जब तुम मेरी मौत का जश्न मनाओ तो इन सब हादसों को भी याद करो। केवल 9-11 के मंज़र ही तुम्हारी आँखों के सामने न हों, बल्कि जहाँ-जहाँ भी अमरीकी फौजों ने अपनी ताक़त  से लाखों लोगों को मारा है वे भी तुम्हें याद आएं। तुम्हें वियतनाम, निकारागुआ, चिली याद आएं…..फिलिस्तीन, इराक, अफगानिस्तान याद  आएँ। तुम्हें वह सीआईए, मोसाद और आईएसआई याद आए जो अल कायदा से ज़्यादा खूनी संगठन हैं। तुम उन रोनाल्ड रेगन, जार्ज बुश को याद करो जो मुझसे भी बड़े कातिल हैं और जिन्होंने दुनिया में बड़े-बड़े नरसंहारों को अंजाम दिया है। तुम अमरीका की उन नीतियों पर ग़ौर करो जिनकी वजह से आज दुनिया की ज़्यादातर आबादी उससे नफरत करती है, उसके पतन की दुआ माँगती है। अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो तुम खुद को और अपने मुल्क को नहीं बदलोगे। तुम नहीं समझोगे कि आज सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन अल कायदा नहीं अमेरिका है और सबसे ज़्यादा आतंकवादी हरकतें भी वही करता है। ये और बात है कि उन्हें उस तरह पेश नहीं किया जाता। इसलिए हक़ीकत को समझो वर्ना इतिहास खुद को बार-बार दोहराएगा। अमरीका बार-बार अपने दुश्मन पैदा करेगा और फिर उसके नतीजे भुगतेगा।

मैं अपने जुर्म का इक़बाल करता हूँ। मैं कबूल करता हूँ कि मैं बहुत सारे कत्ले आम की वजह बना हूँ। अमरीकी ज़्यादतियों से लड़ने के लिए मुझे कोई और रास्ता तलाशना चाहिए था, मगर क्या करूँ रूसियों से लड़ते-लड़ते जिहाद का नारा और बंदूक मुझे इस कदर रास आ गए कि मैं उसी रास्ते पर चल पड़ा। मैं मानता हूँ कि मेरी वजह से बहुत से लोग गलत रास्ते पर चल पड़े। मगर यकीन मानिए कि अगर मुझे दूसरा जन्म मिला तो मैं इसे दोहराऊंगा नहीं। मैं अमेरिकी साम्राज्य के ख़िलाफ़ जंग ज़रूर लड़ूँगा क्योंकि मानवता की रक्षा करने के लिए ऐसा करना ज़रूरी है, मगर मजहब को आधार बनाकर नहीं। मैं अमेरिका का मोहरा नहीं बनूँगा और उसकी सियासत को आगे नहीं बढ़ाऊँगा।

मेरे अमरीकी दोस्तों, अलविदा कहने से पहले मैं अपने गुनाहों के लिए तुमसे माफ़ी माँगता हूँ और अल्ला ताला से दुआ करता हूँ कि वो आपको नेकनीयत और सद्बुद्धि बख्शे ताकि आप दुनिया की बेहतरी के लिए ऐसे काम करो जिससे दोबारा कोई ओसामा बिन लादेन पैदा न हो। इस मौके पर मैं अपने साथियों से भी गुज़ारिश करना चाहता हूँ कि वे भी लड़ाई का रास्ता बदल लें। इस ख़ूनी जिहाद  से न इस्लाम की भलाई होगी और न ही इंसानियत की। ख़ुदा  भी इसे पसंद नहीं करेगा। इसलिए वे बम विस्फोटों से तौबा करें और जद्दोजहद का कोई और रास्ता तलाश करें।

अब मैं आपसे इजाज़त चाहता हूँ। अमरीकी फौजी किसी भी वक्त आ सकते हैं और तब ये संदेश आप तक पहुँचाना मेरे लिए नामुमकिन हो जाएगा। इसलिए अलविदा।

आपका गुनहगार

ओसामा बिन लादेन

लेखक मुकेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. इन दिनों हिंदी राष्ट्रीय न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रेस’ के हेड के रूप में काम कर रहे हैं.

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0 Comments

  1. asif khan

    May 3, 2011 at 11:32 am

    बहुत उम्दा…..श्रीमान निसंदेह आपकी लेखनी काबिल-ए-तारीफ है। तथ्यों पर आधारित है। लेकिन माफी चाहूंगा…शायद ही उन्मादी लोग आपके तथ्य और गंभीर भावों को समझ पाये। बस उनके लिये एक मुसलमान मारा गया है यही जानकारी उनके लिये काफी है और वो इससे बहुत खुश है।

  2. sazid

    May 3, 2011 at 11:59 am

    मुकेश जी आप ने सही कहा कि ओसामा को किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिकी सम्राज्यवाद ने पैदा किया था. एक ओसामा तो मर गया लेकिन हर रोज अमेरिकी सम्राज्यवाद ना जाने कितने ओसामा पैदा कर रहा है. ओसामा को मारने से पहले अमेरिका को अपने उस विचार को मारना चाहिए जो ऐसे खुंखार लोगों को जन्म देता है.

