: दैनिक जागरण और अमर उजाला ने संयमित ढंग से खबर को प्रकाशित किया है : ऐसा लगता है ‘हिन्दुस्तान’ (मेरठ संस्करण) ने इस बात को ठान रखा है कि किसी हिन्दु और मुसलमान के बीच होने वाली आपसी एवं नितांत व्यक्तिगत झड़प को भी दो समुदायों के बीच झड़प बताना है। मेरठ का वैली बाजार हिन्दु-मुस्ल्मि एकता की मिसाल है। यहां पर दोनों ही समुदायों की दुकानें हैं। घटना कल 12 अक्टूबर की है। वैली बाजार में एक हिन्दु दुकानदार ने बंद पड़ी एक मुसलमान की दुकान के सामने अपना सामान लगा दिया। मुस्लिम दुकानदार ने अपनी दुकान के आगे सामान लगाने के लिए मना किया तो तूतू-मेंमें से होकर बात हाथापाई तक आ गयी। रात को ही दोनों के बीच समझौता भी हो गया। यह झगड़ा महज दो दुकानदारों के बीच का और व्यक्तिगत था। ‘हिन्दुस्तान’ ने इस खबर को ‘दुकानदारों में हाथापाई, दो समुदाय आमने-सामने, हंगामा’ शीर्षक के साथ सिंगल हैडिंग में और बॉक्स में प्रकाशित की है।
इतना तो किया गया कि हैडिंग में ‘तनाव’ के स्थान पर ‘हंगामा’ लिख दिया गया। यह भी नहीं लिखा गया कि ‘शहर में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया’, लेकिन विस्तृत खबर में यह लिखने का लोभ संवरण नहीं कर पाया कि ‘दोनों ही समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए और हंगाम खड़ा हो गया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।’

हिंदुस्तान, मेरठ में प्रकाशित खबर
इसी खबर को ‘दैनिक जागरण’ और ‘अमर उजाला’ ने बहुत ही संयमित ढंग से प्रकाशित किया। दोनों अखबारों ने झगड़े को महज दो दुकानदारों का झगड़ा मान कर ही खबर को लिखा। हम पहले भी कहते आए हैं कि हिन्दू और मुस्लिम के बीच के झगड़े को महज दो शहरियों के बीच झगड़ा मानकर ही खबर लिखी जानी चाहिए। दरअसल, किसी मुस्लिम के पक्ष में आने वाले उसके रिश्तेदार मुसलमान तो हिन्दु के पक्ष में आने वाले उसके रिश्तेदार हिन्दु ही होंगे। ऐसे में यह लिखना कि ‘दोनों ही समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए और हंगामा खड़ा हो गया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए’ बिल्कुल गलत है। इससे पहले भी 13 सितम्बर को मेरठ के मौहल्ला इमलियान में दो पड़ोसियों के झगड़े की खबर को ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ ने बड़ा बनाकर पेश किया था।
लेखक सलीम अख्तर सिद्दीकी 170, मलियाना, मेरठ के वासी हैं, हिंदी ब्लागिंग के सक्रिय साथी हैं. उनके हिंदी ब्लाग का नाम ‘हक बात‘ है. उनसे संपर्क 09837279840 पर फोन करके या फिर उनकी मेल आईडी [email protected] पर मेल करके किया जा सकता है.












Virendra Singh Chauhan
October 14, 2010 at 12:47 am
मैंने आपका ये विश्लेषण पढ़ा …और महसूस किया कि आपने बिलकुल सही लिखा है …….
PANKAJ
October 14, 2010 at 5:59 am
salimji ek tarf hindustan meerut main shantti ke liy prograame karwaatta hai dusri tarf is trha ki khaber likh kar maahol bigdne ke kosish kar raha hai.is ko hindustan ka dogllapan hi kahenge-pankaj
sunita
October 14, 2010 at 1:36 pm
इस अखबार के प्रधान संपादक से और कुछ उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। जब नब्बे के दशक में मस्जिद-मंदिर मामला गरम था, इन संपादक महोदय ने इतनी सांप्रदायिक हेडिंग लगाई थी जो अश्लील भी थी। लोगों को ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि सबकुछ ठीक बना रहे बस…
Satendar Chaudhary
October 14, 2010 at 6:18 pm
Boss kuch log isi ka khate hai or dukan chalte hai.Inhe shahar me kur or to nahi dikhta
m aslam
October 15, 2010 at 12:14 am
saleem sahab aap nai ghatiya patarakarita ke liye hindustan ke khilaf writep lhi likha hai m aslam mawana 09897548066
Rahul Tripathi
October 16, 2010 at 12:03 am
reporter par bhut kuch nirbhar krtaaaaa hai
ydi baday log apneee jimaydary samzay to is se bchaaaa ja sktaa hai
RAHUL TRIPATHI
SHANTI NAGAR BILHAUR KANPUR
ved
October 17, 2010 at 12:46 am
ye sab kya hai bhaiya,!.. desh ko badhao….yahi media ka daaitva hai..