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पत्रकार रामशरण जोशी हिंदी विवि में प्रोफेसर के रूप में नियुक्‍त

[caption id="attachment_20741" align="alignleft" width="122"]रामशरण जोशीरामशरण जोशी[/caption]वर्धा : हिंदी पत्रकारिता जगत के ख्‍यातिलब्‍ध पत्रकार व समाजविज्ञानी प्रो.रामशरण जोशी महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी वि‍श्‍वविद्यालय, वर्धा में प्रोफेसर के पद पर हाल ही में नियुक्‍त हुए हैं। करीब साढे चार दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्‍न ओहदों पर काम करने वाले जोशी ने समाज के झंझावातों से जूझने के लिए कलम को हथियार बनाया।

रामशरण जोशी

रामशरण जोशी

वर्धा : हिंदी पत्रकारिता जगत के ख्‍यातिलब्‍ध पत्रकार व समाजविज्ञानी प्रो.रामशरण जोशी महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी वि‍श्‍वविद्यालय, वर्धा में प्रोफेसर के पद पर हाल ही में नियुक्‍त हुए हैं। करीब साढे चार दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्‍न ओहदों पर काम करने वाले जोशी ने समाज के झंझावातों से जूझने के लिए कलम को हथियार बनाया।

उन्‍होंने सन् 1967 में समाचार एजेंसी ‘हिन्‍दुस्‍तान समाचार’, भोपाल में सिटी रिपोर्टर के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत की। नवभारत टाइम्‍स, दैनिक हिन्‍दुस्‍तान, जनसत्‍ता, द हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स, राजस्‍थान पत्रिका, नई दुनिया, राष्‍ट्रीय सहारा, अमर उजाला, नवज्‍योति, नवभारत, द एमपी क्रोनिकल जैसे प्रति‍ष्ठित समाचार पत्रों में लेखन करने वाले जोशी ने जहां भारत-पाक युद्ध के दौरान विशेष रिपोर्टिंग की तो वहीं खालिस्‍तान मूवमेंट, कश्‍मीर की घाटी में हुए आतंकवादी घुसपैठ, मुरादाबाद व मेरठ के दंगे में साहसपूर्ण रिपोर्टिंग भी की।

06 मार्च, 1944 को राजस्‍थान के अलवर जिले में जन्‍मे रामशरण जोशी पत्रकार, संपादक व लेखक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्‍होंने प्रतिबिंबन, प्रतिरोध की विरासत, अर्जुन सिंह:एक सहयात्री इतिहास (ए पाली‍टिकल वायोग्राफी), दावानल, मीडिया:मिशन से व्‍यापारीकरण तक, मीडिया:मिथ और समाज, विदेश रिपोर्टिंग, इक्‍कीसवीं सदी के संकट, मीडिया और बाजारवाद, मीडिया विमर्श, साक्षात्‍कार: सिद्धांत और व्‍यवहार, आदिवासी समाज और शिक्षा, हस्‍तक्षेप, चुनौतियों का चक्रव्‍यूह, अगला प्रधानमंत्री कौन जैसी कई महत्‍वपूर्ण रचनाएं हिंदी पाठकों को दी हैं। वे राजेन्‍द्र माथुर राष्‍ट्रीय पत्रकारिता पुरस्‍कार, शरद जोशी राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, दिल्‍ली हिंदी अकादेमी पत्रकारिता सम्‍मान, गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता पुरस्‍कार, डॉ.आंबेडकर सम्‍मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्‍कारों से सम्‍मानित हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री राजीव गांधी, वीपी सिंह, नरसिंहा राव, इन्‍द्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी व राष्‍ट्रपति डॉ.शंकर दयाल शर्मा के साथ स्‍टेट विजिट के रूप में कवरेज कर चुके रामशरण जोशी हाल ही से विश्‍वविद्यालय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को अध्‍यापन करा रहे हैं। मीडिया के क्षेत्र से अध्‍यापन में रूचि के प्रति वे बताते हैं कि प्रोफेसर का पदभार संभालने के पीछे मूलरूप से मेरी एक ही भावना व विचार है कि जनसंचार के क्षेत्र में मौलिक शोध कार्य कराया जाय। कुलपति विभूति नारायण राय जी जिस कार्य हेतु मुझे यहां लाएं हैं, वह यह है कि पत्रकारिता, समाज विज्ञान आदि के क्षेत्र में मौलिक चिंतन को बढावा दे सकूं। चूंकि आजकल मीडिया, ज्ञान और सूचना दोनों का एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम बन चुका है। आज इस बहुआयामी मीडिया का प्रभाव समाज के विभिन्‍न क्षेत्रों पर क्‍या पड़ रहा है और भविष्‍य में क्‍या संभावित तस्‍वीर उभरेगी, इस संबंध में सघन व गहन अनुसंधान की आवश्‍यकता है तो एक प्रकार से कह सकता हूं कि जबतक मैं इस वि‍श्‍वविद्यालय में रहूंगा मेरा मूलरूप से कार्यक्षेत्र शोध ही रहेगा। मेरी कोशिश रहेगी कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक इस त्रिआयामी संबंधों के परिप्रेक्ष्‍य में मीडिया की क्‍या भूमिका है, इसमें अनुसंधानात्‍मक मौलिक चिंतन को बढावा दे सकूं।

