मायावती के इशारे पर हुई थी जागरण के मालिकों से बदतमीजी

कानपुर में पिछले दिनों दैनिक जागरण के डायरेक्टरों के साथ पुलिस वालों द्वारा बदतमीजी किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है. पता चला है कि सारा खेल यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के इशारे पर हुआ. जागरण के मालिकों का समाजवादी पार्टी से प्रेम, जागरण के सीएमडी महेंद्र मोहन गुप्ता का सपा कोटे से राज्यसभा सांसद होना, मायावती के प्रति जागरण समूह का नकारात्मक भाव रखना आदि कई कारणों के चलते मायावती जागरण वालों से बहुत दिनों से खफा हैं. जागरण के लोगों को सबक सिखाने और इनकी औकात बताने के लिए मायावती सरकार के खास ब्यूरोक्रेट्स ने शीर्ष स्तर पर साजिश रची. सूत्रों का कहना है कि डीआईजी प्रेम प्रकाश ने जो कुछ किया-कराया, वह उपर के बड़े अफसरों से हरी झंडी मिलने के बाद किया. बल्कि कहा जाए तो सारा प्लाट उपर के बड़े अफसरों ने तैयार किया और इसे इंप्लीमेंट करने का काम किया डीआईजी प्रेम प्रकाश ने. इसी वजह से डीआईजी प्रेम प्रकाश का कानपुर से तबादला नहीं किया जा रहा है. वे अपने पद पर बने हुए हैं.

जागरण प्रबंधन के लोगों ने डीआईजी प्रेम प्रकाश का तबादला कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है. सूत्रों के मुताबिक ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष लोगों ने जागरण प्रबंधन को बता दिया है कि देर रात तक पार्टी कर नशेबाजी करने के बावजूद जागरण के मालिकों पर नारकोटिक्स एक्ट नहीं लगाया गया, थाने में इन लोगों के खिलाफ कोई लिखा-पढ़ी नहीं की गई, बदतमीजी करने के आरोपी इंस्पेक्टर को हटा दिया गया, लखनऊ के बड़े अफसरों ने कानपुर में जाकर जागरण के मालिकों से मुलाकात कर ली… इतना सब कुछ कर दिया गया है. अब इससे ज्यादा की उम्मीद न करें.

सूत्रों के मुताबिक सब कुछ मायावती के इशारे पर किया गया है. जो भी बड़े लोग समाजवादी पार्टी के करीबी हैं, उनको मायावती किसी न किसी तरीके से अपमानित करने की कोशिश करती रहती हैं. सपा के करीबी माने जाने वाले लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट’ के मालिक निशीथ राय का लखनऊ स्थित सरकारी आवास से सामान फिंकवाना भी मायावती सरकार की बदला लेने और विरोधी राजनीतिक पार्टी के करीबियों को सबक सिखाने की कार्यवाही थी.

उधर, दैनिक जागरण कानपुर में पुलिस वालों के खिलाफ खूब खबरें छपने लगी हैं. कहीं से भी पुलिस के खिलाफ कोई खबर निकलती है तो तुरंत उसे बड़ा बनाकर पब्लिश कर दिया जाता है. जागरण के मालिकान भी इस मामले को ठंडा पड़ने देने के मूड में नहीं है. दैनिक जागरण, लखनऊ के संपादक शेखर त्रिपाठी को प्रबंधन ने कह दिया है कि वे प्रेम प्रकाश को कानपुर के डीआईजी पद से हटाने के लिए हर स्तर से प्रयास करें. पहले यह कहा जा रहा था कि होली के बाद डीआईजी प्रेम प्रकाश का तबादला किया जा सकता है पर ऐसा नहीं हुआ. फिलहाल यह ऐसा मामला हो चुका है जिसे जागरण के मालिकान न निगल पा रहे हैं और न उगल पा रहे हैं. 

Comments on “मायावती के इशारे पर हुई थी जागरण के मालिकों से बदतमीजी

  • Rishi Naagar says:

    They (Jagran people) can be laughed at only. Pahle BJP, ab SP, ab agar BSP bhi ho gayee to kya farak padega! Lekin apne hi chakkar me fans gaye jagran waale! Bechaare!! Poor guys!!!

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  • a journalist says:

    Jagran ke director ya directors ko kisi political party ke madhyam se rajya sabha jaane ki jaroorat kya thi. Kya patrakarita ka pesha rajneeti se itna chhota ho gya hai. DarAsal in akhbar malikon ki rajneeti me ghusane ki mahatwakanchha hi patrakarita jaise pavitra peshe ko neecha dikhaati hai. Mai is baat se directors ki pitai ko justify nahi kar raha. Per malikon ko is ghatna se sabak jaroor lena chahiye ki unhe rajneeti ka daaman chhodkar patrakarita aur unke saath kaam kar rahe patrakron ko majboot karna chahiye. Tab aisi ghatnayen nahi ke barabar hongi.

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  • sir, your blog is interestin to read but there should be a strong base behind every story which i can’t understand.

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  • JAB AKHBARO KE MALIK AKHBAAR KO AKHBAAR NAA SAMAJH KAR EK “PRODUCT” KE ROOP ME ISTEMAL KARENGE TO AISA HI KUCHH HOGA. JAGRAN KE MALIKAAN PAHLE BHI KAI RAJNATIK PARTIYO SE APNI NAZDEEKIYA BANA CHUKE HAI, AUR IS BAAT KI BUBAASI JAGRAN KE MALIKANO ME KOOT-KOOT KAR BHARI HAI.. PATRAKARITA KE VIPREET JAGRAN MANAGEMENT AAJ BHI PATRAKARITA KO EK PRODUCT KE ROOP MEISTEMAL KAR RAHA HAI.

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  • आनंद says:

    अरे भाई, आखिरकार ये लोग व्यापारी ही तो हैं। कोई पत्रकार तो नहीं कि इनसे कोई सहानुभूति रखी जाए। आप लोग तो जानते ही होंगे कि कितने घमंडी औऱ स्वार्थी हैं जागरण के मालिकान। इनके लिए शोक मनाए जाने की कोई जरुरत नहीं। किसी पत्रकार के साथ कोई बात होती तो जरुर विरोध किया जाना चाहिए था। इन्हें तो इनकी करनी का फल मिला। अगर आप किसी एक राजनीतिक पार्टी के पक्ष में बैठते हैं तो दूसरे का विरोध झेलना ही पड़ेगा।

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