बिल्ली क्यों चली हज को?

मुकेश कुमार: जग बौराना : इन दिनों ये कहावत बहुत चल रही है…. सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली….. इस कहावत को सुनकर जिज्ञासुओं के मन में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि आख़िर बिल्ली को हज जाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या उसमें भक्ति भाव जाग गया कि उसने आव देखा न ताव और हज पर जाने का फैसला कर लिया…..

News Express to spend Rs 100 cr by March end

Television news channel News Express today said it will spend Rs 100 crore this financial year on operational expenses. “We have a budget of Rs 100 crore for operational expenses during this financial year. The company has already invested approximately Rs 40 crore in infrastructure and Rs 35 crore in distribution. Expansion budget will be allocated separately,” News Express Channel Head Mukesh Kumar said.

एक अनामंत्रित पत्रकार का उलाहना और छोटी सी गुज़ारिश

[caption id="attachment_20783" align="alignleft" width="94"]मुकेश कुमार मुकेश कुमार[/caption]आदरणीय, प्रधानमंत्री जी, मुझे बहुत खेद है कि संपादकों से मुलाकात में आपने मुझे आमंत्रित नहीं किया जबकि मैं उन तमाम कसौटियों पर खरा उतरता हूँ जिसके आधार पर आप पत्रकारों को बातचीत के लिए बुलाते हैं। मुझे नहीं मालूम कि आपने ऐसा क्यों किया होगा पर लगता है किसी ने मेरे ख़िलाफ़ आपके कान भरे हैं।

फाँसी की उलटबाँसी (अंतिम)

मुकेश कुमार न्यूज़ चैनलों में बीमार बाबा के दृश्य छा गए। दिन-रात उनकी हेल्थ बुलेटिन चलने लगीं और उनके ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव सेंसेक्स की तरह बताया जाने लगा। बहरहाल, किसी तरह दो-चार दिनों में बाबा ठीक हुए मगर एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया। हुआ यूं कि लोकसभा में भ्रष्टाचार को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चल रहा था। दो-तीन बार बैठक स्थगित भी हो चुकी थी।

फाँसी की उलटबाँसी (दो)

मुकेश कुमार निश्चित तिथि को भव्य समारोह में साधु-संतों की उपस्थिति में बाबा पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं। औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री का पद सँभालते ही वे भ्रष्टाचार हटाओ मुहिम में जुट जाते हैं। दरअसल, अनशन के मामले में विफल रहने के बाद से वे थोड़ी शर्मिंदगी महसूस करने लगे थे। एक तो रामलीला मैदान से सलवार कुर्ता पहनकर भागने की वजह से उनकी इमेज डरपोक की बन गई थी और फिर छह दिन के अनशन में ही अस्पताल पहुँचने की वजह से उनकी योग साधना भी सवालों की घेरे में आ गई थी।

फाँसी की उलटबाँसी (एक)

[caption id="attachment_20634" align="alignleft" width="94"]मुकेश कुमार मुकेश कुमार [/caption]अस्पताल से लौटने के बाद बाबा अपनी कुटिया में बैठे जड़ी-बूटियाँ छान रहे थे। उनके चेले महीने भर तक हिमालय की पहाड़ियों पर भटकने के बाद ये जड़ी-बूटियाँ इकट्टी करके लाए थे। बाबा उनको पारखी नज़रों से गौर से देखते और छाँट-छाँटकर अलग रखते जा रहे थे। दरअसल, पिछले कई सालों से वे यही कर रहे थे। उन्हें खोज थी एक ऐसी बूटी की, जिसे खाने से मनुष्य भविष्य में प्रवेश कर सकता है भविष्य का दर्शन कर सकता है।

दिल दा मामला है…

[caption id="attachment_20521" align="alignleft" width="94"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]सबने राहत की साँस ली। हृदय प्रत्यारोपण के बाद प्रधानमंत्री काम पर लौट आए हैं। बहुत सारे काम रुके पड़े थे। ढेर सारी फाइलें इकट्ठी हो गई थीं। बहुत सारे उद्योगपतियों-व्यापारियों-दलालों की साँस अटकी हुई थी। उन्हें लग रहा था कि अगर हृदय प्रत्यारोपण में कुछ गड़बड़ हो गई तो काम तो अटकेगा ही वो पैसा भी डूब जाएगा तो उन्होंने ऊपर से नीचे तक बाँटा है।

