दो टके के नेता राज ठाकरे से डरना छोड़ दें

आलोक रंजनकिसी ने कहा है कि मौन धारण करना किसी विवाद से बचने का अच्छा समाधान होता है. इसीलिए चुप ही रहता हूं. लेकिन एक खबर ने बोलने पर मजबूर कर दिया. सुबह उठकर किसी न्यूज चैनल को ट्यून किया तो देखा ब्रेकिंग चल रही है. करण जौहर ने माफी मांगी. राज ठाकरे से माफी मांगी. फिल्म से बांबे शब्द हटाया जाएगा. अरे मैं करण जौहर से पूछता हूं कि क्या उनकी गैरत मर गयी है. क्या उन्हें ये लगा कि राज ठाकरे ने फिल्म में बांबे शब्द इस्तेमाल किए जाने पर जो विरोध किया, उससे उनका नुकसान हो जाएगा. अरे कोई करण जौहर को समझाओ कि दो टके के नेता राज ठाकरे से लोग डरना छोड़ दें. मराठी मानुष की बात करता है राज ठाकरे और उन्हीं मराठी मानुष के कंधे पर रखकर स्वार्थ की बंदूक चलाता है.

अरे काहे का मुंबई और काहे का बांबे.  जिस शहर को लोगों ने पांच दशकों से भी ज्यादा बांबे कहकर पुकारा उस शहर के लोग क्या इतनी जल्दी उसे भुला देंगे. क्या बांबे उनकी ज़ुबान से उतर जाएगा. अरे राज ठाकरे कभी अपना नाम बदलकर देखें.  क्या उनके मां-बाप उनके घरवाले नए नाम को याद रख पाएंगे. नहीं. मेरा दावा है कि वो उन्हें तब भी राज कहकर ही बुलाएंगे. अरे इतनी खुरक चढ़ी है राज ठाकरे को तो हाईकोर्ट का नाम क्यों नहीं बदलवा देते. बांबे हाईकोर्ट को करवा दें मुंबई हाईकोर्ट. क्यों नहीं इसके लिए उनकी गली-मोहल्ले की पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के लोग आंदोलन करते हैं. पार्टी का नाम रखा है महाराष्ट्र नव निर्माण सेना लेकिन काम हैं बंटवारे का. गुंडई का. डराने का. मराठा शान की झूठी तस्वीर पेश करने का. अरे मराठा छत्रप शिवाजी महाराज क्या सिर्फ मराठों के लिए लड़े. अरे वो तो पूरे देश के लिए लड़े. अभी सुबह सीएनएन-आईबीएन पर राज ठाकरे राजदीप सरदेसाई के सवालों का जवाब दे रहे थें. देखकर और सुनकर बड़ा दुख हुआ कि राज ठाकरे हिंदी में पूछे गए सवालों का जवाब मराठी में दे रहे थे.

अरे राज ठाकरे साहब क्या हिंदुस्तान आपका नहीं है. क्या राष्ट्रभाषा हिंदी आपकी भाषा नहीं है. अरे जब आपने ये प्रण कर ही लिया है कि आप हिंदी में बोलेंगे ही नहीं तो जनाब बंटवारे की राजनीति का ये तो सबसे पहला आधार आपने ही रखा है. आपने ही अपने आपको सबसे अलग कर लिया है. अरे साहब भाषा और क्षेत्र किसी की निजी संपत्ति नहीं होते. और आपने जो हिंदी नहीं बोलने का प्रण लेकर अपने मराठी भाईयों को जो कुछ भी दिखाने की कोशिश की है. वो सिर्फ और सिर्फ आपकी नीचता है. आपका अपना स्वार्थ है. मैं पूछता हूं क्या किया आपने अपने मराठी भाईयों के लिए. मुंबई पर हमला होता है तब तो आप और आपके चंपू नज़र नहीं आते. कहां थे आप उस वक्त. क्या आतंकवादियों ने ये देखकर लोगों को मारा था कि वो मराठी हैं कि बिहारी है कि उत्तर भारतीय हैं. राज ठाकरे साहब ना तो मुंबई आपकी है. ना महाराष्ट्र आपका है और ना ही ये देश आपका है.  मुंबई, महाराष्ट्र, हिंदुस्तान हमारा है. और आप जैसे दो टके के नेताओं में इतनी ताकत नहीं कि वो हिंदुस्तानियों को क्षेत्रवाद के नाम पर बांट सके. सुधर जाइए नहीं तो किसी दिन ऐसा ना हो जाए कि आपको ही महाराष्ट्र तो क्या हिंदुस्तान से ही बाहर खदेड़ दिया जाए.

चलते-चलते मैं ये भी कह दूं कि ये ना समझा जाए कि मैं बिहारी हूं तभी राज ठाकरे के खिलाफ इतना बोल रहा हूं. मैं हिंदुस्तानी हूं. हिंदुस्तान हमारा घर है. और मैं दावे के साथ कहता हूं कि अगर किसी ने हमारे घर को बांटने की कोशिश की तो यहां रहने वाले उसे उसका जवाब देंगे. तब वो ये नहीं देखेंगे कि वो मराठी हैं, गुजराती हैं, बिहारी हैं या फिर पंजाबी हैं. वैसे कहना तो बहुत कुछ था. लेकिन अपनी मर्यादाओं का ख्याल है मुझे. इसलिए एक बार फिर चुप हो जाता हूं. लेकिन याद रखिएगा. जब भी बोलने का मौका आएगा चुप नहीं रहूंगा…


आलोक रंजन के ब्लाग मैं तो जी चुप ही रहता हूं से साभार

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