Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

साहित्य

बिहार का विश्‍लेषण करती श्रीकांत की ‘बिहार : राज और समाज’

राजबिहार अपने खास तेवर के लिए जाना जाता है। यहां की राजनीतिक प्रखरता के बावजूद यह राज्य विकास के पटरी पर सालों से नहीं आया। यहां राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सहित अन्य पहलुओं में बहुत कुछ बदलाव देखा जाता रहा है। बावजूद यह वह मुकाम नहीं पा सका जो अन्य राज्यों ने पाया। राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इसे पिछड़े राज्यों के अंतिम पायदान पर ला खड़ा किया। बिहार की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टियां भी न्याय नहीं कर पायी। देश के बाहर बिहारी शब्द गाली बनी। बिहार में बीस सालों में बहुत कुछ बदल गया है। सत्ताधारी पार्टी के एकाधिकार के खिलाफ नयी ताकत को जनता ने सत्ता के रंगमंच बैठाया। बिहार में विकास का सवाल उठा। आर्थिक विकास के साथ-साथ बिहार की गरिमा के लिए गोलबंद होने का दौर शुरू हुआ।

राजबिहार अपने खास तेवर के लिए जाना जाता है। यहां की राजनीतिक प्रखरता के बावजूद यह राज्य विकास के पटरी पर सालों से नहीं आया। यहां राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सहित अन्य पहलुओं में बहुत कुछ बदलाव देखा जाता रहा है। बावजूद यह वह मुकाम नहीं पा सका जो अन्य राज्यों ने पाया। राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इसे पिछड़े राज्यों के अंतिम पायदान पर ला खड़ा किया। बिहार की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टियां भी न्याय नहीं कर पायी। देश के बाहर बिहारी शब्द गाली बनी। बिहार में बीस सालों में बहुत कुछ बदल गया है। सत्ताधारी पार्टी के एकाधिकार के खिलाफ नयी ताकत को जनता ने सत्ता के रंगमंच बैठाया। बिहार में विकास का सवाल उठा। आर्थिक विकास के साथ-साथ बिहार की गरिमा के लिए गोलबंद होने का दौर शुरू हुआ।

सालों से बिहार में जो बदलाव होते आये उसे प्रख्यात पत्रकार श्रीकांत ने अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक “ बिहार : राज और समाज’’ में समेटा है। वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक ही नहीं एक हैंडी दस्तावेज है, जो बदलते बिहार की दास्तान को जनमानस के समझ को रखते हुए, बिहार की चैमुखी विकास के प्रति विचार-विमर्श की गुंजाईश पैदा करता है।

दर्जनों पुस्तक लिख चुके श्रीकांत ने बिहार के 100 साल के राजनीतिक विशलेषण को तथ्यों व आंकड़ों के साथ रखा है। “बिहार : राज और समाज’’ पुस्तक राजनैतिक सवालों के साथ-साथ जनता के आर्थिक पावरमेंट पर भी विमर्श करता है। लेखक ने लिखा है कि बिना बिहार के करोड़ों लोगों के आर्थिक विकास के बिहार क्या देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने बिहार के लोगों की आर्थिक सुधार पर ध्यान देने की वकालत की है। बिहार के लोगों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के मुददे को उठाया है। केवल शहरी क्षेत्र से जुड़े कुछ गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ देने मात्र से विकास नहीं होगा बल्कि संपूर्ण विकास के लिए दूर-दराज के गांवों का भी आधारभूत विकास करना होगा, तभी विकास की परिकल्पना सार्थक होगी।

पुस्तक में बिहार के राजनीतिक उतार-चढ़ाव को समेटा गया है। गरीबों, अल्पसंख्यकों, अतिपिछड़ों, पिछड़ों के उत्थान पर भी विमर्श किया गया है। बिहार में सामाजिक परिवर्तन के तहत अतिपिछड़ों, पिछड़ों और महादलितों के विकास के साथ-साथ राजनीतिक भागीदारी को भी प्रमुखता से पुस्तक में समेटा गया है। बिहार स्थापना दिवस का शताब्दी वर्ष चल रहा है ऐसे में श्रीकांत की यह पुस्तक केवल बिहार की राजनीतिक दशा-दिशा पर ही केंद्रित नहीं है बल्कि इसमें जनता की नब्ज को टटोलने का प्रयास किया गया है।

बिहार : कौन गरीब, कितना गरीब में श्रीकांत ने आंकड़ों के सहारे, तथ्यों को बखूबी रखा है, जो चौंकाने वाला तो है ही साथ ही सोचने पर मजबूर कर देता है कि कितने को ठीक से खाना तक नहीं मिलता। अन्य मुद्दो में बटाईदारी, किसान आंदोलन, गरीबों के अमीर नेता, बिहार : गदर और गद्दार, जातीय जनगणना और जातियां को भी श्रीकांत ने जमीनी स्तर से उठाते हुए बहस की गुंजाईश दी है।

“ बिहार : राज और समाज’’ पुस्तक में विकास के मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है। खास कर 15 साल तक बिहार के सत्ता पर काबिज रहने वाले लालू प्रसाद और उनके बाद के राजनीतिक परिर्वत्तन से सत्ता में आये नीतीश कुमार के विकास कार्यो की तुलनात्मक अध्यन भी मिलता है। जिसे जनता ने स्वीकारते हुए दोबारा सत्ता विकास के लिए सौंपी है। का विशलेषण किया गया है।

श्रीकांत ने अपने पंच लाइन “यह बिहार है’’ से ही प्रशंसात्मक या फिर व्यंग्यात्मक लहजे में राज्य की अच्छी, बुरी दशा-दिशा पर प्रकाश डाल दिया है। “ बिहार : राज और समाज’’ पुस्तक केवल पठनीय नहीं बल्कि सोच पैदा करने के साथ साथ विमर्श की अपील करती है।

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. मदन कुमार तिवारी

    December 27, 2010 at 10:25 am

    अब समझा । संजय भाई कितना भी छुपा कर करो पता तो चल हीं जाता है। आजकल लगता है बिहार के विकास का गुणगाण करनेवाली सभी किताबों का प्रचार का ठेका आपको मिल गया है। लगे रहो मुन्ना भाई आगे और कूछ भी मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...