मैं एक पत्रकार हूं. मैं 3 दिसम्बर की रात लगभग नौ बजे कुछ काम से उत्तम नगर पुलिस स्टेशन गया था. वहां डयूटी ऑफिसर के पीछे एक युवती बैठी हुई थी और बुरी तरह रो रही थी, वहां पर कोई महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थी. मानवता के नाते मैंने उसके रोने का कारण पूछा तो उसने बताया कि कुछ पुलिसवाले उसे उसके घर से सुबह ही उठा लाये हैं और अब तक रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं दिया है.
जब मैं उस युवती से बात कर रहा था तभी एक कांस्टेबल आया और मुझे बुलाकर एसएचओ के रूम में ले गया, जहां मुझे एसएचओ जय किशन ने बहुत ही भद्दी और गंदी गाली दी और मुझे मारने का प्रयास भी किया. उन्होंने मुझे धमकाया कि तुझे झूठे मुकदमें में फंसा कर सारी रात हवालात में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करूंगा. जब यह सारा वाकया हो रहा था, उस समय एसीपी राम गोपाल नायक वहीं बैठे हुए थे. उन्होंने जयकिशन को मुझे मारने और बदतमीजी करने से रोका.
मैंने डीसीपी पश्चिम शरद अग्रवाल से उनके मोबाइल पर रात्रि साढ़े नौ बजे बात किया और कहा कि सर यह मामला न सिर्फ पुलिस के अमानवीय व्यवहार का है बल्कि मीडिया के साथ भी अभद्रता का भी है. आपका कृपया मेरी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जय किशन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें ताकि भविष्य में वे कानून एवं संविधान का पालन करें.
सुमित चौहान
स्पेशल करस्पांडेंट
दैनिक इंडिया दर्पण












Bibhuti Kumar Rsatogi
December 7, 2010 at 10:11 am
पुिलस का जो रवैया रहा वह देश की राजधानी िदल्ली के िलए बेहद शर्मनाक है- आज भी राजधानी की पुिलस गांवों के पुिलस की भांित कार्य कर रही है जो हम सभी के िलए बेहतर नहीं जा सकता है- इस पर हम सभी पत्रकार को जरूर ध्यान देना चािहए- आला पुिलस अिधकारी को भी कार्रवाई करनी चािहए-