उन्‍होंने कहा कि यहां के शोधार्थी केवल पीएचडी की डिग्री प्राप्‍त करने वाले नहीं हों अपितु वैज्ञानिक सोच से समाज को कुछ दे सकें। मेरी विद्यार्थियों से अपेक्षा रहेगी कि जहां वे मीडिया को अपनी आजीविका व कैरियर का आधार बनाना चाहते हैं वहीं वे इसे समाज में परिवर्तन का माध्‍यम भी बनाएं। वे अपने अनुसंधान के माध्‍यम से इस बात का पता लगाएं कि मीडिया का प्रयोग समाज और देश की बेहतरी के लिए किस प्रकार किया जा सकता है। आप जानते ही हैं कि हम वैश्‍वीकरण के काल में जी रहे हैं। इस वैश्‍वीकरण की बहुआयामी प्रक्रियाएं हमारी जीवन को विभिन्‍न स्‍तरों पर प्रभावित कर रही हैं। अत: मीडिया का यह उत्‍तरदायित्‍व हो जाता है कि वे इन प्रवृतियों के चरित्र को समझें, इन प्रवृतियों के प्रभाव कितना सकारात्‍मक व नकारात्‍मक हैं, इसका अपने अनुसंधान के माध्‍यम से पता लगाएं तो मैं समझता हूं कि हमारी शोध केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि यह हस्‍तक्षेपवादी होनी चाहिए। यही मेरा लक्ष्‍य व उद्देश्‍य है। प्रोफेसर के रूप में नियुक्‍त होने पर प्रो. जोशी को विश्‍वविद्यालय के अधिकारियों, शैक्षणिक, गैर-शैक्षणिक कर्मियों व विद्यार्थियों ने बधाई दी है।

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0 Comments

  1. Girish Mishra

    July 6, 2011 at 1:14 pm

    Congratulations, Joshiji.

  2. Mayank raj

    July 6, 2011 at 4:39 pm

    Sir, badhayee ho. Anurodh hai ki ek baar fir gaya aayeeye na. Aapko ek baar suna tha, fir sunne ki chahat hai. Mayank raj.

  3. pradeep kapoor

    July 7, 2011 at 10:59 am

    Having known joshiji for more then three decades now i am confident that the quality of education in department of mass communication would improve in Vardha university . My best wishesa are with joshiji

  4. yagyawalkya

    July 9, 2011 at 4:25 am

    उम्मीद है, जोशी जी पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नई सोच देने में कामयाब होंगे.

  5. sudama roy

    July 15, 2011 at 6:07 pm

    sir pranam. apko dhersari badhaiyan.main aapka student rah chuka hun.aapne hume bhopal mein makhanlal national university of journalism mein padhaya hai. aapke diye gyan aaj bahut kaam aa rahe hain aur main bhi patrkarita mein satat apni sewa de raha hun. vardha ke students ko nischit taur per joshi sir patrakarita aur samaaj ko janne ka bahut he behtar awsar milega. bahut-bahut badhai chhatron ko bhi aur mere guruwar joshi sir ko bhi……sudama roy, senior anchor(producer), maurya tv, patna.

  6. Ganesh Joshi

    July 26, 2011 at 4:48 am

    congratulation…sir…

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