राहुल का गाँधीजी से साक्षात्कार

मुकेश कुमारघटना कुछ दिन पहले की है। पंद्रह घंटों तक भट्टा-पारसौल गाँव में धरने पर बैठने और फिर हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गाँधी उत्साह और उत्तेजना से भरे हुए थे। मोटर सायकिल पर सवारी से लेकर अब तक के घटनाक्रम और उसे मीडिया में मिले कवरेज के बाद उन्हें ऐसा लग रहा था कि मानो उन्होंने इतिहास बदल डाला हो और अब पूरा हिंदुस्तान उन्हें महापुरूष मान लेगा।

लेट्स फाइंड आउट ए न्यू एनेमी फॉर एमेरिका…!

मुकेश कुमारराष्ट्रपति बराक ओबामा इस उम्मीद से खुश थे कि ओसामा बिन लादेन  को निपटाने के बाद उनकी रेटिंग में सुधार होगा और अगले चुनाव में वे पूरे हौसले के साथ उतर सकेंगे।  खुशी में वे बल्लियों उछल रहे थे और तमाम अफसरों को बुला-बुलाकर बातें कर रहे थे। मगर कुछ अफसरों से मिलने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे बहुत खुश नहीं हैं, जितना होना चाहिए बल्कि तनाव में दिख रहे हैं।

अमरीकियों के नाम लादेन का आख़िरी पैग़ाम

[caption id="attachment_20328" align="alignleft" width="94"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]आधी रात के वक्त जब अमरीकी फौजों ने ओसामा बिन लादेन के सिर पर बंदूकें तान दी थीं, तो लादेन वीडियो रिकार्डिंग ख़त्म करके सोने की तैयारी कर रहा था। आईएसआई ने उसे पहले ही बता दिया था कि उसका खेल ख़त्म हो चुका है, क्योंकि सीआईए के दबाव में आख़िरकार उसे बताना पड़ गया है कि उसने लादेन को कहाँ छिपा रखा है। आईएसआई से ख़बर मिलने के बाद ओसामा ने फौरन अपने वीडियोग्राफर को बुलाया और अपनी आख़िरी रिकार्डिंग करवाई।

जीवन और समाज की कहानी सुनातीं कुछ तस्वीरें

तस्वीरें सीधे दिल और दिमाग पर असर करती हैं. और कई कई बार देखने के बाद तस्वीरों से कई कई नए अर्थ निकलते हैं. फेसबुक पर कुछ ऐसी तस्वीरें मिलीं, जो ठिठक कर सोचने को मजबूर करती हैं. जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अपने एक युवा दिनों की तस्वीर डाली है, यह लिखकर- ”पुत्र डॉ मिहिर ने कहीं घर के कबाड़ से मेरा यह फ़ोटो ढूंढ़ निकाला है! पता नहीं कब किसने कहाँ खींचा था. फिर भी, सुकूते-आरज़ी … “फूल खिले शाखों पे नए और रंग पुराने याद आए!”…”

इस जश्न की स्याही से मैं ख़ौफ़ज़दा हूँ यारों…

मुकेश कुमारअंदेशा तो था कि तीस मार्च की रात जब भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वकप के क्वार्टर फायनल का नतीजा आएगा तो पूरा मुल्क किस तरह से प्रतिक्रिया करेगा। एक ऐसा देश जिसकी बहुसंख्यक आबादी पिछले छह दशकों से बदले की आग में तप रही हो और अपनी नफ़रत का इज़हार करने के लिए बहाने खोजती रहती हो, वह मानेगी नहीं। हार हो या जीत, हर सूरत में उसकी प्रतिक्रिया उन्माद भरी होगी।

‘न्यूज एक्सप्रेस’ में लांचिंग से पहले ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू

पोलिटिकल चैनल के रूप में ‘न्यूज एक्सप्रेस’ की लांचिंग कराने की तैयारियों में लगे चैनल के हेड मुकेश कुमार ने स्टाफ को वैचारिक रूप से ट्रेंड करने के मकसद से प्रशिक्षण का कार्यक्रम शुरू कराया है. इसे ‘मंथन’ का नाम दिया गया है. मंथन में सबसे पहले जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट अरविंद केजरीवाल को बुलाया गया. उन्होंने मीडिया, समाज और राजनीति को लेकर काफी कुछ बातें कहीं. वे इस बात से खफा थे कि अन्ना का अनशन खबर क्यों नहीं बनी.

