आदरणीय यशवंत जी, सादर नमस्कार, आपकी चर्चित वेबसाइट भड़ास4मीडिया में मंगलवार 21 सितंबर 2010, 11 बजकर 03 मिनट पर प्रकाशित लेख ”पत्रकार के पीछे पड़ा पत्रकार मुख्यमंत्री” पढ़ा। मन को बड़ी ठेस पहुंची, वो इसलिए कि मेरे मन में आपके प्रति जो सोच बनी थी, वह इस लेख को पढ़कर धूमिल हो उठी। यशवंत जी, आपकी वेबसाइट में प्रकाशित यह लेख उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमेष पोखरियाल निशंक को बदनाम करने की एक निंदनीय कोशिश है। मैं हैरत में हूं कि आप जैसे विद्वान और गंभीर पत्रकार ने कैसे यह लेख बिना किसी छानबीन के अपने वेब पेज पर प्रकाशित कर दिया।
एक ऐसे मुख्यमंत्री के खिलाफ, जिनके मुख्यमंत्री बनने पर पहली बार उत्तराखण्ड के पत्रकार बंधुओं को खुशी हुई, आज उत्तराखण्ड में पत्रकारों को खोया हुआ सम्मान वापिस मिला है, क्योंकि राज्य का मुखिया उनके ही बीच से निकल कर आया है। ऐसे में चंद कुंठित एवं तथाकथित पत्रकारों की झूठी शिकायतों को आपने जिस तरीके से उठाया है, वह निश्चय ही दुखी करने वाला है। मेरी आपसे गुजारिश है कि कृपया सच्चाई और ईमानदारी से राज्य को विकास पथ पर ले जाने वाले डॉ. निशंक को बदनाम करने की उक्त कोशिश के खिलाफ एक लेख आपको भेज रहा हूं, उसे प्रकाशित करें। वह इसलिए क्योंकि एक पत्रकार होने के नाते आप भी यह अच्छी तरह जानते हैं कि पत्रकारिता एक पक्ष को लेकर नहीं चलती, बल्कि दोनों पक्षों को सुना जाना आवश्यकक है।
प्रमोद कुमार
श्रमजीवी पत्रकार
देहरादून
डॉ. निशंक तो रुपहले पर्दे के नायक सरीखे हैं
: कुछ पत्रकार जानबूझ के कर रहे हैं दुष्प्रचार : सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से बौखला कर कुछ तथाकथित पत्रकारों ने दुष्प्रचार का जिम्मा ले रखा है। एक साजिश के तहत सरकार की छवि को धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ ताकतें डॉ. निशंक को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती हैं। यही लोग मिलकर सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
प्रदेश की सत्ता संभालते ही डॉ. निशंक ने प्रदेश में बिजली, पानी की मूलभूत समस्याओं को 24 घण्टे के अंदर हल कर लिया था। बिजली, पानी, चिकित्सा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से त्रस्त प्रदेशवासियों ने जब अपनी समस्याओं को हल होते देखा तो उन्हें डॉ. निशंक में रुपहले पर्दे के नायक की छवि नजर आने लगी। वित्तीय संकट से जूझ रहे प्रदेश को डॉ. निशंक जब पटरी पर लाए तो 13वें वित्त आयोग ने उन्हें कुशल वित्तीय नियोजन के लिए न केवल सम्मानित किया वरन एक हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त पुरस्कार स्वरूप धनराशि उपलब्ध कराई।
राजनीतिक विश्लेषक इस बात को देखकर हैरत में पड़ गए हैं कि विकास नगर विधानसभा की परम्परागत कांग्रेसी सीट भाजपा की झोली में कैसे आ गई। डॉ. निशंक के रणनीतिक कौशल व कूटनीतिक चातुर्य का ही परिणाम था कि विकासनगर में भाजपा ने अपना परचम लहराया था। विकास नगर की इस ऐतिहासिक जीत ने निशंक सरकार के भविष्य के लिए मील का पत्थर स्थापित कर लिया था।
इस सदी के सबसे विराट पर्व महाकुंभ 2010 की सफलता सरकार की सर्वाधिक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस मेले के कुशल प्रबंधन ने दुनिया भर के प्रबंधन गुरुओं को चौंका दिया। शिकागो यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट गुरु प्रो. एरामल्ली ने तो यहां तक कहा कि डॉ. निशंक के प्रबंधन कौशल के गुर हम अपने मैनेजमेंट कक्षाओं में पढ़ाएंगे। आखिर करोड़ों लोग बिना किसी नियंत्रण के आए और गंगा स्नान करके सकुशल अपने गन्तव्य तक पहुंच गए। अन्तिम शाही स्नान के दिन तो एक करोड़ चौसठ लाख लोगों ने एक साथ हरिद्वार में डुबकी लगाकर गंगास्नान का पुण्य अर्जित किया। दुनियाभर के 140 देशों के श्रद्धालुओं ने कुंभ में गंगास्नान किया जो कि एक अदभुत संयोग है। इतना विशाल जनसमुद्र हरिद्वार में उमड़ा लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, यह दुनिया के प्रबंधन गुरुओं के लिए शोध का विषय है।
