सीएनईबी और राहुल देव का कसूर

वाराणसी के एक प्रोफेसर ने दिल्ली के टीवी चैनल सीएनईबी और इसके प्रधान संपादक राहुल देव के खिलाफ ब्लैक मेल करने का आरोप लगाया है। अदालत शिकायत की जांच कर रही है और अगर जांच में कोई तत्व पाया गया तो ही राहुल देव और चैनल पर चोर गुरु नाम का धारावाहिक शोध रिपोर्टिंग वाला कार्यक्रम बनाने वाले उनके साथियों संजय देव और कृष्ण मोहन सिंह को तलब किया जाएगा।

सीएनईबी की शोध दरअसल भारतीय शिक्षा जगत में शोध के नाम पर हो रही प्रचंड धोखाधड़ी के खिलाफ अभियान के तौर पर चल रही है मगर मीडिया में विस्फोट करने का दावा करने वाले भाई लोगों का कहना है कि ब्लैकमेलिंग की शिकायत के बाद चैनल के संचालकों ने यह शो बंद करवा दिया हैं। पहली बात तो यह कि यह शो बंद नहीं हुआ है। दूसरी बात यह कि ब्लैकमेलिंग की कोई भी शिकायत देश के किसी भी पुलिस थाने में सीएनईबी या इसके किसी पत्रकार के खिलाफ दर्ज नहीं की गई है। उल्टे चोर गुरु में जो पीएचडी के नाम पर चोरी के खेल बताए गए हैं उनके आधार पर कई विश्वविद्यालयों में जांच शुरू हो चुकी है। इन चोर गुरुओं को नोटिस दिए गए हैं और जवाब मांगा गया है।

पीएचडी और नई किताबों के नाम पर हो रही यह चोरी शर्मनाक भी है और भारतीय शिक्षा व्यवस्था को जड़ से उखाड़ने वाली भी। जब तक यह शो सामने नहीं आया था तब तक कोई नहीं जानता था कि इस देश में ऐसे ऐसे प्रतिभाशाली प्रोफेसर मौजूद हैं जो एक साल में छह छह किताबें अंग्रेजी में लिख सकते हैं और भले ही खुद अपने नाम से एक आवेदन भी शुद्व अंग्रेजी में नहीं लिख सकते हो मगर मोटी मोटी किताबें उनके नाम से छपी हुई हैं और विश्वविद्यालयों में खरीदी गई है।

चोर गुरु पीएचडी के नाम पर होने वाली सरेआम चोरी का पर्दाफाश करने की एक सोची समझी मुहिम है और आसान नहीं है। इन चोरो की किताब ले कर इंटरनेट पर बैठना पड़ता है, उनमें से वाक्य और पैरे सर्च कर के उनके मूल स्रोत का पता लगाना होता है और जब सबूत काफी जमा हो जाते हैं तो न सिर्फ टीवी पर दिखाए जाते हैं बल्कि संबंधित विश्वविद्यालयों को विधिवत इसकी जानकारी दी जाती है।

वाराणसी में कोई अनिल उपाध्याय है जिन्होंने सीएनईबी पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। ये उपाध्याय साहब और वाराणसी के ही भूतपूर्व पत्रकार और अब प्रोफेसर राम मोहन पाठक की कृपा से दुनिया के अकेले हिंदी विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष के तौर पर लगभग लाख रुपए महीने का वेतन पाने वाले एक अनिल अंकित नाम के सज्जन हैं जो सरेआम चोरी यानी बौद्विक संपदा की लूट के अभियुक्त हैं।

राम मोहन पाठक पर इल्जाम है कि उन्होंने नौकरी के लिए अपने जीवन परिचय में गलत और बढ़ा चढ़ा कर जानकारियां दीं। उन पर मूर्ति चोरी का भी आरोप है। अनिल उपाध्याय का अतीत भी बहुत उज्जवल नहीं हैं और उसके प्रमाण सीएनईबी में उपलब्ध है। इन सब भाई लोगों से उनका पक्ष जानने के लिए चैनल ने संपर्क किया था। कई तो सामने नहीं आए और अनिल अंकित ने तो वर्धा में गई टीवी चैनल की टीम को अपने छात्रों से पिटवाने तक की धमकी दे डाली। क्या अनिल उपाध्याय सबूताें के सामने एक पल भी खड़े रह पाएंगे?