‘न्यूज़ एक्सप्रेस’ राजनीतिक चैनल होगा

: चैनल हेड मुकेश कुमार बोले- राजनीति को ढंग से पेश किया जाए तो दर्शक उसे देखने के लिए वापस लौट सकते हैं : साई प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज़ का न्यूज़ चैनल ”न्यूज़ एक्सप्रेस” एक राजनीतिक चैनल होगा. ये चैनल राजनीतिक के तमाम रंगों को समेटेगा और आम लोगों में राजनीति के प्रति रुचि पैदा करने और उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय बनाने के उद्देश्य से कंटेंट को गढ़ेगा.

न्यूज़ एक्सप्रेस की तैयारियां जोरों पर, भर्तियां शुरू

: बायोडाटा भेजें : वीकली अखबार भी लांच होगा : श्याम साल्वी चैनल के टेक्निकल कंसल्टेंट : नवीन जैन ने एचआर हेड का काम संभाला : आगामी अप्रैल में राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल न्यूज़ एक्सप्रेस को लाँच करने की तैयारियाँ ज़ोर शोर से चल रही हैं। सेक्टर 63 में चैनल के दफ्तर का निर्माण तेज़ी पर है। तकनीकी तैयारियाँ भी तेज़ हो रही हैं। न्यूज़ एक्सप्रेस देश का पहला कंपलीट हाई डेफनीशन राष्ट्रीय हिंदी न्यूज़ चैनल होगा। न्यूज़ चैनल सेट अप करने के मामले में बेहद अनुभवी श्याम साल्वी चैनल के टेक्निकल कंसल्टेंट हैं। जहाँ तक स्टाफ की भर्ती का सवाल है तो ये काम भी इस महीने के अंत तक शुरू होने की संभावना है।

बजने लगा मौर्य टीवी का बैंड, गिरा ग्राफ

बिहार के मौर्या टीवी के बारे में खबर है कि यह चैनल टीआरपी की दौड़ में तेजी से पिछड़ता जा रहा है. कभी नंबर वन पायदान पर पहुंच चुके इस चैनल की वर्तमान स्थिति बेहद खराब है. बताया जा रहा है कि मौर्य टीवी का ग्राफ पिछले चार हफ्तों से लगातार नीचे गिरता जा रहा है. इस हफ्ते तो वह 11वें नंबर पर पहुंच गया है. टैम के ताजातरीन आंकड़े ने मौर्य टीवी के प्रबंधन और पत्रकारों की नींद हराम कर दी है.

क्या पेड न्यूज़ के खिलाफ मुहिम बेकार गई (अंतिम)

मुकेश कुमारअब सवाल ये उठता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज़ का कारोबार जमकर हुआ है तो क्या ये मान लिया जाए कि पेड न्यूज़ का विरोध करना बेकार है? एक बार फिर ये साबित हो गया है कि चौतरफा विरोध का मीडिया संस्थानों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वे पहले की तरह ही अपनी टारगेट तय कर रहे हैं और उसे पूरा भी। इसके लिए बेशक उन्हें नए रास्ते खोजने पड़ रहे हैं मगर वे अपना रास्ता बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें मुनाफ़ा चाहिए और किसी भी कीमत पर चाहिए, इसके लिए पत्रकारिता की ऐसी-तैसी होती हो तो हो। यानी वे बदलने वाले नहीं हैं चाहे लोग उन्हें कोसते रहें और हाहाकार मचाते रहें।

बाजार के बीच जनसरोकार की जगह बनानी होगी : मुकेश

अगर आपके अंदर पत्रकारिता करने का जुनून नहीं है तो बतौर पत्रकार आप सफल नहीं हो पाएंगे. ये जरूरी है कि पत्रकारिता के पूरे अंदाज को समझें. इसके लिए दृष्टि यानी विजन जरूरी है. उक्‍त विचार वरिष्‍ठ पत्रकार मौर्या टीवी के पूर्व चैनल हेड मुकेश कुमार ने स्‍वामी विवेकानंद सुभारती विश्‍वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार कॉलेज में ‘पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्‍य एवं चुनौतियां तथा सरोकार’ विषय पर विशेष व्‍याख्‍यान में व्‍यक्‍त किए.

