: बनारस में हुई बैठक में लिया गया फैसला : मानवाधिकार नेता विनायक सेन को उम्र कैद की सजा के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने के लिए वाराणसी के बुद्धिजीवियों, सामाजिक और छात्र-युवा संगठनों ने एक बैठक की। जिला मुख्यालय पर हुई इस बैठक में कोर्ट के फैसले का पुरजोर कर विरोध किया गया।
वक्ताओं ने न्यायपालिका की विश्वसनियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम नागरिकों की आवाज को उठाने वाले मानवाधिकार नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ राज्य के दबाव में न्यायपालिका द्वारा लगातार इस तरह के निर्णय दिये जा रहे हैं जिससे मानवाधिकार, भूख एवं भ्रष्टाचार जैसे जीवन से जुड़े मुददों की लडाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओं व संगठनों की आवाज को हमेशा के लिए दबाया जा सके ताकि राज्य व केन्द्र की दमनकारी नीतियों व निर्णयों का कोई विरोध न कर सके।
बैठक को संबोधित करते हुए PUCL के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने कहा कि न्यायालय ने फैसले के माध्यम से तमाम जनतांत्रिक आवाजों को यह चेतावनी दी है कि अगर राज्य के लूट तंत्र के खिलाफ वह आवाज उठाएंगे तो उनका हश्र भी यही होगा। इस प्रतिरोध में फादर आनंद, सुनील सहस्त्रबुद्धे, बल्भाचार्य, लेनिन रघुवंशी, चित्रा सहसत्रबुद्धे, सिद्धार्थ जी, बल्लभाचार्य पाण्डे, जवाहर लाल कौल, मुलचन्द सोनकर, राजेश, दिलीप कुमार, मो. मूसा, लक्ष्मण प्रसाद समेत अनेक शहर के बुद्धिजीवियों ने शिरकत की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री को लाखों की संख्या में पोस्टकार्ड भेज कर हम इस निर्णय पर विरोध दर्ज कराएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह के जनविरोधी निर्णय न हो सके।
जिला मुख्यालय पर हुई इस बैठक में CPI(ML), साझा संस्कृति मंच, पहल, प्रगतिशील जनसगंठन, भारतीय किसान यूनियन, सूचना अधिकार अभियान, आसरा, लोक विद्या आश्रम, मानवाधिकार जन निगरानी समिति, प्रगतिशील लेखक मंच, आशा, आइसा, एशियन ब्रिज इण्डिया, प्रेरणा कला मंच, डिबेट सोसाइटी के प्रतिनिधियों समेत शहर के कई बुद्धिजीवियों ने शिरकत की।
द्वारा जारी
गुंजन सिंह
डिबेट सोसाइटी












madan kumar tiwary
December 29, 2010 at 7:26 pm
आप सबको धन्यवाद लेकिन मैं तो प्रधान मंत्री को ईमेल भेजेकर शुरुआत भी कर चुका हूं। लिख दिया है की इतिहास आपको भी भुलेगा नही , अगर बिनायक सेन की रिहाई सुनिश्चित नही करते तों। यहां जिक्र नहीं करना चाहता था कारण की आजकल किसी भी बात पर गाली देने का फ़ैशन हो गया है, बहुत बार कुछ लिखता हूं तो लोग गलत अर्थ लगा बैठते हैं। ईमेल का जिक्र नीचे है।
For release of Dr. Binayak sen
From:madan tiwary
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To:prime minister
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Mr. Prime minister ,
what happend with Mr.Binayak sen is shame for our nation. It is humiliating, we argue about our freedom and give example of human right.
now we feel , we are not better than myanmar and China. we did same with Dr. Binayak sen , what Mayanmar and China did with Aung San Suu Kyi and Liu Xiaobo. You Please take initiative to ensure release of Mr. Sen , otherwise History will not forget you too.