नवोदित राज्य उत्तराखण्ड विकास दर में तीसरे पायदान पर रहा। जहां तक प्रदेश की विकास दर राज्य स्थापना के समय 2.9 थी वही वह अब बढ़कर 9.31 प्रतिशत हो गई है। प्रति व्यक्ति औसत आय जहां 14 हजार थी वहीं वह अब 42 हजार प्रति व्यक्ति आय हो गई है।
डॉ. निशंक की ऐतिहासिक उपलब्धियों से विपक्षी बौखलाहट में हैं। यही वजह है कि वह अब दुष्प्रचार करने में जुट गए हैं। सरकार के स्थायित्व को लेकर अफवाहें फैलाने व एसएमएस से दुष्प्रचार करने का काम किया जा रहा है। यह सब साजिशन किया जा रहा है।
प्रमोद कुमार
श्रमजीवी पत्रकार
देहरादून












manav
January 20, 2011 at 10:57 am
जनाब पूरी तरह से खार खाए हुए लगते हैं। लगता है कि ये पत्रकारिता नहीं चमचागिरी करने पर उतारु हैं। लगे रहिए चमचागिरी में …
क्या पता जूठन हीं मिल जाए आपको…
अरे शर्म किजिए खुद पर…
पत्रकार होकर चापलूसी क्यूं करते हैं…
yehi baat mujhe bhi kehni hai, Yashwant bhai aise chaaploosi ke maahir logon ki chaaploosi aarti aap bhadas me to mat do yaar, chi, thu thu thu thu thu
Rohit
September 27, 2010 at 2:07 pm
प्रमोद जी क्या खूब कहा आपने, मै आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं, वाकई मुख्यमंत्री निशंक के नित नए रंग-बिरंगे कुर्ते पायजामो को देखकर लगता है कि निशंक रूपहले पर्दे के ही एक किरदार हैं, राजनीति में गलती से आ गए हैं।
chandan
September 27, 2010 at 2:09 pm
pramod ji ,aapko bhadas me chapi khaber se jitna dukh hua utna to khud nishank ji ko bhi nahi hua hoga!…aapne to nishank ji ki taarifo ke itne pul baandh diye ki unke pax me aapki safai bhi kayi sawal khade kar rahi hai!
Atinder
September 27, 2010 at 2:23 pm
Satta Ka Galat istemaal Kaise Kiya Jata Hai Ye to koi mukhyamantri nishank se seekhe, Nishank Kehte Hai Ki Unhone Bijli, Pani Jaisi Moolbhut Suvidhaon Ki Kami Ko Uttarakhand Me Poora Kiya Hai, Aajtak Sirf Suna Tha Ki Safed Jhoot Hota Hai, Lekin Aaj Dekh Bhi Liya, Bijli Ki Kami Aap Kya Door Karenge Aapne To Hydro Projects Ke Naam Par 700 Crore Ka Ghotala Kiya Hai, Ye Baat Mai Nahi Keh Raha, Aapke Is Ghotale Ko AAJ TAK Jaise National Channel Par Pure Desh Ne Dekha Hai, Yahi Nahi Rishikesh (STURDIA) Ka 400 Crore Ka Ghotala Jise NDTV, IBN7, NEWS24 Jaise Channelo Par Pure Desh Ne Dekha, Apki Sachhai To Jagjahir Hai Nishank Ji, Ise Batane Ki Zaroorat Nahi Hai, Pramod Ji Agar Ise Hi Sachhai Aur Imandari Kehte Hai To Dr. NISHANK Desh Ke Sabse Imaandaar Aur Sachhe Insaan Hai Aur Pure Desh Ka Media Jhoota.
Indersen
September 27, 2010 at 2:25 pm
Pramod ji jis din se Nishank ne Uttarakhand ke CM ki shapath li hai ussi din se uttarakhand ke kaale din shuru ho gaye, Shapath wale din bus khai me giri 24 logo ki maut huyi tab se aaj tak saari aapda uttarakhand par hi aa rahi hai. Bageshwar me land sliding se 18 mausoom schooli bachcho ki maut huyi……….
oliver
September 27, 2010 at 2:32 pm
Uttrakhand Ke Chief Minister Apni Kartooto Ko Chhupane Ka Pura Prayas Kar Rahe Hai, CM Sahab Aapko To Kursi Ka Galat Istemaal Kaise Kiya Jata Hai Iski Ek Class Khol Deni Chahiye.
