प्रिय भाई यशवंत जी, सादर नमस्कार, आपकी पूज्य माताजी चाची जी और उनकी बहू के साथ गाजीपुर पुलिस द्वारा की गई बदतमीजी की खबर ने अंदर तक हिला दिया. आप जैसे पत्रकार की माताजी के साथ यदि ऐसा हो सकता है तो उत्तर प्रदेश में आम आदमी के साथ पुलिस क्या कुछ नहीं कर सकती, यह कहना मुश्किल नहीं है.
पर आपने जिस साहस के साथ पुलिस की यह अमानवीय चेहरा अपने लोगों के सामने रखा, उससे यह बात तो सामने आ गई कि पुलिस हो या प्रशासन या फिर सरकार, किसी कलमकार को दबा नहीं सकती. जिस अखबार ने इस खबर को अपने पहले पन्ने पर छापा, उसे बधाई वरना आजकल तो बड़े अखबार अफसरों नेताओं और सरकारों के पिट्ठू बनने की होड़ में लगे हुये हैं. पर जो भी पत्रकार पत्रकारिता को अपना आदर्श मानता है, वह आपके साथ है. शायद यही कारण है कि गाजीपुर और उत्तर प्रदेश की निकम्मी और नामर्द पुलिस को अपनी पूंछ दबानी पड़ गई. यशवंत जी, आप अपने आप को अकेला मत समझना, हम सब आपके साथ हैं.
लेखक चैतन्य भट्ट जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार हैं. वे कई अखबारों में संपादक रहे हैं.












Sushil Gangwar
October 20, 2010 at 2:34 am
जाने माने पत्रकार और भड़ास ४ मीडिया .कॉम के सीईओ यशवंत सिंह के परिवार के साथ जो गुजरी है उससे मेरा दिमाग हिल गया । पुलिस इतनी घटिया और बेकार हो गयी है जो महिलाओ को १२ से १८ घंटे ठाणे में रखा । क्या पत्रकार चुप बैठे रहेगे । माँ – माँ होती है चाहे वह किसी की माँ हो । माँ में भेद करना अपराध है । चाची जी और उनकी बहू के साथ गाजीपुर पुलिस द्वारा की गई बदतमीजी की खबर ने सोते पत्रकारों को जगा दिया है । यह घटना किसी के साथ घटित हो सकती है । इस लिए पत्रकारों को एक जुट होना पड़ेगा ।
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sushil Gangwar
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