: गोवा फिल्म फेस्टिवल : गोवा में चल रहे भारत के 41वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में जब यह घोषणा की गयी कि रेल मंत्री ममता बेनर्जी बतौर मुख्य अतिथि गोवा आयेंगी तो लोगों ने नाक भौं सिकोड़ लिए. एक तो वह रेल मंत्री, दूसरा जमीन से जुड़ी नेता और तीसरा हमेश गुस्से में रहने वाली मंत्री. लेकिन 22 नवम्बर शाम साढ़े छह बजे गोवा के कला अकादमी में जब वो भाषण देने मंच पर पहुंची तो वह लोगों के लिय एक प्रेरणादायी कहानी बन गयीं. 900 की क्षमता वाले कला अकादमी में इससे ज्यादा लोग थे.
आगे की पंक्ति में गोवा के सीएम दिगम्बर कामथ, स्पीकर प्रताप सिंह राणे के अलावे फिल्म जगत की कई हस्तियाँ जैसे अजय देवगन, मनोज बाजपेई, दिव्या दत्ता, इला अरूण, रीमा सेन, चंकी पाण्डेय वगैरह मौजूद थे. इन सबके बीच अगर कोई अलग दिख रहा था तो वह थीं ममता बनर्जी. सफ़ेद रंग की हलके पार वाली साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल. और जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो ज्यादातर समय हॉल तालियों की आवाज़ से गूंजता रहा. ममता ने अंग्रेजी में कहा- “मुझे अंग्रेजी नहीं आती, मगर जो भी कहूंगी दिल से कहूँगी”. गोवा को उन्होंने बहूत खूबसूरत कहा. फिर कहती हैं- मैं तो ग्रास रूट से आयी हूँ और आपने मुझे ग्लैमर वर्ल्ड के सामने खड़ा कर दिया है. मैं इनकी दुनिया से ताल्लुक नहीं रखती मगर मुझे मालूम है यह कितना मेहनत करते हैं. डाइटिंग, डाइटिंग, डाइटिंग. हमें कुछ भी खाने की आज़ादी है, पर इन्हें नहीं.


आगे वह कहती हैं- हम जिन समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरते हैं उसे भी आप बहुत खूबसूरती से पर्दे पर उतार देते हैं. तृणमूल की यह नेता आश्वासन देती हैं कि बढ़ रहे इंटरटेनमेंट टैक्स के लिए वह दादा यानि प्रणव मुख़र्जी से बात करेंगी, जिनके पास अभी फाइनेंस डिपार्टमेंट है. यह तमाम बातें वह इतनी आत्मीयता के साथ बोल रहीं थीं जिसमें

नमिता शरण
लेखिका नमिता शरण वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई पत्र-पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं. इन दिनों गोवा के चैनल ‘एचसीएन’ की हेड के रूप में कार्यरत हैं.
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geetashree
November 26, 2010 at 9:03 am
नमिता, मैं गोवा नहीं जा पाई. तुम नियमित वहां की रिपोर्ट लिखो. हमें यहां बैठे बैठे जानकारी मिलती रहेगी. आफबीट स्टोरी हमेशा पठनीय होती है.
इंतजार रहेगा.
गीताश्री