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‘फोकस’ टीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ गिरफ्तार

साथ काम करने वाली महिला पत्रकार ने दर्ज कराई रिपोर्ट : फोकस टीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ हरिगोविंद विश्वकर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ काम करने वाली महिला पत्रकार अक्षमा शर्मा ने उन पर मोलेस्टेशन का आरोप लगाया है। अक्षमा ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस थाने में धारा 374 और 406 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी है। एफआईआर सीआर नंबर 263 है। हरिगोविंद को मुंबई पुलिस आज कोर्ट में पेश करेगी। एफआईआर दर्ज कराने वाली अक्षमा ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजा व्यास और भड़ास4मीडिया के एडिटर को भेजे अपने पत्र में कहा है- ‘मैं पिछले 9 महीने से फोकस टीवी में एंकर कम प्रोड्यूसर पद पर काम कर रही हूं। मीडिया के क्षेत्र में मैं 4 वर्षों से हूं। लेकिन फोकस टीवी का मेरा अनुभव बड़ा दुखदाई रहा क्योंकि यहां मेरे सीनियर हरिगोविंद विश्वकर्मा मुझे मोलेस्ट करने के साथ-साथ मानसिक रूप से परेशान करते थे। इसी कारण मैंने फरवरी 2009 में इस्तीफा दे दिया था।’

साथ काम करने वाली महिला पत्रकार ने दर्ज कराई रिपोर्ट : फोकस टीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ हरिगोविंद विश्वकर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ काम करने वाली महिला पत्रकार अक्षमा शर्मा ने उन पर मोलेस्टेशन का आरोप लगाया है। अक्षमा ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस थाने में धारा 374 और 406 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी है। एफआईआर सीआर नंबर 263 है। हरिगोविंद को मुंबई पुलिस आज कोर्ट में पेश करेगी। एफआईआर दर्ज कराने वाली अक्षमा ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजा व्यास और भड़ास4मीडिया के एडिटर को भेजे अपने पत्र में कहा है- ‘मैं पिछले 9 महीने से फोकस टीवी में एंकर कम प्रोड्यूसर पद पर काम कर रही हूं। मीडिया के क्षेत्र में मैं 4 वर्षों से हूं। लेकिन फोकस टीवी का मेरा अनुभव बड़ा दुखदाई रहा क्योंकि यहां मेरे सीनियर हरिगोविंद विश्वकर्मा मुझे मोलेस्ट करने के साथ-साथ मानसिक रूप से परेशान करते थे। इसी कारण मैंने फरवरी 2009 में इस्तीफा दे दिया था।’

पत्र में अक्षमा ने आगे कहा है- ‘मैंने हरिगोविन्द की हरकतों की कंप्लेन दिल्ली आफिस में भी की, जिसकी कापी मेरे पास है। मैनेजमेंट ने मेरे काम को देखते हुए मुझे मार्च 2009 में दुबारा नौकरी पर रख लिया लेकिन हरिगोविंद अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। अपने सीनियर के लगातार गलत व्यवहार करने से परेशान होकर मैंने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। मैं आशा करती हूं कि सभी पत्रकार बंधु मेरे साथ खड़े होंगे और मेरे इस आत्मसम्मान की लड़ाई में मेरा साथ देंगे। मेरे इस कदम से कुछ लोग खासे नाराज हैं और मीडिया में मेरे खिलाफ गलत अफवाहें फैला रहे हैं। इन अफवाहों में कहा जा रहा है कि नौकरी से निकाल दिए जाने के कारण मैंने ये रिपोर्ट लिखाई है। सच्चाई ये है कि मैंने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है और ना ही कंपनी ने मुझे कोई टर्मिनेशन लेटर दिया है।’

वाकया कल का है। अक्षमा ने कल ही रिपोर्ट लिखाई और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हरिगोविंद को गिरफ्तार कर लिया। फोकस टीवी के दिल्ली आफिस से जुड़े लोग भी हरिगोविन्द के खिलाफ एफआईआर लिखाए जाने और उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि कर रहे हैं। इस बीच, मुंबई की मीडिया के कई वरिष्ठ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर भड़ास4मीडिया को बताया कि हरिगोविन्द को फंसाया गया है। हरिगोविन्द एक बड़े साजिश के शिकार हुए हैं। हरिगोविन्द सीधे-साधे, नेक व्यवहार वाले विनम्र पत्रकार हैं। वे कई मीडिया हाउसों में काम कर चुके हैं और पत्रकारिता में उनका अच्छा खासा करियर है। पिछले 20-22 वर्षों से वे जनसत्ता, कुबेर टाइम्स, वार्ता, आईटीएन जैसे मीडिया माध्यमों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। देश की प्रमुख हिंदी समाचार एजेंसी वार्ता में वे बनारस और जम्मू के ब्यूरो चीफ रहे। उन्हें अच्छी तरह से पता था कि मीडिया की किसी लड़की के साथ उसकी मर्जी के खिलाफ लगातार खराब व्यवहार करने का क्या नतीजा हो सकता था। वे ऐसी हरकत नहीं कर सकते।

हरिगोविंद को पिछले 20 वर्षों से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार निरंजन परिहार से भड़ास4मीडिया ने जब इस घटना के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि वो स्तब्ध हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि हरिगोविंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। निरंजन के मुताबिक टीवी में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह के नए लोग आए हैं, उससे इस तरह के आरोप वरिष्ठ पत्रकारों पर आए दिन लगने लगे हैं। जिन लोगों का पत्रकारिता और सरोकारों से कोई वास्ता नहीं है, वे लोग साजिशों का हिस्सा बनकर भले लोगों का करियर खराब कर रहे हैं। हरिगोविंद जी भलेमानुष हैं। उन्हें फंसाया गया हो सकता है। जो लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं, उनका इतिहास अच्छा नहीं रहा है। हरिगोविंद के साथ जो कुछ हुआ है, उसका संदेश है कि मीडिया के सीधे-साधे लोग अब सतर्क रहें। उन्हें कभी भी किसी भी आरोप में फंसाया जा सकता है।