पेड न्यूज़ कारोबार में चैनलों ने भी दिखाया दम (2)

ंमुकेश कुमारहालाँकि बिहार में चुनाव के पहले से ही पेड न्यूज़ का कारोबार जमकर चल रहा था। इसमें दल या संभावित प्रत्याशी शामिल नहीं थे। ये मुख्य रूप से सरकार कर रही थी। नीतीश कुमार की विभिन्न नामों से की गई चुनाव यात्राओं के एवज में चैनलों को मोटी राशि बाँटी गई। यानी पहले से ही मीडिया को दाना डालकर पटा लिया गया था। लेकिन आचार संहिता लागू होने के बाद और पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग और पत्रकारों की मुहिम की वजह से ऐसा लगता था कि शायद इस बार उनके लिए मुश्किल होगी। फरवरी में लाँच हुए मौर्य टीवी ने तो पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ बाकायदा मुहिम ही छेड़ दी थी, इसलिए भी ये उम्मीद की जा रही थी कि न्यूज़ चैनल ऐसा नहीं करेंगे।

नंगई कम दिखी पर पेड न्यूज़ चालू आहे (1)

मुकेश कुमारबिहार चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन की ऐतिहासिक विजय ने पेड न्यूज़ के कारोबार और चुनाव पर उसके प्रभाव से लोगों का ध्यान  हटा दिया है। लगता है कि सब कुछ ठीक-ठाक संपन्न हो गया है और अब इस बात की ज़रूरत नहीं है कि पेड न्यूज़ और मीडिया की भूमिका की पड़ताल की जाए। मगर इसकी ज़रूरत है, क्योंकि तभी पता चलेगा कि बिहार के चुनाव कितने निष्पक्ष हुए और धन के बल पर मीडिया का किसने कैसा इस्तेमाल किया गया।

मुकेश कुमार लाएंगे राष्ट्रीय चैनल ‘न्यूज़ एक्सप्रेस’

मौर्य टीवी को बुलंदियों पर पहुँचाने वाले और पहले कई क्षेत्रीय चैनल लाँच कर चुके वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार राष्ट्रीय चैनल लाने की तैयारियों में जुट गए हैं। इस चैनल का नाम न्यूज़ एक्सप्रेस होगा और ये अगले साल की शुरूआत में लाँच किया जाएगा। मुकेश कुमार इस चैनल के प्रमुख होंगे और इसका संपूर्ण दायित्व वही सँभालेंगे। फोन पर हुई बातचीत में मुकेश कुमार ने बताया कि मौर्य टीवी छोड़ने के बाद उन्हें और भी कई प्रस्ताव मिले थे। इनमें से ज़्यादातर क्षेत्रीय चैनलों से संबंधित थे और वे अब राष्ट्रीय स्तर पर कुछ करने की इच्छा रखते थे इसलिए उन्होंने न्यूज़ एक्सप्रेस का कार्यभार सँभालने का निर्णय लिया। मुकेश कुमारउन्होंने बताया कि ये चैनल नोएडा से ही संचालित होगा और इसके लिए तैयारियां शुरू भी कर दी गई हैं। टीम के गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी, जबकि सेक्टर-63 में कार्यालय का निर्माण कार्य तेज़ी के साथ चल रहा है।

मुकेश, मौर्य और विदाई का मर्म

[caption id="attachment_18487" align="alignleft" width="85"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]: बिहार जाकर इमोशनिया गए मुकेशजी : ये बिल्कुल  अप्रत्याशित था. इसकी कतई  उम्मीद नहीं थी कि पटना से इस तरह से विदाई मिलेगी. कई नौकरियाँ छोड़ीं और छोड़ते समय कई साथी भावुक भी दिखे. मगर  मौर्य टीवी से विदा लेते समय  इतने सारे लोग भावुक हो जाएंगे कि खुद को भी भावुक  होने से रोक नहीं पाऊँगा, ये मैंने सोचा भी नहीं था। शायद ये लगभग साल भर तक एकजुट होकर काम करने और एक बड़ी उपलब्धि तक पहुँचने की सफलता से बनी निकटता का नतीजा थी।

मौर्य टीवी से मुकेश कुमार का इस्तीफा

मुकेश कुमारपटना से खबर है कि मौर्य टीवी के निदेशक और एडिटर इन चीफ मुकेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है. वे करीब साल भर से मौर्य टीवी में थे. मुकेश कुमार के नेतृत्व में ही मौर्य टीवी की लांचिंग हुई और देखते ही देखते यह चैनल बिहार में नंबर वन बन गया. बताया जा रहा है कि मनीष झा अब मौर्य टीवी के कामधाम को देखेंगे. मनीष झा के बारे में पता चला है कि वे मौर्य टीवी में निदेशक पद पर हैं और वे प्रकाश झा के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. मनीष सीएनएन-आईबीएन में डिस्ट्रीब्यूशन का काम देखते थे.

