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होली के दिन गाजियाबाद पुलिस ने दिखाया अपना बर्बर चेहरा

: गाड़ी सहित उठा ले गए ढाई साल की बच्‍ची को : विरोध करने पर बरसाई लाठियां : 20 फरवरी को होली के दिन गाजियाबाद में प्रताप विहार पुलिस चौकी, पुलिस की कायरता और बर्बरता की गवाह बनी। पुलिस ने न केवल एक अबोध बच्ची के अपहरण की कोशिश की बल्कि विरोध करने पर उसकी मां समेत अन्य महिलाओं पर लाठियां बरसाईं। पुलिस ने इतनी हिमाकत तब की जब वो पीड़ित पक्ष को अच्छी तरह जानती-पहचानती थी।

: गाड़ी सहित उठा ले गए ढाई साल की बच्‍ची को : विरोध करने पर बरसाई लाठियां : 20 फरवरी को होली के दिन गाजियाबाद में प्रताप विहार पुलिस चौकी, पुलिस की कायरता और बर्बरता की गवाह बनी। पुलिस ने न केवल एक अबोध बच्ची के अपहरण की कोशिश की बल्कि विरोध करने पर उसकी मां समेत अन्य महिलाओं पर लाठियां बरसाईं। पुलिस ने इतनी हिमाकत तब की जब वो पीड़ित पक्ष को अच्छी तरह जानती-पहचानती थी।

घटना प्रताप विहार निवासी तेजेश चौहान, जो कि पंजाब केसरी में रिपोर्टर हैं, के साथ घटी। इससे पहले तेजेश वॉयस ऑफ इंडिया चैनल में गाजियाबाद के संवाददाता थे। तेजेश चौहान और उनके भाई राजीव चौहान से रविवार को होली मिलने के लिए उनके रिश्तेदार दीपक अपने परिवार के साथ आए। लेकिन उनका घर बंद पाकर वे अपनी कार से वापस लौटने लगे, इतने में तेजेश चौहान के पड़ोसियों ने उन्हें होली खेलने के लिए रोक लिया। दीपक और उनकी पत्नी अपनी ढाई साल की बच्ची आस्था को गाड़ी में अपने भाई के साथ छोड़ कर पड़ोसियों को गुलाल लगाने उतर पड़े। अभी उन्होंने गुलाल लगाया भी नहीं था कि बगल में ही स्थित पुलिस चौकी से चौकी इंचार्ज नरेंद्र शर्मा ने आकर गाड़ी का दरवाजा खोला और चलता बना। दीपक और उनकी पत्नी ने पीछे मुड़ कर देखा तो गाड़ी  गायब थी। इस पर बच्ची की मां का बुरा हाल हो गया।

सामने खड़े एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि एक पुलिस वाला जबरदस्ती गाड़ी ले गया है। आनन-फानन सबको फोन मिलाया गया। होली के कारण अधिकांश लोगों ने अपने मोबाइल घर पर छोड़ रखे थे। इतने में पत्रकार तेजेश चौहान के छोटे भाई राजीव मौके पर पहुंच गए और उन्होंने चौकी इंचार्ज को फोन करके अपना हवाला दिया। इस पर चौकी इंचार्ज ने बताया कि गाड़ी और बच्ची विजय नगर थाने में सुरक्षित है। गाड़ी और बच्ची को वो क्यों ले गया, इसका उसने कोई जवाब नहीं दिया। इतना सुनते ही परिजनों ने प्रताप विहार पुलिस चौकी पर हंगामा कर दिया। हंगामे की खबर फैलते ही चौकी इंचार्ज ने थाने पर ये कहकर चौकी पर फोर्स बुला ली कि स्थानीय लोगों ने शराब पीकर चौकी पर हमला कर दिया है।