वे विदेशी किताबें मौजूद हैं जिनमें कॉमा तक बदले बगैर सीधे अपने नाम से उनकी सामग्री इस्तेमाल कर ली गई है। प्रचंड मूर्खता तो यह है कि शोध हुई यूरोप के किसी देश में और उसे भारत के संदर्भ में बगैर जगहों, संस्थाओं और नामों को बदले सीधे सीधे चिपका दिया गया। एक एक चीज का सबूत है। विस्फोट करने वालों को पता नहीं कहां से यह सुपर खबर मिली है कि चैनल के मालिकों ने इस कार्यक्रम का प्रसारण बंद करवा दिया है। कार्यक्रम बन रहा है, शोध हो रही है और जितने चोर गुरुओं का हो सकता है, कबाड़ा किया जाएगा क्योंकि वे हमारी शिक्षा व्यवस्था का कबाड़ा कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस के बड़े अधिकारी रहे साहित्यकार विभूति नारायण राय अनिल अंकित को नियुक्त करने वाले व्यक्ति हैं। आज से तीन महीने पहले उन्होंने फोन किया था कि आप लोग जो यह दिखा रहे हैं इसके बारे में एक पैरा का सबूत दे दीजिए, मैं दोषी को एक मिनट में बाहर कर दूंगा। उन्हें बाइज्जत चैनल में बुलाया गया, कहा गया कि आप आ कर खुद पूरी शोध और टेप देख लीजिए। वे तैयार भी हो गए। उन्होंने प्रधान संपादक राहुल देव से बात भी कर ली मगर चैनल नहीं पहुंचे।

अब जब बहुत दबाव पड़ा तो अंकित की शोध की जांच करने के लिए उन्होंने एक सदस्यीय जांच कमेटी बनाई और उसके लिए भी वाराणसी से प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह कुशवाह को नियुक्त किया और आदेश में यह कही नहीं कहा गया कि जांच कितने समय में पूरी करनी है। हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा शायद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नहीं, भारतीय दंड विधान के आधार पर चलता है।

अनिल अंकित का इंटरव्यू ले कर उसे प्रोफेसर बनाने वाले पैनल में राम मोहन पाठक भी थे जिन पर खुद नकली पीएचडी लिखने, फर्जी कागज बना कर मंदिर की जमीन हड़प करने और काशी विद्यापीठ में किताबों की खरीद में लाखों रुपए का घोटाला करने का आरोप है। आश्चर्य नहीं कि ब्लैकमेलिंग का आरोप भी वाराणसी से आया है। जिस एक और चौर गुरु प्रेम चंद्र पातंजलि ने पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर में कुलपति रहने के दौरान अनिल अंकित को पहले ठेके पर पढ़ाने का काम दिया और फिर पत्रकारिता विभाग का प्रमुख बना दिया। उन्हें इसी हिंदी विश्वविद्यालय के अदृश्य दिल्ली केंद्र में मोटे वेतन पर ओएसडी बनाया गया।

बाद में जब मानव संसाधन मंत्रालय में शिकायत हुई तो पातंजलि की नौकरी चली गई। अंकित की जांच करने वाले सुरेंद्र सिंह कुशवाह जब काशी विद्यापीठ के कुलपति थे तो इन्हीं पातंजलि को बार बार विशेषज्ञ के तौर पर बुलाते थे। उस समय अनिल उपाध्याय पत्रकारिता विभाग के प्रमुख थे और काशी विद्यापीठ शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी। इस पूरे घपले का वाराणसी कनेक्शन साफ नजर आ रहा है और पूरे जीवन पुलिस में रह कर कानून की रक्षा करने वाले विभूति नारायण राय शायद अंकित के प्रेम में इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें सामने रखे सबूत नजर नहीं आते और जांच कमेटी बैठानी पड़ती है।