  3. vipulsharma

    May 3, 2011 at 12:20 pm

    kya wakai aisa hua hoga!

  4. vipulsharma

    May 3, 2011 at 12:20 pm

    kya wakai aisa hua hoga. pata nahi . lekin mujhe toh yeh bakwas lag rahi hai.

  5. संजय कुमार

    May 3, 2011 at 1:19 pm

    लेख जानदार है ….. लेकिन काल्पनिक लगता है । अगर वाकई ओसामा को पहले पता चल गया रहता तो वो आराम से बैठकर विडिया रिकॉडिंग और शराब नही पी रहा होता …भागने का एक अंतीम प्रयास जरुर करता ।

  6. ajitabh

    May 3, 2011 at 1:21 pm

    aapki is story me dam ho na ho lekin mujhe jo baat khatakti hai wo yeh ki 40 minute ka operation chala, chopper crash hua ya kiya gaya.. ameriki jab wapas chale gaye tab pak ko iski khabar mili jabki paas me mititary camp aur na jaane kya kya hai.. police ya military kyo nahi aai jabki asmaan me helicopter madrata raha.. isi se lagta hai ki sach wah nahi jo america ya pak kah raha hai.. inlogo ne jihadio ke dar se kuch kahani taiyar kar li ki seel navy bina pak ko inform kiye aaye aur chale gaye..

  7. chandan srivastava

    May 3, 2011 at 3:39 pm

    nira bakwas…..is se jyada aur kuch nahi

  8. Rakesh

    May 3, 2011 at 3:49 pm

    जी इससे सिर्फ ये ज़ाहिर होता है की ओसामा बिन लादेन 2001 के बाद अमेरिकी निगरानी में ही रहा . और जब उसे अमेरिकी षड़यंत्र का पता चला तो उसके पास कोई रास्ता नहीं था सिवाय अपना जुर्म कबूल करने के . कुल मिला के अमेरिका ने 10 साल तक एशिया में 300 से ज्यादा सैनिक ठिकाने बनाने में ओसामा बिन लादेन के नाम और चेहरे का इस्तेमाल किया. और दोषी हुआ इस्लाम.

  9. धीरेन्द्र

    May 3, 2011 at 4:53 pm

    मैं आपके दर्द को समझ रहा हूं. आपके दुख पर सहानुभूति है.

  10. मुकेश कुमार

    May 3, 2011 at 5:21 pm

    भाईयों, किसी तरह की ग़लतफ़हमी न पालें। लेख काल्पनिक घटनाओं पर आधारित है। हाँ इसमें हक़ीक़त की मिक्सिंग ज़रूर की गई है। दरअसल, मीडिया और ख़ास तौर पर न्यूज़ चैनल रचित हमारी दुनिया में कल्पना और यथार्थ गड्मड्ड हो गए हैं, इसलिए कभी हक़ीक़त को समझने के लिए कल्पना का सहारा लेना पड़ता है और कभी कल्पनाओं को बिना सचाई जाने समझना मुश्किल हो जाता है। इसलिए निवेदन है कि इस काल्पनिक लेख को हक़ीक़त का चश्मा लगाकर पढ़ें।

  11. pramod kaushik

    May 4, 2011 at 6:26 am

    Respected Mukeshji
    Aapki kalpana nisandeh kabiletarif hai kyonki isme satya jhalkata hai.
    Amerika Varshon se yahi to karta aa raha hai. Ek nirankush Thanedar ki tarah puri duniya ka thanedaar ban baithe Amerika ko Apane liye koi kaide kanoon dikahai nahi dete jabki dashakon se aatankvaad jhel rahe Bharat ko usane hamesha sainyam rakhane ka paath padhaya hai. 9/11 hote hi khud to Bin Laden ko khojane hazaron kilometer door Afhghanistaan tak aa pahuncha jabki Bharat ko padosi ke khilaf bhi kadam uthane se rokta hai. Ghaziabad ke varisth patrakaar Shri Kuldeep Talwar theek hi kahate hain ki Amerika kewal Amerika ka hi dost hai. Itihaas gawah hai ki apane matlab ke liye vo kisi bhi had tak ja sakata hai.

  12. arbaaz

    May 4, 2011 at 10:03 am

    bhaiya kyon mahima-mandit kar rahe hain aise aatankvaadi ko…aapka kalpnik lekh kisi varg mein asli kee tarah bhej diya jaega aur aap bhee paap ke bhagidaar ho jaoge…

  13. gopal

    May 4, 2011 at 4:29 pm

    ap ! ne jo lika us par ak bar bharosa kar bhi leta hu ! lakin ap ko ye information dena vala pakistani journalist ne apko hi ye puri information ku batayi ! wo koi or journaist ko bhi bata sakta tha.

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