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क्या इरर-फ्री अखबार संभव है?

: अमर उजाला, लखनऊ में शांत नहीं हो रहा बवाल : अमर उजाला, लखनऊ में उठापटक का दौर जारी है. संपादक की डांट से दुखी एक रिपोर्टर ने मोबाइल फोन स्विच आफ कर आफिस जाना छोड़ दिया है. इससे पहले एक रिपोर्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया तो उसे अचानक बेहोशी आ गई. बताया जाता है कि स्थानीय संपादक के बेहद कड़क व्यवहार के कारण स्टाफ में रोष है. हर अखबार में खबरें छूटती हैं, गल्तियां होती हैं, क्योंकि हर जगह अभी तक काम मनुष्य ही करते हैं.

<p style="text-align: justify;">: <strong>अमर उजाला, लखनऊ में शांत नहीं हो रहा बवाल</strong> : अमर उजाला, लखनऊ में उठापटक का दौर जारी है. संपादक की डांट से दुखी एक रिपोर्टर ने मोबाइल फोन स्विच आफ कर आफिस जाना छोड़ दिया है. इससे पहले एक रिपोर्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया तो उसे अचानक बेहोशी आ गई. बताया जाता है कि स्थानीय संपादक के बेहद कड़क व्यवहार के कारण स्टाफ में रोष है. हर अखबार में खबरें छूटती हैं, गल्तियां होती हैं, क्योंकि हर जगह अभी तक काम मनुष्य ही करते हैं.</p> <p>

: अमर उजाला, लखनऊ में शांत नहीं हो रहा बवाल : अमर उजाला, लखनऊ में उठापटक का दौर जारी है. संपादक की डांट से दुखी एक रिपोर्टर ने मोबाइल फोन स्विच आफ कर आफिस जाना छोड़ दिया है. इससे पहले एक रिपोर्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया तो उसे अचानक बेहोशी आ गई. बताया जाता है कि स्थानीय संपादक के बेहद कड़क व्यवहार के कारण स्टाफ में रोष है. हर अखबार में खबरें छूटती हैं, गल्तियां होती हैं, क्योंकि हर जगह अभी तक काम मनुष्य ही करते हैं.

लेकिन अमर उजाला, लखनऊ के स्थानीय संपादक सौ फीसदी इरर-फ्री अखबार चाहते हैं. ऐसे में जिनसे गल्ती हो रही है, उनकी शामत आ जा रही है. अब लोग कहने लगे हैं कि कहीं किसी दिन कोई आत्महत्या न कर ले या फिर तनाव में प्राण न निकल जाए. अगर ऐसा होता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? अमर उजाला प्रबंधन? या स्थानीय संपादक? या फिर दोनो??

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0 Comments

  1. sanjay ranjan

    September 9, 2010 at 7:37 pm

    error free akhbar nikalana bahut muskil hai. mera manana hai ki tanav mein kam kabhi acha hota hai to kabhi bahut bura. jahan tak hadasey ki baat hai to iskey liya sampadak aur prabandhan dono jimmeydar hai.

  2. Pankaj Sharma

    September 10, 2010 at 4:47 am

    One shouldd try to minimize errors provided moving in right direction.

    Warm Regards,
    Pankaj Sharma
    Rai Foundation

  3. nikhil

    September 10, 2010 at 6:09 am

    koi sampadak apne ko kafi kabil samajhta hai. aise sampadak bewkoof hote hain.error free akhbar kabhi ho hi nahi sakta hai. ye bat mahan sampadkaon ko samajhni chahiye.jab se akhbar nikalna shuru hua hai aur jab tk akhbar nikalta rahega, error hota hi rahega. ise koi nahi rok sakta hai.

  4. ravindra kumar

    September 10, 2010 at 6:10 am

    ek din sampadak ji se hi khabrain edit kara kar page banvaya jae agar sampadak ji lagatar 3day esa karen to unhe samajha aa jayega kaise kam hota hai news room mai. kabin main main batha kar to bane page par koi bhi galti nikal dega.

    sampadak ji. Dikhave per mat jao apni akal lagao.

  5. asok raj

    September 11, 2010 at 5:29 am

    it is becos management does not know how a journlist works. cynic and illiterate editors are main culprits.

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