एक और प्रोफेसर अनिल चमड़िया पर इस तरह का कोई आरोप नहीं था और उनकी एक सजग सामाजिक बुद्विजीवी के तौर पर ख्याति भी है, मगर उन्हें हड़बड़ी में बुलाई गई एक बैठक जिसमें ज्यादातर सदस्य गैर हाजिर थे, के बाद बर्खास्त कर दिया गया। सीएनईबी को कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारी मुहिम जारी है और लड़ाई इस पार और उस पार की है। यह लड़ाई समाज के पक्ष में हैं।

लेखक आलोक तोमर वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Comments on “सीएनईबी और राहुल देव का कसूर

  • kamta prasad says:

    असल में जिसे हम मौलिक कहते हैं वह भी विभिन्‍न प्रभावों का मिश्रण होता है, साहित्‍यिक चोरी जैसी कोई चीज होती है ऐसा सतीश पेडणेकर नहीं मानते, और मेरी भी उनसे सहमति बनती है।

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  • suresh bishnoi says:

    media ka kam hi ye hai ki vo samaj ki gandki saf kare…..sabhi news channels ko es tarah k project per bade level per jut jana chahiye….bsarte lakshya pavitra ho. education hi nahi, dusare feild main bhi es tarah k chor bhari sankya main melenge.
    lage raho. chor to shor machayenge hi.

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  • tomar tum jaise log Pof. Ram Mohan Pathak ke bare me likhe ye shobha nahi deta. tumhari auqat kya hai? apne vartman aaka aur mahan patrkar rahul dev se nahu puchhate ki vo kyo kai bar pathak ji se anil upadhyay ko case wapes lene ke liye samjhane ko gidgida rahe hain. tum sab thakurwad chala rahe ho. usi vidyapith ke sabse bade chor om prakash sigh ke khilaf likhne me tumhare ang vishesh ka prasfutan hone lagta hai. bade bhari sidhanrwadi patrkarita kar rahe ho to o p singh ke khillf bhi logo ko kuchh batao. aisa nahi karoge. tum ko sharm nahi aayi sattachakra blog ke madhyam se makhanlal chaturvedi patrakarita vishwavidyalay bhopal ke kulpati banane ke liye lobying karte huye. kabhi apne shakl dekhe ho. Pathak ji ke bare me tum jaiso aur Rahul dev kya bolenge/ abhi to Rahul ji apni jamanat ka intejam karaye. abhi to kai jilo se samman jari hone wala hai.

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  • Rinkoo,
    Apnee aouqat ke baare men apan ko koi mugaltaa naheen hai. AApkaa nam pahlee baar suna hai. AAp itne apne pan se too-tadak kkar rahe hain to apne ko bhee kahnaa hoga ki teree @#$% men dam hai to aslee naam pataa bataa.

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  • Rinkoo bhai ki …
    Bhaiya ye kya..itni aamariyadit bhasha..mana bhadas per log bhadash hi nikalte hain..lekin aapne to had ker di….aukat poonchne lage….are bhai koi chor guru hai ya nahin ab to iska faisla aadalat mein hona hai….aap kahe to sattu uthaye goom rahe ho…baqi raha mamle ki to yahan to bin baat ke log case thokne ko ghoom rahe hain…anil ji ke bare mein to khabar chali hai…alok ji ne wahi likha jo ek patrakar likhta rahta hai…isme aukat batane wali ky baat aayi…rahi baat ki CNEB ne uska khulasha nahin kiya ya falane ka khulasha nahin kiya ….to bhai aache bharti ki tarah chor guru ki team ko phone karo…lekin aamariyadit bhasha se bachiye…nahin to @#$% ka matlab alok ji se phone per poonch lo….pranam

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  • Mr. Tomar
    plz dont use newton’s third rule in practical life. especially in written form on any website as a comment.its my humble request to u. mind your language and don’t try to cross the limit of morality.becoz u r a so called senior journalist and we hope that u will act according to your reputation otherwise people will give u the same treatment which u have given to Mr. rinkoo.anyway for your information rinkoo is presently working with cneb. any doubt or any question? thanks

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  • वर्धा में गई टीवी चैनल की टीम को USKI GALAT HARKATO KI WAJAH SE COMRED LAL SALAM KI TEAM NE STATION PER BURI TARIKE SE PITA THA.YE KHABAR BHI WARDHA MEIN CHAPI THI.

