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हिंदी समाज के लेखक-पत्रकार कितने पदलोलुप और बिकाऊ हैं, यह विभूति नारायण राय ने हमें बता दिया

: विभूति नारायण राय और राजकिशोर कथा : आओ पद-पद खेलें : कल जीटी एक्सप्रेस से राजकिशोर जी वर्धा से दिल्ली की ओर पदमुक्त होकर जाने वाले थे. उनसे खार खाए मेरे जैसे कुछ लोग इस जानकारी के बाद से खुश थे. मुझे लगा कि वर्धा आते ही एक अच्छी खबर सुनने को मिल गई, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

: विभूति नारायण राय और राजकिशोर कथा : आओ पद-पद खेलें : कल जीटी एक्सप्रेस से राजकिशोर जी वर्धा से दिल्ली की ओर पदमुक्त होकर जाने वाले थे. उनसे खार खाए मेरे जैसे कुछ लोग इस जानकारी के बाद से खुश थे. मुझे लगा कि वर्धा आते ही एक अच्छी खबर सुनने को मिल गई, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

राजकिशोर को वर्धा में ही एक नया पद दे दिया गया. इन नए पद के काम के मुताबिक अब वह ”हिंदी समय” वेबसाइट में डाले जाने वाली सामग्रियों के संपादन में मदद करेंगे. राइटर इन रेजीडेंस के तौर पर विभूति नारायण राय को राजकिशोर का जितना इस्तेमाल करना था, उसने किया.  राजकिशोर ने वर्धा को विभूति का हरम बताया था और खुद उसी में रहने आए. यहां रहते हुए उन्होंने ’वर्धा में बारिश’, ’वर्धा में सांप’ और इस चमत्कारिक विश्वविद्यालय पर कई सारे चमत्कारिक लेख लिखे. अब विभूति ने उन्हें जब यहां से खदेड़ने का फ़ैसला किया तो राजकिशोर के लिए मुश्किल स्थिति खड़ी हो गई. पिछले कुछ माह से विश्वविद्यालय और विभूति प्रचार अभियान में जुटे रहने के बाद अब वो विभूति के खिलाफ़ भी नहीं लिख सकते.

सो पूरी तन्मयता से लग गए राय जी को मनाने. सूत्रों का कहना है कि राय साहब नहीं माने. उन्होंने राजकिशोर को जीटी की सवारी करने की समझाइश दी. फ़िर भी राजकिशोर हताश नहीं हुए. लगे रहे. विभूति के बेहद खास से.रा. यात्री के साथ विभूति के पास गए और गुहार लगाए कि उन्हें यहां रहने दिया जाए. तब जाकर राजा जी खुश हुए और राजकिशोर को यह नया पद बख्शीश में दिया. वर्धा की कहानी अभी भी उतनी ही दिलचस्प है जितनी साल भर पहले थी. फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि बातें अब कैंपस के भीतर ही दफ़्न हो जाती है. एक अकेले विभूति ने हिंदी के तकरीबन सौ लेखकों की पोल खोल दी.

हिंदी समाज के लेखक-पत्रकार कितने पदलोलुप और बिकाऊ है यह विभूति ने हमें बता दिया. रामशरण जोशी नाम का नया प्रचारक नियुक्त करने के बाद राजकिशोर पर खर्चा करना अब विभूति के लिए नागवार था. सो उन्होंने राजकिशोर का पत्ता काटना चाहा, लेकिन राजकिशोर फ़ेवीकॉल के बने हुए हैं. चिपके रहे. नए पद के लिए राजकिशोर को मेरी तरफ़ से ढेर सारी शुभकामना.

फेसबुक पर दिलीप खान की तरफ से लिखा गया नोट. आप इस नोट पर आए कमेंट्स को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं- वीएन राजकिशोर नोट

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