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कैट परीक्षा हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में कराने के लिए याचिका दायर, सुनवाई आज

: अमिताभ ठाकुर एवं डा. नूतन ठाकुर ने उठाया मामला : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में आईपीएस अधिकारी और आईआईएम लखनऊ के फेलो अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्त्री डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा आईआईएम के लिए ली जाने वाली कैट परीक्षा अंग्रेजी के अलावा हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी कराये जाने हेतु एक रिट याचिका दायर की गयी. याची के अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं. इस केस की सुनवाई शुक्रवार यानी आज होनी है.

: अमिताभ ठाकुर एवं डा. नूतन ठाकुर ने उठाया मामला : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में आईपीएस अधिकारी और आईआईएम लखनऊ के फेलो अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्त्री डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा आईआईएम के लिए ली जाने वाली कैट परीक्षा अंग्रेजी के अलावा हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी कराये जाने हेतु एक रिट याचिका दायर की गयी. याची के अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं. इस केस की सुनवाई शुक्रवार यानी आज होनी है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग के साथ आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बैंगलोर, आईआईएम कलकत्ता तथा आईआईएम लखनऊ इसमें प्रतिवादी बनाए गए हैं. इस रिट याचिका में कहा गया है कि सभी आईआईएम के निदेशकों ने आम सहमति से एक निदेशक फोरम बनाया और इसकी सामूहिक स्वीकृति से पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट और फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट में चयन हेतु एक कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) परीक्षा की व्यवस्था की गयी. कैट परीक्षा में एक अभ्यर्थी की आंकिक, वर्बल तथा तार्किक/डाटा इंटरप्रेटेशन क्षमता टेस्ट की जाती है.

याचीगण का कहना है कि यह व्यवस्था ऐसी है जिसके कारण हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में बीए, एमए आदि में अध्ययन करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के साथ भेद-भाव की स्थिति बनी हुई है. याचीगण ने इन परीक्षाओं से तुलना हेतु देश की दो अन्य प्रतिष्ठित और समकक्ष परीक्षाओं आईआईटीजेईई तथा सिविल सेवा परीक्षा का उल्लेख किया है. आज आईआईटीजेईई परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ली जा रही है, जबकि सिविल सेवा परीक्षा में संविधान के आठवें अनुच्छेद की सभी भाषाओं में परीक्षा ली जाती है.

याचीगण का कहना है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार आईआईएम का उद्देश्य “भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र हेतु उच्च स्तरीय मैनेजमेंट शिक्षा तथा ट्रेनिंग, रिसर्च तथा कंसल्टेंसी सेवा प्रदान करना है.” साथ ही यह भी कहना है कि “देश के नॉन-कॉर्पोरेट तथा अल्प-नियंत्रित क्षेत्रों के लिए रिसर्च करना’ आईआईएम के उद्देश्य हैं. ऐसे में मात्र अंग्रेजी भाषा में कैट परीक्षा लेना न सिर्फ हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषाभाषी लोगों के लिए भेदभावपूर्ण है बल्कि आईआईएम के मूल उद्देश्यों को भी पराजित करता है.

इन सभी तथ्यों के आधार पर अमिताभ तथा नूतन ने उच्च न्यायालय से यह निवेदन किया है कि कैट की परीक्षा अंग्रेजी के अलावा हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी कराई जाए. साथ ही यह भी निवेदन किया है कि कैट के बाद की आईआईएम  में ली जाने वाली इंटरव्यू, जीडी, निबंध जैसी परीक्षाएं भी अंग्रेजी के अतिरिक्त हिंदी में कराने के आदेश निर्गत किये जाएँ.

इससे पहले भी अमिताभ ठाकुर ने इस मामले पर सवाल उठाए थे. आईआईएम के लिए कैट परीक्षा हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी क्यों नहीं?

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0 Comments

  1. sikander hayat

    March 4, 2011 at 6:48 am

    is muddhe ko pakde rakhiyga amitab sir or nootan medam agar aap kamyaab ho gaye to yakin kijeye aap amar ho jayege vikas se bi jyada samanta janta ki pehli mang ha arundhanthiyo ko aap jese logo se sabak sekhna chahiye or asamanta ka pura aananad lene vali thakte aap per pura dabav banayege magar peche mat hatiyega

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