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  • RINKOO SINGH JEE
    Bhadas per aap ka comments padaha…baray gussail sawbhav ke lagtay hain janab…waisay aap jo bhi hoon…aap ke baaton say ye lagta hai ke aap ke chor guryo se kafi taluqat hain…phalan ke baray mai CNEB nai dikhaya, phalan ke baray mai kyon nahi dekhaya…to janab mera to aap ko sujhav hai ke nek neyati say aap CNEB ke CHOR GURU ke team joine kar le… ganga snan ke punya bhi mile ga aur desh seva bhi ho jayege, aur CNEB ko chor guryo ke khilaf ek aacha sutra bhi mil jayega…sujhav per sochiyea ga zaroor…..

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  • sandeep yash says:

    saamne aaiye agar kisi ke khilaaf saboot hai…aapaa mat khoiye..ye kaam to koi bhi kar sakta hai…alok ji ne jo kuch bhi likha hai..agar uski tarkik aur tathyatmak kaat ho to vo hume bataiye…CNEB sahi kaam kar rahi hai…shiksha ke chor guruon ko expose karke…har jagah yahi aalam hai…kahin to shuruaat karni hi thi… itne channel hain..par pehal Shredhey Rahul ji ne ki,,,aisi shakhsiyaton ko aapke certificate ki bilkul zaroorat nahi…albattaa apke sthan vishesh mein hua visfot batata hai ki teer nishaane par lagaa hai…AUR HAAN …VAKAYEE JO PATRAKAAR HAIN UNHEIN COURT KA DAR DIKHANE KI HIMAAKAT KABHI NA KARNA…HAMARI BIRAADARI JAB KISI MUDDE PAR PHAAT PADTI HAI..TO DESH KI SARKAAREIN NIBAT JAATI HAIN….HUM JANTA KE COURT MEIN ROZ HAZARI DETE HAIN….AGAR KUCH KARNA CHATE HO TO IN CHHOTTON KO JAIL BHEJNE KI MUHIM MEIN SAATH AAO..HAMAARA NISHAANA HAR CHOR PAR HAI..AGAR KISI KO CHOR JAANTE HO TO SABOOT CNEB KE OFFICE AAO AUR ALOK JI SE MILO…AUKAAT TAB BANEGI TUMHARI…ABHI TO TUM GALI KE ……

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  • Bhaiya Tomar ji maan gaye aap ko bhi aap bhi choro ka sath de rahe hai. Dono bhaiyo ne milkar CNEB ko loot liya hai. Rahul ji ka asli roop ab samne aaya hai.

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  • आलोक तोमर जी जब आप खुद को पत्रकार कहते हैं तो अपनी भाषा पर तो नियंत्रण रखो, क्योंकि जो भाषा तुमने रिंकू सिंह के लिए प्रयोग किए हैं , वह न केवल तुम्हारे खोखलेपन बल्कि तुम्हें मिले हुए पारिवारिक संस्कार को भी इंगित करता है . तुम्हारी भाषा शैली से तो लगता है कि शायद तुम भी चोर-उचक्कों और ब्लैकमेलरों की जमात से ही संबध रखते हो?

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  • Mr. Prithvinath,
    I dont know any Rinkoo, working in CNEB. if he is working with us, I invite him to have one one to one talk. And Pls. do not misquote Newton out of context. If some one abuses me I trash him back. That is Enstein’s theory of gravity. Any doubt?

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  • CNEB aur uske aaka ka jyada gungan mat kar bhai. cned ki real chemistry puri duniya ko pata hai.mudde ki baat ye hai ki cneb ne jaldibazi mein jo kutch dikhaya hai (sahi ya galat) uska result court bahut jaldi sunayega. alok tomar ho ya rahul ya unka chotta bhai. sabki ki haqiqat jald hi jamane ki samne aa jayegi. isliye rinkoo jee aur sandeep aap dono himmat se kam le aur alok tomar ko apni bhadas nikalene ka pura mauka de.

