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मुख्यमंत्री ने संपादक को लताड़ा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जितने सरल स्वभाव वाले जाने जाते हैं, उतने ही कड़क भी हैं! इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब उन्‍होंने एक संपादक की जमकर क्‍लास ले ली। पिछले दिनों जोधपुर में डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी थी। प्रशासन इस हड़ताल को रोकने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ था। मुख्‍यमंत्री हड़ताल को समाप्‍त कर डाक्‍टरों से काम पर वापस लौटने की अपील की थी।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जितने सरल स्वभाव वाले जाने जाते हैं, उतने ही कड़क भी हैं! इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब उन्‍होंने एक संपादक की जमकर क्‍लास ले ली। पिछले दिनों जोधपुर में डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी थी। प्रशासन इस हड़ताल को रोकने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ था। मुख्‍यमंत्री हड़ताल को समाप्‍त कर डाक्‍टरों से काम पर वापस लौटने की अपील की थी।

यह बात और है कि गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कोई भी ढंग का अधिकारी यहां आना ही नहीं चाहता, स्थिति यह है कि सिर्फ चमचागिरी में माहिर अधिकारी ही जोधपुर में टिके हुए हैं। अब रही बात गहलोत के कड़क होने की तो, मुख्यमंत्री ने राजस्थान के जाने-माने एक अखबार [नाम लेना ठीक नहीं रहेगा] के संपादक की जमकर क्लास ले ली और वो भी एक जज की तरह, संपादक महोदय को बकायदे अपने सामने कुर्सी पर बैठाकर।

भले ही इन संपादक महोदय को गहलोत का नजदीक होने का घमंड था,  लेकिन उस दिन बेचारे संपादक महोदय का सारा घमंड चकनाचूर हो गया। बेचारे संपादक महोदय कुछ भी जवाब देते नहीं बना।  दरअसल डॉक्टरों की हड़ताल के चलते परेशान गहलोत ने डॉक्टरों से अपील की थी कि वो जनता की भलाई के लिए काम पर वापस लौट आयें। सीएम अशोक गहलोत के इस बयान को इस अखबार ने कोई तवज्‍जो नहीं दी। इसी के चलते गहलोत इस अखबार के संपादक से खासे नाराज थे।

अशोक गहलोत जब जोधपुर आये, तब सम्पादक महोदय पैंट-कमीज झाड़कर की गहलोत से मिलने चले गए। पहले से ही नाराज सीएम ने सबसे पहले तो संपादक महोदय को एक कुर्सी लगवाकर सामने बैठने को कहा। इसके बाद उन्‍होंने संपादक महोदय को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आप लोग सिर्फ अपने सेठों को खुश करने में जुटे हो, राज्य की भलाई को लेकर आपको किसी बात की चिंता नहीं है। मैंने जनता और मानवता की भलाई के लिए सन्देश जारी किया और आप लोगों ने उसे नजरअंदाज कर दिया। ये कैसी पत्रकारिता है, भाई मैं खुद भी पत्रकार हूं और इस बात को भली-भांति जानता हूं कि पत्रकारिता मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को ध्यान में रखकर की जाती है, लेकिन आप तो रास्ते से ही भटक गये।

इतना ही नहीं अशोक गहलोत ने इन संपादक महोदय को जमकर खरी-खोटी सुनाई और उन्हें अर्श से फर्श पर ला खड़ा किया। गहलोत के कड़े तेवर देख बाकी के पत्रकार भी चुप रहने में भलाई समझी और विदा हो लिए। अब गहलोत के नजदीक समझे वाले संपादक महोदय कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने इस अखबार के संपादक को ही पत्रकारिता सिखा दी।

जयपुर के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.

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0 Comments

  1. BIJAY SINGH

    October 9, 2010 at 4:13 am

    issiliye kahte hain na ki jada mithas achchi nahi hoti.

  2. jodhpur

    October 9, 2010 at 2:40 pm

    vah vah !!! bhadas vale chha gye. bilkul aeaa hi huaa tha.

  3. gaurav garg

    October 9, 2010 at 4:59 pm

    janab galti thi toh sunani padi warna aaj ke samay mein hamare jaisa ek chota sa patrkaar mukhyamantri ko kuch nahi samajta toh sampadak toh sampadak hi hai.waqt par in sampadak mahodya ko mukhyamantri ko dikha dena chahiye ki sampadak kya hota hai

  4. ram kumar

    October 9, 2010 at 5:09 pm

    gehlot ji friendship wale cm hai.jis sampadak ki bat ho rahe hai. wo karib 20 salo se gehlot ji ke sath the. jodhpur ke edition ke sampadak, wo jodhpur ke rahene wale or cm bhi jdpr ke. phir bhi aisa kya hua. ki rajasthan ke akbhar ke sampadak ko rajasthan ke cm ne aisa kaha.