इस पूरे वाकये के बारे में मुंबई के एक वरिष्ठ पत्रकार ने भड़ास4मीडिया को मेल भेजा है, जिसमें उन्होंने अपने तरीके से इस प्रकरण के बारे में गोलमोल बातें कहीं हैं। पत्र इस प्रकार है-


मुंबई के मीडिया की कलंक कथाओं में 15 सितंबर को यह एक और अध्याय जुड़ गया। एक नई नवेली टीवी की लड़की ने दो दशक से भी ज्यादा वक्त से पत्रकारिता की सेवा कर रहे एक सम्मानित और वरिष्ठ पत्रकार पर आरोप लगाया, तो लड़की की तो सिर्फ नौकरी ही गई। लेकिन उन वरिष्ठ पत्रकार की तो नौकरी और इज्जत, दोनों दांव पर हैं। कहानी अचानक ‘फोकस’ में आ गई है। पर इसकी असली जड़ें, शुरू होते ही सदगति को प्राप्त हो चुके मुंबई के एक लोकल चैनल से जुड़ी हैं। इस पूरी पटकथा के सारे पात्रों का उस लोकल चैनल से रिश्ता रहा है। और वहीं रहते हुए ही इन सभी ने ऐसी कहानी गढ़ना सहजता से सीख लिया था, जिसके जरिए कोई भी लड़की किसी भी पुरुष को आसानी से फांस सकती है। अब सदगति को  प्राप्त हो चुके मुंबई के उस लोकल चैनल की एक ट्रेनी रिपोर्टर लड़की ने जब देश के एक नामी डाक्टर पर अपने शील भंग का आरोप लगाया था, तो उस पटकथा की अंदर की  असलियत से ताजा मामले के सारे पात्र वाकिफ थे। एक नामी डाक्टर को फांसने के पीछे का सच क्या था, यह ये सारे लोग अच्छी तरह जानते हैं। ताजा पटकथा उसी घटना की  रीमेकिंग कही जा सकती है। उस कहानी में भी यही शख्स और यही उसकी अपनी वकीलन शातिर दिमाग मेन रोल में थे। ये दोनों ही उस ट्रेनी रिपोर्टर लड़की को हत्थे चढा कर तब खार पुलिस स्टेशन ले गए थे, और डाक्टर के खिलाफ अपने शील भंग की रपट लिखवाकर रिपोर्टर लड़की को जिंदगी भर के लिए कलंक कथा के पात्र के रूप में दर्ज करवाकर लाए थे। मामले का तो जो होना है वो होगा। लेकिन उस बेचारी की जिससे शादी तयशुदा थी, उस लड़के ने यह कहकर उससे रिश्ता तोड़ दिया, कि एक बदनाम लड़की से वह शादी क्यों  करे। बेचारी उस ट्रेनी रिपोर्टर को आज तक यह अहसास नहीं हो पाया है कि उसके साथ क्या खेल हुआ था। अब भी वह शर्म के बोझ से दबी चुपचाप काम करने को मजबूर है और  उस घटना के याद भी नहीं करना चाहती। पर महिला वकील ने अपना नाम जरूर चमका लिया।

ताजा पटकथा को भी उस महिला वकील की अपना धंधा चमकाने की कोशिश के रूप में ही देखा जा रहा है। इस चैनल के मुंबई दफ्तर में काम करने वाला हर शख्स जानता है कि जिसके खिलाफ मामला तैयार किया गया है, उन वरिष्ठ पत्रकार की कोई गलती है भी, या उन्हें फंसाया गया है। जो लोग सालों से उनको जानते हैं, वे कहते हैं कि ऐसे आरोपों से उनका कोई वास्ता कभी हो ही नहीं सकता। मामला हर तरह से हलाहल झूठ इसलिए भी लोग मान रहे हैं, क्योंकि जिसने आरोप लगाए हैं वो लड़की, और जिस निकाले गए शख्स की उसे शह मिल रही है, वो आदमी, साथ ही जिसने कानून का चोला पहनकर जबरदस्ती आग में घी डालने की कोशिश की है, वो औरत, तीनों कितने दूध के धुले हैं, यह जग जाहिर है। मीडिया में घुस आए ऐसे सारे ही लोगों के हाथ और पांव ही नहीं, चेहरे तक कीचड़ से पुते हैं। वही कीचड़ वे औरों पर भी पोतना चाहते हैं। कानून अपना काम करेगा, क्योकि वह सिर्फ सबूतों की भाषा जानता है। और उन्हीं के आधार पर फैसला भी देगा। लेकिन, आप और हम सब जानते हैं कि हमारे देश के वकील, किस तरह सबूतों की पूरी श्रंखला ही तैयार कर डालते हैं और कैसे एक बेकसूर को मार डालते हैं। खबरों की इज्जतदार दुनिया में आए नए लोगों में से कुछ ने इज्जत देना सीखा है, तो कइयों ने अपनी इज्जत दांव पर लगाकर  दूसरों की इज्जत उतारना जरूर सीख लिया है। टीवी की दुनिया से फोकस में आई यह ताजा घटना इसका सबसे बड़ा सबूत है।


((यह पत्र इसलिए प्रकाशित किया गया है ताकि दूसरा पक्ष भी सामने आ सके. अगर किसी को इस पत्र में कही गई बातों पर आपत्ति है, इसके जवाब में कुछ कहना चाहते हैं तो [email protected] पर मेल कर सकते हैं.))
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