इसके बाद एसओ विजय नगर अनिल कप्परवान के नेतृत्व में आए तकरीबन 50 पुलिस वालों की फोर्स ने ऐसी लाठियां बरसाईं कि कई लोगों को लहुलुहान कर दिया। लाठीचार्ज में एक व्यक्ति का हाथ भी टूट गया, जिससे बाद में पुलिस ने झूठी गवाही भी दिलवा दी। बर्बरता का स्तर ये था कि पुरुषों को बचाने आई महिलाओं को भी उन्होंने नहीं बख्‍शा और उनपर भी लाठियां बरसाईं। इस कायराना हरकत को अंजाम देते वक्त एसओ विजयनगर की नेमप्लेट भी मौके पर गिर गई। ये हंगामा देखकर तकरीबन पूरा प्रताप विहार पुलिस चौकी पर आ गया। इतनी भीड़ देखकर पुलिस के होश फाख्‍ता हो गए और पुलिस हवाई फायरिंग करने की प्लानिंग करने लगी। इतने में कॉलोनी के कुछ लोगों ने आकर मामला शांत कराया।

भीड़ ने जब हंगामा खड़ा किया तो एसओ विजय नगर अपने मोबाइल से भीड़ की वीडियो बनाने लगे। इस पर कुछ महिलाओं ने उनका मोबाइल ये कहकर छीनने की कोशिश की कि उस समय उन्होंने वीडियो क्यों नहीं बनाई जब पुलिस महिलाओं पर डंडे बरसा रही थी। प्रताप विहार वासियों ने पूरी पुलिस फोर्स के सामने एसओ विजय नगर को बुरा भला कहा, दबाव बढ़ता देख एसओ विजय नगर ने मौके से खिसकने में ही भलाई समझी और कुछ लोगों को जबरदस्ती गाड़ी में ठूंसकर थाने पर आकर बात करने को कहा।

विजयनगर थाने पर लोगों का भारी हुजूम पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ सिटी आरके सिंह थाने पहुंच गए। उनके सामने ही लोगों ने एसओ विजयनगर और चौकी इंचार्ज प्रताप विहार को आड़े हाथों लिया। दोनों के दोनों इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए कि बच्ची को क्यों उठाया गया। इस शर्मनाक कृत्य के बावजूद दोनों के चेहरे पर न तो कोई शर्म थी और न अपने किए का पछतावा। अगर प्रताप विहार के लोगों का दवाब नहीं होता तो पुलिस क्या करती कहा नहीं जा सकता।

सीओ सिटी ने बच्ची आस्था की मां, जो खुद ज्यूडिशियरी की तैयारी कर रही हैं, के बयान लिए। उनके बयान सुनकर सीओ भी सन्न रह गए। लेकिन एसओ विजय नगर अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। उसका बार-बार यही कहना था कि जब पता चल गया कि बच्ची सुरक्षित है तो हंगामा क्यों किया गया। लेकिन वो इस बात का जवाब नहीं दे पाया कि पूरे देश में एक आदमी ऐसा बता सकते हैं, जो ये मानने को तैयार हो जाए कि उनकी बहू-बेटी पुलिस की कस्टडी में सुरक्षित है। इस देश की पुलिस ने आज तक आम लोगों का विश्वास तोडा है, जीता नहीं।

बहरहाल हुआ वही जिसकी उम्मीद थी, न्याय नहीं मिला। प्रताप विहार वाहिसयों के दबाव को देखते हुए पकडे़ गए लोगों को तो छोड़ दिया गया, लेकिन गाड़ी को सीज कर दिया। गाड़ी में रखा पर्स, जिसमें पांच हजार रुपये थे, भी गाड़ी से गायब था। आज पुलिस ने गाड़ी को छोड़ते हुए दिखाया है कि गाड़ी बेढंगी तरह से चौराहे पर खड़ी थी। गाड़ी में कागज नहीं थे। गाड़ी को बच्ची के ताऊ (जिनको गाड़ी चलानी नहीं आती) खुद चलाकर थाने ले गए। किसी भी पुलिस वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर यही काम किसी और ने किया होता तो क्या पुलिस उस पर अपहरण का मामला नहीं दर्ज करती। तो फिर चौकी इंचार्ज पर अपहरण का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया। होली के अवसर पर गाजियाबाद एसएसपी के आदेश थे कि किसी भी गाड़ी को सीज न किया जाए, फिर उनके आदेशों की अवहेलना क्यों की गई।