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  • kuldeep srivastava says:

    aksar ye hota hai k jiske daman me daag lagta hai… aur uski niyat saaf nahi hai to wo plagal ho jata hai… amaryadit ho jata hai… chor guru ki team Aur rahul dev k khilaf bhadakne walo ka bhi yahi hall hai… dusro ko sahi galat ka path padhane walo par aaj jab chori ka aarop lag raha hai to khud hi galat raste par ja rahe hai… ‘kalam k sipahi the, banduk kankh me dabai the’ aur ye rinku shaks kaun hai bhala… kam se kam ek sachha kalam ka sipahi to nahi ho sakta jise kanun ke dayre me jakar galiyo ka istemal jarna bakhubi ata ho… alokji ne wahi likha… jo unhe likhna tha… sahi kya hai galat kya… ye faisla karne ka adhikar na hi alok ji ko hai aur na hi rinku aur unke tathakatht gurwo ko… rahul dev n team ne sachai samne lane ki koshis ki hai, ab ye sahi hai ya galat ye desh ka kanun faisla karega rinku jaisa anjan admi nahi jise baat karne ki tamiz nahi hai…

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  • kuldeep srivastava says:

    maine title he laga diya hai us anjan rinku aur uske tathakathit sammanit gurwo k liye k sach ka samna karo sachhai se…. dhamki se nahi…. amaryadit shabdo se nahi… nahi to log yahi kahenge k chor ki dadho me tinka…. aur ye bhala rinku kuan mahashaya hai… jinhone akele he cneb chor guru ki team aur rahul dev ke khilaf gali dene ka theka le rakha hai… nihayat abhadra admi hoga rinku patrkar to nahi ho sakta… jisne alok tomar ke khilaf gali ka istemal kiya hai… rinku aur unke sammanit gruwo ko dekhkar to yahi kahne ka man karta hai ki ‘kahne ko kalam ke sipahi hai, kankh me chura dabai hai’ kanun me rahkar baat ho to zyada achha hai… warna hum to kalam ke sipahi hai. har galat kaam par kalam chalate rahenge,,, gali de koi to deta rahe… hum apne aapko hathi aur samne wale ko kutta man lenge… aur 1 baat aur ye muhawra hai ‘pata nahi kaun’ rinku ko ye baat dhyan rakhni chahiye….

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  • सुजित तुम कौन हो says:

    अरे सुजित तुम कौन हो? लगता है तुम्हें भी उन्हीं ब्लैकमेलरों में से हो या फिर चमड़िया जी ने तुम जैसे दुम हिलाते कुत्ते के आगे हड्डी की कुछ बोटियां फेंक दी है?

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  • mere khayal se yaha par khabar ki pratikriya se zyada vyktigat dosharopn ho rahe hai jo thik nai hai.akhbar me news channel me kai bar khane khilane ki baate uthti hai to fir rahul ji par aisa dosharopn thik nai hai.aapas me bhi sayyamit shabdo ka prayog kare to behtar hai.thik hai agar unhone bahut sare paise khaye fir bhi hum log kaun hote hai unko baate kehne vale agar itne imandar hai to khud ko dekhe kaam se kaam apke samne beimaan aakhe nichi karke baat karega yahi imandar ka sabse bada samman hai.mai vyavsayik rahul ji ko to nai janti lekin ek insaan ke taur par vah bahut achhe hai.itna kafi nai hai kya.plz aapas me jhagda na kare. agar ek pksh ko dusre paksh ke lekhn me kuch galat lag raha hai to apne comment se usko sudhar de ya yu kahe ki shalinta banaye rakkhe ye netaoo ka manch nahi hai bandhu.

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  • praveen Nagar says:

    Respected sir,
    Chorguru is eye opner programe for leadership of education as well as for chancellor of Universites. In journalism dept. of DAVV Indore. There is chorguru named Mr. Mansing parmar. He was a stil photographer & became HOD in Journalism, after publishing a book by his name. Even he cannot write a press relese properly. Kindly digout a story opan him.

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