Rakhi Shukla
September 27, 2010 at 2:32 pm
निशंक की उत्तराखंड सरकार भरष्टाचार में कंठ तक डूबी है. कुछ दिन पहले में अपने परिवार को लेकर हरिद्वार गयी थी. पुरे हरिद्वार को देखने से नहीं लगा की कुम्भ के लिए आया ४७० करोड़ रूपया कहीं भी लगा हो. यशवंत जी खुद जाकर देखिये कितनी बुरी हालत है हरिद्वार की. इस बार गंगा में आये उफान ने निशंक की पोल खोल डाली, पूरा हरिद्वार जलमगन था. अगर ४७० करोड़ लगे थे तो कोई भी परमानेंट पुल, शोचालय, रोड या अथिति ग्रह क्यों नहीं बना. कुम्भ की वाहवाही लूट रही सरकार अपने गिरेबान में झांके. महा कुम्भ नहीं महा घोटाला था.आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले निशंक को भगवन भी नहीं बख्शेगा.
Aakash
September 27, 2010 at 2:35 pm
प्रमोद जी पहली बार तो किसी पत्रकार ने निशंक सरकार द्वारा किए जा रहे घोटालों की पोल खोली है, ऐसे-ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसे सुनकर और नेशनल न्यूज़ चैनलों पर देखकर उत्तराखंड सरकार तिलमिला गयी है, करे भी क्या खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे।
Srinarayan Singh
September 27, 2010 at 2:36 pm
Vikas nagar ki seat ko jitne ka dawa karne wale Nishank hi jaante hain ki kaise jitte hain seat Matra 500 Vote se, wo bhi satta me rahte huye……….puri sarkari machinery,dhan bal ka istemaal kar kaun sa teer maar diya 500 vote se jeet kar. 2007 me apni seat to ek Mumbai se Gaon vapas aaye ladke se Haar gaye the
Rudra Rawat
September 27, 2010 at 2:44 pm
May २०१० में आज तक चैनल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निशंक को लाइव पर लेकर जल विद्युत् परियोजनाओ में हुए भरी घोटाले को लेकर एक स्टोरी चलायी थे. निशंक लाइव पर ही फँस गए थे. स्टिंग्स में साफ़ दिखाया गया था के बीजेपी के ही एक बड़े नेता ने निशंक सरकार पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था……………..प्रमोद जी शायद वो झूठा था है न……….बाद में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका डाली और सरकार को साड़ी परियोजनाए निराक्स्त करनी पड़ी………आपको शर्म नहीं आती प्रमोद जी की आप खुद पत्रकार होकर पत्रकारों की खिलाफत कर रहे है…..एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री की तारीफों के पुल बाँध रहे हैं.
Abhishek
September 27, 2010 at 2:55 pm
प्रमोद जी झूठ बोलते शर्म कीजिये, कुम्भ में पुल टूटने १७ लोगो की मौत हुयी थी. एक आर टी आई के अनुसार कुम्भ के दौरान १०८ अज्ञात लाशो के पोस्ट मार्टम हुए. किन की लाशें थी वो. इसका जवाब आप नहीं दे पाएंगे. किस श्रमजीवी पत्रकार union के सदस्य हैं आप? क्योंकि देहरादून एक नहीं दस श्रमजीवी हैं. वैसे आपने जो आंकड़े बताये हैं वो लगता नहीं की किसी पत्रकार के हैं. लगता है की शायद सरकार के ही किसी पी आर ओ ने भेजे हैं……………हा हा हा हा
mridul negi
September 27, 2010 at 3:07 pm
यसवंत जी ये चिट्ठी बिलकुल फर्जी है. प्रमोद नाम का कोई भी पत्रकार देहरादून में नहीं है. मै पिछले १० वर्षो से देहरादून में कार्यरत हूँ. अगर है तो वो अपने संसथान का नाम बताये नाकि फर्जी चिट्ठी लिखकर पत्रकार कौम को बदनाम करे. यशवंत जी सरकार के किसी चापलूस सरकारी कर्मचारी की चिट्ठी है ये.