एक रिहायशी मकान में चल रही प्रताप विहार पुलिस चौकी एक सफेद हाथी मात्र है। लोगों को इस चौकी से अपनी सुरक्षा की कोई अपेक्षा नहीं है। रेजिडेंट्‌स वेलफेयर एसोसिएशन अपने दम पर अपनी दमड़ी खर्च करके प्राइवेट गाड्‌र्स से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। आए दिन होने वाली छोटी-मोटी चोरियों और चेन स्नेचिंग की भी रपट कोई लिखाने नहीं जाता, क्योंकि पुलिस का रवैया सबको पता है। यूपी पुलिस की नस्ल ही कुछ ऐसी है कि आतंकवादियों और गुंडा तत्वों के सामने घुटने टेकती है और सारी हेकड़ी आम लोगों पर जमाती है।

महिलाओं पर लाठियां तब बरसाई गई हैं, जब कुछ दिन पहले गाजियाबाद के दौरे पर आईं मुखयमंत्री मायावती ये कहकर गईं थीं कि महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना पुलिस की प्राथमिकता हो। वो तो मामला मीडिया से जुड़े लोगों का था, तो पुलिस इतना दब भी गई वरना क्या होता कह नहीं सकते। लेकिन कौन सुनता है तूती की नक्कारखाने में। इस तरह की सैकड़ों घटनाएं हर रोज घटती हैं, लेकिन पुलिस की कार्यशैली को सुधारने की कोई कोशिश नहीं की जाती। समझौता कराने आए सीओ सिटी ने ये तो माना कि पुलिस ने गलत काम किया है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर उन्होंने कुछ नहीं किया। समझौते के अंत में उनका डायलॉग था- ”ये घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका हमें भी गहरा दुख है।”

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0 Comments

  1. jai kumar jha

    March 22, 2011 at 6:02 am

    प्रताप नगर वासियों को सीओ और दोषी पुलिस अधिकारीयों को सरे आम नंगा करके पीटना चाहिये था फिर डायलोग मारना चाहिये था की ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है हमें इसका दुःख है ..दरअसल आमलोगों के शराफत का नाजायज फायदा उठाते हैं ये अपराधी चरित्र वाले पुलिस के लोग…..पुलिस के आला अधिकारी खुद योग्य नहीं होते और फर्जी तरीके से IPS बनते है इसलिए उनके लिए ऐसे लोगों के खिलाफ करना कार्यवाही करना बूते से बाहर होता है….

  2. AMIT KUMAR

    March 22, 2011 at 11:10 am

    …उत्तर प्रदेश में एसा पहली बार नहीं हुआ है …इस से पहले भी कई बार इस प्रकार से पुलिस पत्रकारों के साथ उत्पीडन करती है …….गाज़ियाबाद के एस एस पी वसे तो मिडिया के सहारे ही टी वी और अखबारों में बने रहते है ..लेकिन जब कोई पुलिस वाला ही इन पत्रकारों के साथ उत्पीडन करते है तो जानब के पास मिलने का समय नहीं होता है कॅप्टन साहब अगर मिडिया के सहारे ही आप इतने दिन तक गाज़ियाबाद में बने रह सकते हो तो मिडिया के लोगो की भी परेशानी सुन लिया करो रही बात विजय नगर एस सो की तो जनाब वो तो कॅप्टन साहब के ही करीबी है . कॅप्टन साहब की मेरबनी के चलते ही तो उनको विजय नगर का चार्ज मिला है . अगर कॅप्टन साहब इन को कुछ नहीं कहंगे तो कम से कम चोकी इंचार्ज को कॅप्टन साहब हटा सकते है ….अरे मिडिया वालो अगर कॅप्टन साहब ने मिडिया वालो की इतनी भी नहीं मानी तो बेकार है कॅप्टन साहब के पास जाकर बेठना …..कही और बेठो जाके… कोई और तो मिडिया की शर्म करेगा ………..पत्रकार बंधू