  5. manak

    October 9, 2010 at 7:08 pm

    राज्य के प्रमुख समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका के संपादक को मुख्यमंत्री के खरी-खरी सुनाने के बाद जोधपुर की मीडिया बिरादरी सकते में आई है, जबकि मुख्यमंत्री पद पर इस मर्तबा ताजपोशी के बाद से अशोक गहलोत मीडिया पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं। इसमें कोई शक नहीं कि जोधपुर के मीडिया जगत में दौलतसिंह चौहान एक बड़ा नाम है। खुद उन्हें भी इस घटना से पहले शायद यह गुमान था कि मुख्यमंत्री से उनकी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी अपील न छप पाने पर उन्हें जिस तरह सार्वज्निक तौर पर आड़े हाथाों लिया, उसे लेकर मीडिया बिरादरी को उसी वक्त खिलाफत करके एकजुटता दिखानी चाहिए थी। लेकिन जोधपुर की मीडिया बिरादरी से ही होने के कारण मैं जानता हूुं कि यहां ऐसे दर्जनों मीडियाकर्मी हैं, जिन्हें यह मुगालता है कि अशोक गहलोत उन्हें ज्यादा भाव देते हैं। यह अलग बात है कि इस बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से अशोक गहलोत सबको या तो लॉलीपोप दे रहे हैं या झिडक़ी पिला रहे हैं। पिछले दौरे में उन्होंने राजीव गांधी नगर का जायजा लेते वक्त भास्कर के रिपोर्टर को सरेआम अफसरों के सामने डांट दिया था। वजह यह थी कि भास्कर में इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री की नजर में कुछ ऊल-जलूल छपा था। मुख्यमंत्री गहलोत को अपने ही गृहनगर में यह गंवारा नहीं था। इसके बावजूद अब तक भास्कर के संपादक की यह खुमारी नहीं गई है कि मुख्यमंत्री उनके सबसे ज्यादा करीब है। अन्यथा हर कोई जानता है कि इससे पहले एक प्रेस कान्फरेंस के कुछ तथ्य उलटे छप जाने का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री ने टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्टर को सभी के सामने जलील किया था। तब भी दूसरे मीडियाकर्मी बजाय रिपोर्टर का बचाव करने के, मुख्यमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए रिपोर्टर पर ही पिल पड़े थे। उस वक्त भी यही संपादक मौजूद थे। तब उन्होंने भी रिपोर्टर का बचाव करना मुनासिब नहीं समझा था। वक्त पलटा और इस बार खुद उन्हें ही शिकार होना पड़ गया। इस बार भी लोग उलटबांसियां करने में पीछे नहीं है। कुछ दबी जुबान से तो कुछ खुलेआम सीएम-एडिटर एपिसोड को चासनी लगाकर सुना रहे हैं। परेशानी यह है कि एडिटर यदि दूध के धुले होते तो शायद सीएम का प्रतिवाद कर पाते, मगर उन्होंने तो बार-बार यह सफाई देकर कि उन्होंने सीएम के कहने पर खबरों में रद्दो बदल किया था और इसका ईमेल भी सीएम साहब को भिजवाया था, खुद ही बेनकाब हो गए कि वे सीएम को खुश तो करना चाहते थे लेकिन सफल नहीं हुए। खैर, यह घटना जोधपुर के मीडिया बिरादरी के लिए सबक हो सकती है कि अब भी सीएम की चापलूसी बंद करके सच्चाई सामने लाएं। कोई मीडियाकर्मी यह सवाल तो पूछ कर दिखाए कि आखिर वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचार पर गुर्राते हुए सीएम बने गहलोत ने घपलों-घोटालों की जांच से तौबा क्यों कर ली? मैं यशवंतजी से पूछना चाहता हूं कि आपने सब कुछ प्रकाशित करने के बाद नाम छापने से गुरेज क्यों किया? यदि तोमर साहब लिखते हैं तो आप भास्कर के मालिकों को नंगा करने से नहीं चूकते। ओपन लिखने का रिजर्वेशन क्या बड़े खबरचियों का ही है। एक सच्ची घटना पर परदा डालना ही था तो अच्छा होता आप प्रकाशित ही नहीं करते।

  6. mazhar

    October 9, 2010 at 7:12 pm

    cm aur sampadak dono jodhpur ke hain. sampadak reproter ke samay se ab tak dosti nibhate aaye hain. lekin yah ghatna dukhdayi hai.

