राडिया के ‘राडार’ पर मीडिया के ये कलंकित चेहरे

राडिया राज 5 : त्वरित प्रतिक्रिया : एस. एन. विनोद (प्रधान संपादक, दैनिक 1857) : ”देश की सबसे बड़ी फिक्सर नीरा राडिया के ‘राडार’ पर वीर संघवी और बरखा दत्त के कलंकित चेहरे को देख गहरा आघात लगा। युवा पीढी के हजारों मीडिया कर्मियों के रोल मॉडल वीर संघवी और बरखा दत्त की दलालीय भूमिका के सार्वजनिक होने से पूरे मीडिया का दामन दागदार हो गया है। वैसे इनके कुकृत्य से बहुत आश्चर्यचकित होने की जरूरत भी नहीं। प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष पिछले दिनों ऐसी टिप्पणी कर चुके हैं कि आज की पत्रकारिता ‘वेश्यावृत्ति’ में तब्दील हो गई है। संघवी और बरखा ने यह सब सिर्फ धन अर्जित करने के लिए किया है तब उन्हें स्वयं ही तत्काल मीडिया बिरादरी से अलग हो जाना चाहिए ताकि कम संख्या में ही सही बिरादरी में मौजूद इमानदार और पत्रकारीय मूल्यों को समर्पित पत्रकार सिर उठाकर अपने पत्रकारीय दायित्व का निर्वाह कर सकें।”

 

 

आलोक तोमर (प्रधान संपादक, डेटलाइन इंडिया) : ”बरखा दत्त और वीर सांघवी दोनों का मैं लाखों लोगों की तरह अच्छा खासा प्रशंसक हूं। दोनों के साथ कई टीवी कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुका हूं लेकिन आगे मैं जो लिखने जा रहा हूं वह कलेजे पर पत्थर रख कर लिखा जा रहा है क्योंकि आयकर विभाग की फाइलें और टेलीफोन टेप का रिकॉर्ड देखने के बावजूद भरोसा नहीं होता कि बरखा और वीर सांघवी दलाल भी हो सकते हैं। नीरा राडिया नाम की सुपर दलाल पर की गई निगरानी में जो बड़े नाम सामने आए हैं उनमें बरखा और वीर दोनों है। दोनों के नाम कई बार आए हैं और कहा गया है कि सरकार बनते समय कई कॉरपोरेट घरानों के लिए इन दोनों ने कांग्रेस नेताओं के साथ सौदेबाजी में मदद की। कहानी कठिन होती जा रही है। भारत सरकार के पास उपलब्ध रिपोर्ट कहती है कि बरखा दत्ता और वीर सांघवी ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस नेताओं को प्रभावित किया और ए राजा को टेलिकॉम मिनिस्टर बनवाने में मदद की। बरखा और वीर ने यह काम बडे-बडे बिजनेस घरानों के लिए लॉबिंग करने वाली नीरा राडिया के कहने पर किया।”

Comments on “राडिया के ‘राडार’ पर मीडिया के ये कलंकित चेहरे

  • ओमप्रकाश तिवारी says:

    पत्रकारिता बन गई है जब से व्यवसाय,
    कलम बिक रही चाय पर कॉलम बोटी खाय ।
    कॉलम बोटी खाय पिए अंग्रेजी दारू,
    कभी मिशन थी आज बनी ये गाय दुधारू ।
    द्वार-द्वार पर जाय करे जो चट्टुकारिता,
    समझ लीजिए वही कर रहा पत्रकारिता ।

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  • media me seriously career banane aane wali har ladki ke liye misal thi barkh……hum bhi soochte the kargil jaise halat me kya hum barkha kii tarha reporting kar payenge…….lekin ab yeah soochna pad raha hai kya hum dalali kar payenge…….barkha ne puri patrkar biradri ka naam kharab kiya……veer sanghvi ke bare me jaan kar koi hairat nahi hui……who to nuclear deal ke time bhi congress ke liye lobbing kar chuke hai…..inke artical padle….aur ab jab deal me bharat phas gaya to inko sharam bhi nahi aati

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  • Ashwinikumar (Editor,Rashtriya swabhimaan) says:

    yah patrakarita sirf aur sirf chatukarita ki patrakarita hai.in sab chijo ke liye channel Aur Akhbaar ke malik cash collection ka target staff reporter ko dete hai jiske liye wah majbur hokar naukari bachane ke liye karta hai.nawodit patrakar samaj ke buraion ke khulase aur unki deshn ke prati seva ka bhav rahtaa hai lekin aise Bhrast patrakari ke pichhe sabhi media malikon kaa hath hai jo unko aisa karne ka mauka dete hai fir wahi rastaa us patrakar ke liye gupt dhan rashi ka rasta banjata hai .jiske liye wo koi bhi kadam uthane se nahi hichakte.
    hum sirf afsos kar sakte hai aur kuchh nahi.

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  • ye dalaali ka kaam to har jagah ho raha hai bus kuch chehre benakab ho jaate hai……….aur akhir me ye chaipter bhi dheere se close ho jayega ..samaj ko aina dikhane ka kaam karne wale logo ka chehra dagdaar hota ja raha hai.. media me bhi kranti ki zaroorat hai……

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  • Barkha Dutt ko sharm aani chahiye ki un par is tarah ka arop lag raha hai or wah seat par baith kar ptrakarita ko kalankit kar rahi hain . agar unki aankho me jara sa pani bacha hai to ve poore Bharat ke logo se mafi maange . sirf naam bada kar ptrakar ban ne se kaam nahi chalta hai madem apne karm bhi sahi hone chahiye. aapne dalali ke chakkar me patrakarita ka naam hi duba diya .

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  • kasim khan says:

    Dekho ji India me dalaal to sabhi jagah hain isme to koi shak nhi raha. aur in sbko badhawa dene wali sirf media hi hai.

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