पत्रिका के सर्कुलेशन मैनेजर बने लोकेन्‍द्र

: ब्रजेश ने अमर उजाला छोड़ा, मनीष व आलोक की नई पारी : लोकेन्‍द्र जैन ने दैनिक भास्‍कर, इंदौर से इस्‍तीफा दे दिया है. लोकेन्‍द्र का स्‍थानांतरण रायपुर के लिए कर दिया गया था. जिसके चलते उन्‍होंने भास्‍कर को अलविदा कह दिया. लोकेन्‍द्र ने अपने नई पारी की शुरुआत पत्रिका, इंदौर के साथ शुरू की है. वे पत्रिका से सर्कुलेशन मैनेजर बनाए गये हैं.

जमूरे! हां उस्ताद, एक चैनल खोलना है रे!

[caption id="attachment_18121" align="alignleft" width="66"]आलोक रंजनआलोक रंजन[/caption]: मदारी का डांडिया न्यूज़ : आज फिर सोचा कुछ तो कहूं… काफी दिनों से चुप बैठा था… जो कहानी आप पढ़ने जा रहे हैं… उसके बारे में पहले ही घोषणा कर दूं.. कि इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से संबंध नहीं है… इसके सभी पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं… अगर कुछ भी समानता होती है तो उसे एक संयोग मात्र ही माना जाए…

दो टके के नेता राज ठाकरे से डरना छोड़ दें

आलोक रंजनकिसी ने कहा है कि मौन धारण करना किसी विवाद से बचने का अच्छा समाधान होता है. इसीलिए चुप ही रहता हूं. लेकिन एक खबर ने बोलने पर मजबूर कर दिया. सुबह उठकर किसी न्यूज चैनल को ट्यून किया तो देखा ब्रेकिंग चल रही है. करण जौहर ने माफी मांगी. राज ठाकरे से माफी मांगी. फिल्म से बांबे शब्द हटाया जाएगा. अरे मैं करण जौहर से पूछता हूं कि क्या उनकी गैरत मर गयी है. क्या उन्हें ये लगा कि राज ठाकरे ने फिल्म में बांबे शब्द इस्तेमाल किए जाने पर जो विरोध किया, उससे उनका नुकसान हो जाएगा. अरे कोई करण जौहर को समझाओ कि दो टके के नेता राज ठाकरे से लोग डरना छोड़ दें. मराठी मानुष की बात करता है राज ठाकरे और उन्हीं मराठी मानुष के कंधे पर रखकर स्वार्थ की बंदूक चलाता है.

जब एक मौत देखी तो चुप ना रहा गया

आलोक रंजनकाफी दिनों से मैं चुप था… कुछ नौकरी की व्यस्तता तो कुछ परिवार की.. लेकिन आज जब एक मौत देखी तो चुप ना रहा गया… मौत वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज चैनल की… चैनल जब खुला था बेहद शोर था… आज जब मर भी रहा है तो उसी शोर के बीच… सवाल ये नहीं है कि दो लोगों की आपसी लड़ाई में वॉयस ऑफ इंडिया की मौत हो गयी.. सवाल ये है कि इस पूरे वाकये के बाद टीवी जर्नालिज्म की जो किरकिरी हुई है.. उसकी भरपाई कौन करेगा… पांच सौ लोग जो बेरोज़गार हुए हैं उनकी रोज़ी रोटी कैसे चलेगी… जो लोग अपना घर छोड़कर इस अपनी कही जाने वाली परायी दिल्ली में आए वो अब किधर जाएंगे… अमित सिन्हा और मधुर मित्तल के अकाउंट में तो पैसे हैं उन्हें अपनी ईएमआई भरने के लिए सैलेरी का इंतज़ार नहीं करना पड़ता… चैनल नहीं चला तो कोई और धंधा सही…