अभी तक तो मौर्य टीवी में बना हुआ हूं : मुकेश कुमार

मौर्य टीवी के डायरेक्टर मुकेश कुमार के चैनल से हटने को लेकर कई तरह की चर्चाएं महीने भर से फैली हुई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि नवेंदु को चैनल का कार्यभार सौंप दिया गया है. जबकि कुछ का कहना है कि मौर्य टीवी प्रबंधन की कुछ नीतियों से खफा मुकेश खुद इस्तीफा भेज चुके हैं. इस पूरे मामले पर जब भड़ास4मीडिया ने मुकेश कुमार से संपर्क किया तो उनका कहना था कि वे अब भी मौर्य के साथ हैं और आफिस में बैठकर काम कर रहे हैं. रही अनबन की बात तो हर किसी परिवार से बर्तन खड़खड़ाने की आवाज आती है लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि परिवार में अलगाव हो गया.

बिहार की छवि से जुड़े कुछ सवाल

अगर आप बिहार के लोगों से बात करें तो कुछ ही मिनटों में ये तो साफ हो जाता है कि बिहार की जो छवि मीडिया प्रस्तुत कर रहा है उससे ज़्यादातर लोग असंतुष्ट हैं, उसे सही नहीं मानते..। लेकिन बिहार ही क्यों क्या किसी भी प्रदेश के लोग अपने राज्य की छवि को सही मानते हैं? और तो और भारत की ही जो छवि मीडिया से निकलती है उसे कोई सही और मुकम्मल मानता है…..? इसका भी जवाब नहीं में ही होगा।

लंबी छलांग : मुकेश कुमार ‘मौर्य टीवी’ के डायरेक्टर

मुकेश कुमारगुंजन सिन्हा प्रोग्रामिंग और न्यूज के डायरेक्टर बने : राजीव मिश्रा के भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं : वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने कई महीनों के आराम के बाद लंबी छलांग लगाई है। वे ‘मौर्य टीवी’ के डायरेक्टर बन गए हैं। सूत्रों के मुताबिक मुकेश को चैनल लांचिंग कराने से लेकर इसके न्यूज, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन समेत सभी विभागों का जिम्मा दिया गया है। मुकेश ने कई महीनों पूर्व वीओआई से इस्तीफा दिया था। उसके बाद से वे देशकाल नामक एक साहित्यिक वेबसाइट का संचालन कर रहे थे।

अंबिका के दांत दिखाने के हैं, काटने के नहीं

[caption id="attachment_15958" align="alignleft"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कह तो दिया है मगर उनकी इस घोषणा पर कोई भरोसा करने को तैयार नहीं है कि वह टीवी चैनलों के लायसेंस देने के मामले में सख्त रवैया अपनाएंगी। टीवी इंडस्ट्री के लिए इसका यही मतलब है कि अब लायसेंस महँगे हो जाएंगे क्योंकि इसके लिए रिश्वतखोरी बढ़ जाएगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बाबू, अफसर और मंत्री सब लायसेंस देने के एवज़ में ज़्यादा रकम चाहते हैं इसलिए ऐसा कड़क माहौल बनाया जा रहा है कि अब आसानी से लायसेंस नहीं मिलेंगे, ख़ास तौर पर उन्हें जिनका मीडिया से कोई पुराना रिश्ता नहीं है। दबाव इन्हीं नवागतों पर डाला जा सकता है क्योंकि पहले से मीडिया कारोबार में लगे लोग सरकारी दबाव का जवाब मीडिया के ज़रिए दे सकते हैं। काफी समय से इस पर आपत्तियाँ उठाई जाती रही हैं कि ऐसे लोगों को चैनलों के लायसेंस दिए जा रहे हैं, जो मीडिया की गंभीरता को नहीं समझते और उनका मक़सद ऐन केन प्रकारेण धन कमाना है।