bhulla
September 27, 2010 at 3:31 pm
नाम निशंक रख कर सारे कलंकित काम करने वाले उत्तराखंड के मधु कोड़ा के बारे में कोई बुरी बात न करे क्योकि वह ड्रीम गर्ल के साथ मिल कर राम तेरी गंगा मैली का उद्दार करने में व्यस्थ हैं I कृपय इस पावन कार्य में उनकी मदद करें ताकि उन्हें नोबल पुरुष्कार मिल सके और देव भूमि का सम्मान बाद सके I 😉
vishal negi journalist
September 27, 2010 at 4:09 pm
अरे उमेश जे कुमार चोरी करने का इतना ही शोक है तो कम स कम मुख्यमंत्री से पंगा क्यो ले रहे हो, निशंक तुम से बड़ा पत्रकार है…..पंगा मत ले उमेश दीपक चौरसिया, सुमित अवस्थी बटा नही पायगे….तुम तो जेल जाऔगे इन दोनो बेचारो को क्यो जेल लेकर जा रहे है उमेश जाँच हुई तो ये दोनो भी फसेगे..
Rakesh Negi
September 27, 2010 at 8:20 pm
प्रमोद जी 30 सितम्बर डेट लगी हुयी है हाई कोर्ट में stardia जमीन के ४०० करोड़ के घोटाले में उसकी तैय्यारी करिए पता नहीं शायद किस किस को जेल जाना पड़े. भड़ास पर छपास के चक्कर मत पड़िए. ये पत्रकारों का मंच है उन्ही के लिए रहने दीजिये
premshankar pal
September 28, 2010 at 3:05 am
वाह.. महोदय, अब आपका नाम तो पता नहीं , पर परमोद के नाम से लिखा है तो परमोद ही कहूँगा — अपने साबित कर दिया की किस हद तक कोई पत्रकार भ्रष्ट सरकार और उसके मुखिया की चमचागिरी कर सकता है ! जब कोई किसी की अच्छी चमचागिरी करता है तो कहा जाता है की अमूल का मख्खन लगा रहा है लेकिन आपने तो अमूल को काफी पीछे छोड़ दिया– यह कोण से ब्रांड का मख्खन है…………
Praveen K Bhatt
September 28, 2010 at 11:10 am
aapko sarkar se pagaar milti hai kya PRAMOD G, JAL VIDYUT PARYOGANAO KA GHOTALA, JAMEEN GHOTALA, KUMBH ME GHOTALA aur AAPDA ME BHI KHEL chal raha hai aap kis media ke patrakaar ho.
Praveen K. Bhatt
Journalist Dehradun
Praveen K Bhatt
September 28, 2010 at 11:13 am
;):D;D>:(:(:o8):P:-*:'(
निरंजन
September 28, 2010 at 2:56 pm
जनाब पूरी तरह से खार खाए हुए लगते हैं। लगता है कि ये पत्रकारिता नहीं चमचागिरी करने पर उतारु हैं। लगे रहिए चमचागिरी में …
क्या पता जूठन हीं मिल जाए आपको…
अरे शर्म किजिए खुद पर…
पत्रकार होकर चापलूसी क्यूं करते हैं…
Mohit
October 7, 2010 at 7:15 pm
Rohitji, apne Mukhyamantri Nishank ke rang birange kurte paijame ki bat ki. Vaise maine unhe safed ke atirikta rang birange kurton me kam he dekha. ho sakta hai ye mera drishti dosh ho. Yadi dusre desh ka koi rajneta ” properly dress up” hota hai to hum uski tariph karte hain, use smart kah apne netaon se uski tulna karte hain, lekin apne desh me yadi koi rajneta ” presentable” aur suruchipurna vastra pahne to use rupahle parde ka Nayak kahne se baj nahi ate. Rohitji kya kisi rajneta ko “properly dress up ” hone ke adhikar nahi hai ?
Mohit
October 7, 2010 at 7:22 pm
Rohitji vaise to maine C M Nishank ko adhikanshtah Saphed kurte paijame me he dekha rangeen me nahi, lekin samajh me nahi ata ki C M ke “presentable” aur suruchipurna kapde pahnne se rajya ke vikas par kya phark padta hai? Kisi dusre desh ka Rajneta aisa kare to Smart ” aur “presentable” aur hamara kare to rupahle parde ka naik , ye dohre manak kyon ?
kuldeep rawat
November 1, 2010 at 10:22 pm
aane do 2012 nahi chalega koi charra
100 takee ki baat hi yarro
nahi aane sarkar DOBARA
VISHAL CHOUDHARY, HARIDWAR
November 10, 2010 at 1:20 pm
pura uttarakhand nishank ke kaale chehre se parichit hai lekin pramod kumar ji shayad aapko sahi dakshina mil rhi hai. to aap galat gungan karne me mashgul hai. shram karo………………………….
