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ईटीवी के मैनेजर ने रिपोर्टरों से कहा- तेल लाओ!

हद है। ये तो एक्स्ट्रीम है। ईटीवी, बिहार-झारखंड के असिस्टेंट मैनेजर (आपरेशन) प्रणब लाल की चिट्ठी पढ़िए। उन्होंने अपने जिला रिपोर्टरों से कहा है कि वे जिला सप्लाई अधिकारी से हर महीने कंट्रोल रेट पर 50 लीटर केरोसिन आयल आफिस यूज के लिए लें। ध्यान दीजिए, कंट्रोल रेट पर दिया जाने वाला यह केरोसिन आयल गरीबी रेखा से नीचे जीवन-बसर करने वाले परिवारों के लिए होता है। ईटीवी के रिपोर्टर आमतौर पर ईमानदार माने जाते हैं। वे अगर इस आदेश का पालन न करते हैं तो मुश्किल, पालन करते हैं तो उन्हें भ्रष्ट जिला सप्लाई अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाना होगा, जी-हुजूरी करनी होगी। जब वे जिला सप्लाई अधिकारी से खुद जनता के हिस्से का केरोसिन जुगाड़ से ले लेंगे तो जिला सप्लाई अधिकारी समेत किसी अन्य अधिकारी के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज कैसे उठाएंगे?

हद है। ये तो एक्स्ट्रीम है। ईटीवी, बिहार-झारखंड के असिस्टेंट मैनेजर (आपरेशन) प्रणब लाल की चिट्ठी पढ़िए। उन्होंने अपने जिला रिपोर्टरों से कहा है कि वे जिला सप्लाई अधिकारी से हर महीने कंट्रोल रेट पर 50 लीटर केरोसिन आयल आफिस यूज के लिए लें। ध्यान दीजिए, कंट्रोल रेट पर दिया जाने वाला यह केरोसिन आयल गरीबी रेखा से नीचे जीवन-बसर करने वाले परिवारों के लिए होता है। ईटीवी के रिपोर्टर आमतौर पर ईमानदार माने जाते हैं। वे अगर इस आदेश का पालन न करते हैं तो मुश्किल, पालन करते हैं तो उन्हें भ्रष्ट जिला सप्लाई अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाना होगा, जी-हुजूरी करनी होगी। जब वे जिला सप्लाई अधिकारी से खुद जनता के हिस्से का केरोसिन जुगाड़ से ले लेंगे तो जिला सप्लाई अधिकारी समेत किसी अन्य अधिकारी के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज कैसे उठाएंगे?

सूत्र बताते हैं कि ईटीवी बिहार-झारखंड के असिस्टेंट मैनेजर (आपरेशन) प्रणब लाल ने इस आदेश को जारी करने के पहले प्रबंधन के वरिष्ठ लोगों से विचार-विमर्श नहीं किया है और अपने स्तर पर ही ये फैसला लिया है। बताया जाता है कि प्रणब लाल ने उनके आदेश का पालन न करने वाले रिपोर्टरों का तबादला हैदराबाद करने की धमकी दी है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि प्रणब लाल दरअसल इस आदेश के जरिए कमीशनखोरी को बढ़ावा दे रहे है। संभव है कि उनकी मंशा सरकारी तेल के निजी प्रयोग की हो और प्रबंधन से वे मार्केट रेट से पैसे ले लें।

प्रणब लाल के हस्ताक्षर से जारी लेटर.

हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि प्रणब लाल की मंशा पर संदेह करना ठीक नहीं है क्योंकि उनकी नीयत अगर खराब होती तो वे आदेश लिखित में जारी नहीं करते। वे तो कंपनी का पैसा बचाना चाहते हैं और सरकारी माल जिसे बोलचाल में मुफ्त का माल कहा जाता है, का इस्तेमाल कंपनी के हित में करना चाहते हैं। आखिर कंपनियां इसी तरह तो पाई-पाई जोड़कर करोड़ों-अरबों का टर्नओवर हर साल दिखाती हैं। जो भी हो, लेकिन प्रणब लाल के इस आदेश से बिहार में ईटीवी के रिपोर्टर परेशान हैं।

भड़ास4मीडिया ने प्रणब लाल से जब संपर्क किया और उनसे उनके आदेश के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले तो ऐसा कोई आदेश होने से इनकार किया। उन्हें जब बताया गया कि भड़ास4मीडिया के पास उनके हस्ताक्षर युक्त लेटर हैं जो उन्होंने रिपोर्टरों को जारी किया है तो इस पर प्रणब लाल बोले- ‘इस बारे में मुझे बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कुछ है तो विथ ड्रा कर लेंगे।  इस पर अभी मैं बहुत ज्यादा बोल नहीं पाऊंगा। एक दो जगह से पता चला था कि इस तरह तेल मिल सकता है, अगर नहीं मिल सकता है और ऐसा करना गलत है तो हम इस आदेश को वापस ले लेंगे। हम लोग कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहेंगे जिससे गलत काम को बढ़ावा मिलता हो। फिलहाल इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। मैं इस मामले को दिखवाता हूं।’

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0 Comments

  1. Shekhar

    February 1, 2010 at 11:29 am

    ganimat hai ki bhai sahab ne control rate per genhu-chawal-chini uthane ko nahi kaha…..

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