  3. AMIT KUMAR

    March 22, 2011 at 11:11 am

    …उत्तर प्रदेश में एसा पहली बार नहीं हुआ है …इस से पहले भी कई बार इस प्रकार से पुलिस पत्रकारों के साथ उत्पीडन करती है …….गाज़ियाबाद के एस एस पी वसे तो मिडिया के सहारे ही टी वी और अखबारों में बने रहते है ..लेकिन जब कोई पुलिस वाला ही इन पत्रकारों के साथ उत्पीडन करते है तो जानब के पास मिलने का समय नहीं होता है कॅप्टन साहब अगर मिडिया के सहारे ही आप इतने दिन तक गाज़ियाबाद में बने रह सकते हो तो मिडिया के लोगो की भी परेशानी सुन लिया करो रही बात विजय नगर एस सो की तो जनाब वो तो कॅप्टन साहब के ही करीबी है . कॅप्टन साहब की मेरबनी के चलते ही तो उनको विजय नगर का चार्ज मिला है . अगर कॅप्टन साहब इन को कुछ नहीं कहंगे तो कम से कम चोकी इंचार्ज को कॅप्टन साहब हटा सकते है ….अरे मिडिया वालो अगर कॅप्टन साहब ने मिडिया वालो की इतनी भी नहीं मानी तो बेकार है कॅप्टन साहब के पास जाकर बेठना …..कही और बेठो जाके… कोई और तो मिडिया की शर्म करेगा ………..पत्रकार बंधू

  4. rahul

    March 22, 2011 at 11:45 am

    कही ये पुलिस वाला…..बच्चियो का सीरिअल बल्त्कारी तो नहीं…… ? इस की उच्च स्तरी जाच होनी चाहिये …..! राहुल

  5. sahil pervez

    March 22, 2011 at 12:10 pm

    .जनाब ये कोई पहली बार नहीं हुआ है. इस बार पत्रकार के साथ हुआ तो लोगो में भी हिम्मत आई की पुलिस वाले कुछ भी करते रहे लेकिन कोई कुछ नहीं बोलता …जानब होली वाले दिन पुलिस के ऊपर जायदा दबाब होता है …की सभी की होली ठीक प्रकार से बन जय ..कही कोई हंगामा ने हो और कोई शराब के नसे में हुदंग न मच्च्ये …और उसी दिन गाज़ियाबाद के कवी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला इलाका आर डी सी में पुलिस वालो ने ही जमकर शराब का सेवन किया और हंगामा भी किया ..लेकिन आला अधिकारी को मालूम होने के बाद भी हंगामा करने वाले पुलिस कर्मी के ऊपर किसी ने कोई कारवाही करना उचित नहीं समझा …लेकिन वियज नगर में पत्रकार के ऊपर पुलिस वालो ने जमकर लाठी बंजी….अब तो एस एस पी साहब को अपने पुलिस कर्मियों के ऊपर कार्यवाही करनी चाहिए …..जब आज कुछ पत्रकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कॅप्टन साहब के पास पहुचे …इस से पहले ही कॅप्टन साहब लाखनाऊ के लिए निकल गए …..अगर कॅप्टन साहब ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो …सभी पत्रकार बंधू प्रदेश के ADJ और DGP को पूरी घटना से अवगत करंगे …….
    साहिल परवेज ( कैमरामेन)