kumar kalpit
November 27, 2010 at 10:06 pm
pramod jee, afsosoh ki uttrakhand me vidhan prisad nahi hai nahee to nishank jee aapko vidhayak jaroor banwa dete.lage telahi me shayad rajaya shabha bhej de.han iske leye unhen khud haikaman ke telahee kanee padegee
Arun
February 14, 2011 at 12:03 pm
निशंक जी को बिना पूछे जांचे डाक्टर कहना मीडिया के लिये शर्म की बात है। वास्तव में निशंक जी की साहित्य साधना और डाक्टरेट की एक ही कहानी है। जिस तरह वह एक ही साल में कई साहित्यिक पुस्तकों को जादू की छड़ी घुमा कर लिख देते हैं या लिखवा देते हैं उसी प्रकार बिना शोध के ही उनकी डाक्टरेट की डिग्री भी मिल जाती है। सभी पत्रकार उन्हें डाक्टर निशंक कह रहे हैं या लिख रहे हैं मगर ये कोई नहीं जानता कि निशंक जी ने कहा से और किस विषय पर डाक्टरेट की है। यह अपने आप में सीबीआइ जांच का मामला हैं। बिक गये हैं उत्तराखण्ड के पत्रकार। खास कर ईटीवी तो पत्रकारिता के नाम पर वैश्यावृत्ति कर रहा है। ईटीवी वालों को शर्म तक नहीं आती कि आखि इतनी भाएडगिरी करने से उत्तराखण्ड की जनता इस चैनल के बारे में क्या सोचती होगी। निशंक जी का प्रचार विभाग खुद ही दावा करता है िकवह 24 में से 18 घण्टे राजकाज में जनसेवा करते रहते हैं। इसके बाद उनके पास 4 घण्टे बचते हैं। उन चार घण्टों में वह सोते भी हैं और किताबें भी लिखते हैं। धन्य हैं निशंक जी और धन्य हैं उनके चाटुकार गोविन्द कपटियाल। जो लोग उनके लिये किताबें लिखते हैं वे भी अपनी प्रतिभा बेच कर अपना शरीर बेचने का जैसा गन्दा धन्धा करते हैं। चाहे वे कालिदास रोड वाले हों या फिर श्रीनगर गढ़वाल वाले हों।
Rajender Joshi
February 20, 2011 at 4:33 pm
आदरणीय यशवन्त जी
आपके द्वारा पत्रकारों को अपनी बात कहने का एक माध्यम उपलब्ध कराया गया है वह सराहनीय है लेकिन कुछ माफिया जो जमीनों का धन्धा करते हैं इसका बड़ा मासूमी से उपयोग कर रहे हैं। उमेश कुमार शर्मा जिनकी बड़ी दर्दनाक कहानी आपने पोस्ट की है उसका सत्य भी जानने का प्रयास करें। कितने गरीब लोगों की जमीनें इस मासूम व्यक्ति ने हड़प ली और अपना महलनुमा आवास मन्दाकिनी विहार में खड़ा कर दिया है। कृपया देहरादून आकर उसकी भी जानकारी लें और इस व्यक्ति के विषय में सुनिश्चित करें कि यह पत्रकार है अथवा पत्रकार की खाले में छुपा हुआ भेड़िया है, जो पैसा और औरत का उपयोग कर आज देहरादून में अकूत सम्पति का मालिक है। इसकी सहस्रधारा रोड, राजपुर रोड तथा डी०एल० रोड पर सम्पति है दर्जनों महंगी कारों का मालिक है। शायद देहरादून के वास्तविक पत्रकारों के पास अपना मकान या वाहन तक ना हो। यह सत्ता का दलाल नेताओं के तलवे चाटने वाला जब तक पैसा कमाता तब तक उसका रहता है जब पैसा नही मिलता तो उसका विरोधी बन जाता है। पहले खण्डूरी का दुश्मन अब निशंक का दुश्मन, आखिर क्या कारण है? और भी पत्रकार हैं। इसकी संस्था एन०एन०आई० में काम कर चुके अरुण शर्मा, प्रवीन भारद्वाज आदि ऎसे कई पत्रकार हैं जो इसकी असलियत जानते हैं। यहां कई लोगों के मकानों पर इसने कब्जे कर रखे हैं उनमें से एक श्री सन्त सूद के मकान में यह २००३ में ७ माह का किराया तय कर घुसा था और आज तक कब्जा किये बैठा है। माननीय यश्वन्त जी एक शातिर टोपीबाज जो आपके पोर्टल के माध्यम से आपको भी ईस्तेमाल कर रहा है और आप इससे बच कर रहियेगा।