क्या मेरठ में ‘हिन्दुस्तान’ दंगा कराके ही मानेगा!

सलीम अख्तर सिद्दीकी : दैनिक जागरण और अमर उजाला ने संयमित ढंग से खबर को प्रकाशित किया है : ऐसा लगता है ‘हिन्दुस्तान’ (मेरठ संस्करण) ने इस बात को ठान रखा है कि किसी हिन्दु और मुसलमान के बीच होने वाली आपसी एवं नितांत व्यक्तिगत झड़प को भी दो समुदायों के बीच झड़प बताना है। मेरठ का वैली बाजार हिन्दु-मुस्ल्मि एकता की मिसाल है। यहां पर दोनों ही समुदायों की दुकानें हैं। घटना कल 12 अक्टूबर की है। वैली बाजार में एक हिन्दु दुकानदार ने बंद पड़ी एक मुसलमान की दुकान के सामने अपना सामान लगा दिया। मुस्लिम दुकानदार ने अपनी दुकान के आगे सामान लगाने के लिए मना किया तो तूतू-मेंमें से होकर बात हाथापाई तक आ गयी। रात को ही दोनों के बीच समझौता भी हो गया। यह झगड़ा महज दो दुकानदारों के बीच का और व्यक्तिगत था। ‘हिन्दुस्तान’ ने इस खबर को ‘दुकानदारों में हाथापाई, दो समुदाय आमने-सामने, हंगामा’ शीर्षक के साथ सिंगल हैडिंग में और बॉक्स में प्रकाशित की है।

‘रण’ देख रोना आया, पैसे बर्बाद न करें

[caption id="attachment_16849" align="alignleft"]सलीम अख्तर सिद्दीकीसलीम अख्तर सिद्दीकी[/caption]दोस्तों के साथ तीन दिन पहले तय पाया गया था कि सभी काम छोड़कर ‘रण’ फिल्म का पहला शो देखा जाएगा। ऐसा ही किया भी। ‘रण देखकर लौटा हूं। फटाफट आपको फिल्म की कहानी बता देता हूं। विजय हर्षवर्धन मलिक एक न्यूज चैनल ‘इंडिया 24’ चलाते हैं। आदर्शवादी पत्रकार हैं। चैनल घाटे में चल रहा है। टीआरपी बढ़ाने के लिए मलिक का बेटा जय विपक्ष के एक नेता, जो बाहुबली है, के साथ मिलकर एक साजिश रचते हैं। उस साजिश में देश के प्रधानमंत्री हुड्डा को एक शहर में हुए बम ब्लॉस्ट का साजिशकर्ता करार देती सीडी बनाई जाती है। यानि खबर क्रिएट की जाती है। हर्षवर्धन मलिक को सीडी दिखाई जाती है। मलिक को लगता है कि देशहित में ये खबर अपने चैनल पर चलाना जरुरी है। इंडिया 24 पर खबर चलती है। चुनाव में हुड्डा हार जाते हैं और विपक्ष का नेता जीत जाता है।

पुण्य के माफीनामे से उठे कई सवाल

एनडीए शासनकाल में अहमदाबाद पुलिस ने इशरत जहां और अन्य तीन लोगों को आतंकवादी बताकर मुठभेड़ में मार गिराया था। उस मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच में मुठभेड़ को फर्जी और सरकार से तमगे हासिल करने के लिए की गई हत्याएं बताया गया है। मजिस्ट्रेट तमांग जांच रिपोर्ट आने के बाद इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ को लेकर मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। मीडिया पर उठे सवालों के बाद मशहूर टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने ‘इशरत हमें माफ कर दो’ शीर्षक से एक आलेख दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण के लिए लिखा है। उस आलेख को भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पर भी प्रकाशित किया गया है।

मगर मोदी को शर्म क्यों नहीं आती?

सलीम अख्तर सिद्दीक़ीबी4एम पर उदय शंकर खवारे ने शेष नारायण सिंह के आलेख के जवाब में कहा है कि ‘सिंह साहब, शर्म तो आपको आनी चाहिए।‘ उदय शंकर जी, सिंह साहब को तो इस बात पर शर्म आती है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में नरेन्द्र मोदी नामक एक मुख्यमंत्री अपने मातृ संगठन आरएसएस के एजेंडे को परवान चढ़ाने के लिए गुजरात के हजारों मुसलमानों को ‘एक्शन का रिएक्शन’ बताकर मरवा देता है। बेकसूर नौजवानों को फर्जी एनकाउन्टर में मरवा डालता है और वह फिर भी मुख्यमंत्री बना रहता है। लेकिन दुनिया के धिक्कारने के बाद भी नरेन्द्र मोदी को शर्म नहीं आती। सही बात तो यह है कि नरेन्द्र मोदी को ‘मानवता के कत्ल’ के इल्जाम में जेल में डालना चाहिए। इशरत और उसके साथियों को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया, इसकी पुष्टि तमांग जांच रिपोर्ट करती है। लेकिन जैसा होता आया है, मुसलमानों के कत्लेआम की किसी रिपोर्ट को संघ परिवार हमेशा से नकारता आया है। मुंबई दंगों की जस्टिस श्रीकृष्णा आयोग की रिपोर्ट को भी महाराष्ट्र सरकार ने डस्टबिन के हवाले कर दिया था।