  6. anuj tyagi

    March 22, 2011 at 1:08 pm

    खबर पड़ने वाले सभी पत्रकार बंधुओ को नमस्कार …. मिडिया आज एक ऐसा आइना है जोकि लोगो में समझ और जुजारू पन ला सकता है ….लेकिन जब ये मालूम हुआ की गाज़ियाबाद में एक पत्रकार के साथ इस प्रकार से पुलिस वालो ने ही पिटाई की है ….तो आज मिडिया में होने के बाद मुझे शर्म आती है….अपने ही भाइयो पर जोकि अधिकारी के सामने ही एक दुसरे की टांक खीचते है ….जी है गाज़ियाबाद में कुछ पत्रकार तो पड़े लिखे है …कुछ अपने सोक की वझे से पत्रकार बने है….लेकिन मुझे इस बात से कोई परेशानी नहीं है ..बात तो ये है की अगर आप ही कही जा रहे है और कोई पुलिस वाला आप को पत्रकार जानते हुए भी अंजन बने और किसी बात से आप के साथ और आपके परिवार के साथ बतमीजी कर दे …और अगर अपने इस बात का विरोध की और आपकी पिटाई कर दे आप उस समय किया कर लोगे …..केवल उस पुलिस वाले के ऊपर चिलाते रहोगे…और वो आपकी बेज्जती करता रहेगा | अगर आज सभी पत्रकार बंधू एक नहीं हुए तो आने वाले समय में पुलिस वाले इसी प्रकार से पत्रकारों के साथ उत्पीडन करते रहंगे ….और साथ ही में ये भी जनता हु की जो पत्रकार अपने सोक की वझे से इस फिल्ड में आये है ….उस पत्रकार को ये नहीं मालूम की एक पुलिस कर्मी और होम गार्ड में किया अंतर होता है …जी हा एक दिन जो की अपने आप को एक टी वी का पत्रकार बताता है और आये दिन विजय नगर इलाके में अपना रोब जताता रहता है ….वो एक होम गार्ड से बतमीजी करते हुए उसकी वर्दी उतरवाने की धमकी दे रहा था….तो मै ऐसे पत्रकरों से भी बचने की सलहा देता हु …..पत्रकार बंधू आप लोग वो hi करे जो आपका दिल कहे …..लेकिन चोरो से बचने की जरूरत है …नहीं तो आपके साथ भी इस प्रकार की कहानी बन सकती है (युवा पत्रकार , गाज़ियाबाद )

  7. Rajvir Singh

    March 24, 2011 at 9:23 am

    गर हम अपने आप को पत्रकार कहते है और सच लिखने की बात करते है तो क्यों नहीं लिखा किसी ने क्या सभी का जमीर मर गया है ये ही करना है तो छोड़ देनी चाहिए हमे पत्रकारिता और कुछ और काम देखना चाहिए जनता हम पर पुलिस से भी ज्यादा विशवास करती है और हम उसी जनता का साथ नहीं दे रहे सोचो आप ये एक के साथ हुआ है अभी कल आप भी हो सकते है और जब कल कोई आप के साथ नहीं होगा तब आप को लगेगा की आप को समय रहते ही मिलके कार्यवाही करते तो आज आप को ये सब नहीं झेलना नहीं पड़ता इस मामले मे हम सब को एक होकर कप्तान साहब से मिलना चाहिए और इस मामले मे कार्यवाही करने के लिए बोलना चाहिए कहते है न अभी नहीं तो कभी नहीं गाजियाबाद

  8. Rajvir Singh

    March 24, 2011 at 10:41 am

    गर हम अपने आप को पत्रकार कहते है और सच लिखने की बात करते है तो क्यों नहीं लिखा किसी ने क्या सभी का जमीर मर गया है ये ही करना है तो छोड़ देनी चाहिए हमे पत्रकारिता और कुछ और काम देखना चाहिए जनता हम पर पुलिस से भी ज्यादा विशवास करती है और हम उसी जनता का साथ नहीं दे रहे सोचो आप ये एक के साथ हुआ है अभी कल आप भी हो सकते है और जब कल कोई आप के साथ नहीं होगा तब आप को लगेगा की आप को समय रहते ही मिलके कार्यवाही करते तो आज आप को ये सब नहीं झेलना नहीं पड़ता इस मामले मे हम सब को एक होकर कप्तान साहब से मिलना चाहिए और इस मामले मे कार्यवाही करने के लिए बोलना चाहिए कहते है न अभी नहीं तो कभी नहीं गाजियाबाद राजवीर

  9. RAVINDER SINGH

    May 5, 2011 at 6:37 am

    [b]jab tak patarkaro me eakta nahi hogi tab tak patarkaro par eshe hi julm hota rahega [/b]gahziabad me patrkar eakele eakele rahate hai koi sanghgthan nahi hai ye sab ushi ka labh utha rahe hai

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