  7. manak

    October 9, 2010 at 10:43 pm

    jisne bhi mere manak ke nam se likha hai.wo puri tarah galat likha hai.bhaskar ke sampadak ko to khabaro ki khumari kisi ki nazdiki ki nahi. mere ko unke sath karib sawa sal ho gaya. wo shayad yahan per cm se sirf ek bar mile hai. koi bhi vip ko beat reporter ko hi bhajete hai. khabaro main dhar lagne ke karan or jodhpur ke mathodisho ki dukan band karne ke karan shayad kaise ne mere nam se galt likha hai. baki kam to akbhar bolta hai.

  8. manak

    October 10, 2010 at 1:02 am

    bhasakr ke sampadak kitulna mat karo. akbhar dehko or lagon se bat karo

  9. Rajesh Sharma, Jaipur

    October 10, 2010 at 3:26 am

    Patrakarita ke bajay chamchgiri karenge to yahi hoga. Khud to lajjit honge hi patrakar samaj ko bhi lajayenge. Patrika me bhi aise hi chaploos aur bhrasht patrakaron ko tavajjo milti hai. Daulat ji ka pet bahut bada hai ji. bharne ka naam hi nahi leta. Gehlot Sahab ko bhi yeh acchi tarah maloom hai. halanki patrakaron ke hitaishi samjhe jane wale Gehlot bhi badle-badle nazar aane lage hain. kahin ve adhikansh patrakaron ki niyat ke baare me jaan to nahi gaye hain?

  10. ABC

    October 10, 2010 at 2:25 pm

    Bhai main to itna janata hun ki ye politician apne bap ke bhi nahi hote. Hamare ptrakar sathiyon ko aise dher saare politician se samna hua hoga, jo jaroorat hone par aapke talve chatare hain aur kam nikal jane par kutte ki tarah bhaunkate hain. Ek sampadak ke sath CM ka misbehave karna koi Ascharya ki baat nahin hai. Election ke pahale yahi CM Chote-Bade Akhbar ke Daftron me Jaakar Chaprasi tak se hath milata tha aur samartha mangta tha Aur CM ban jane par DADAGIRI kar raha hai. Sab samay ka fer hai. Ek din ayega jab yahi CM ek bar phir usi sampadak ke samane hath jodkar khada hoga.

  11. देवेन्द्र विक्रम

    October 10, 2010 at 3:54 pm

    जोधपुर से मेरा भी जुडाव है और कई हमपेशा साथियों से मेलजोल भी. भाई लोग ही बताते हैं कि जिन संपादक महोदय को सीएम ने पिलाया वे इसांन बुरे नहीं. यह बात और है कि हम लोगों ने ही नेताओं को सर की टोपी बना रखा है. बेचारे संपादक उस वक़्त बोल भी लेते तो मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य मीडियाकर्मी उनके समर्थन में जुबान भी खोलता, क्योंकि जोधपुर में अशोक गiहलोत का जो मीडिया में कोकस है, किसी से छुपा नहीं.
    भले ही गहलोत ने किसी मीडिया वाले को कभी चुतड तक चाटने नहीं दी हो, लेकिन इस शहर में उनके खिलाफ कोई अख़बार नही छापता.
    और तो और जिस समाचार पत्र की बात हो रही है, उसके एक वरिष्ठ व्यक्ति तो गहलोत के पिछले कार्यकाल में सरकारी प्रशस्ति गायकी का सम्मान पाकर प्रेस अटेची तक रह चुके है. नीति-संस्कारो का राग अलापने वाले इस अख़बार की कथनी और करनी में भी फर्क है. इसलिए अच्छा हुआ जो संपादक जी नहीं बोले. बाकी तो गहलोत कभी दिल्ली पधारे और मीडिया से मुखातिब हो, फिर करेंगे बात….

  12. anu sharma

    October 11, 2010 at 5:24 pm

    the way cm is dealing with media is matter of concern. why cm is getting angry with one or another everyday ? media should always keep a distance with politician only then they can save the image & reputation ? and by the way why cm behaviour is not like this with his bureaucrats? this should be taken as a attack on dignity of 4th pillar.wo kaha hy ki – “vatan ki fikar kar nadan ……….. tumhery barbadiyo ke masvirey hongy aasmanu me.

  13. dinesh

    October 12, 2010 at 4:39 am

    bhadas media ko dhanyavad,daulatji ke baare me jodhpur ka ek ek patrakar janta hai, wo yu tu bahut imaandar hai lekin unme aham bhi khub hai. Rahi baat CM ki to wo to yaha tak kahte hai ki Ashok Gehlot ko CM banaya kisne maine. Ab unki sari garmi nikal gayi hogi.

  14. suraj singh

    October 14, 2010 at 9:59 pm

    sab apna jab hith sadh ahe h. galat bhi nai h. lakin jab baat apni ho to ek ho jana chaihe. varna parinaam aur khatarnak ho sakte ha

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