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पर्ल ग्रुप ने ‘बिंदिया’ पर से पर्दा हटाया

पर्ल ग्रुप ने मीडिया फील्ड में अपने पांव को और फैलाते हुए एक टीवी न्यूज चैनल और दो मैग्जीनों के बाद अब तीसरी मैग्जीन भी लांच कर दी है। पहले से जो दो मैग्जीन निकल रही हैं, उनमें से एक राजनीतिक मैग्जीन ‘शुक्रवार’ है और दूसरी बिजनेस पर केंद्रित ‘मनी मंत्र’। नई लांच मैग्जीन महिलाओं के लिए है। नाम है ‘बिंदिया’। 9 मई को इसका पहला अंक बाजार में आया। 84 पन्नों की इस पत्रिका का मूल्य बीस रुपये है। दिल्ली से प्रकाशित होनी वाली यह पत्रिका मासिक है। पर्ल ग्रुप की पत्रिकाओं के ग्रुप एडिटर श्रीकांत त्रिपाठी ‘बिंदिया’ के भी प्रमुख हैं। मैगजीन में महिलाओं की जिंगदी के हर पहलू को समेटने की कोशिश की गई है।

<p align="justify">पर्ल ग्रुप ने मीडिया फील्ड में अपने पांव को और फैलाते हुए एक टीवी न्यूज चैनल और दो मैग्जीनों के बाद अब तीसरी मैग्जीन भी लांच कर दी है। पहले से जो दो मैग्जीन निकल रही हैं, उनमें से एक राजनीतिक मैग्जीन '<strong>शुक्रवार'</strong> है और दूसरी बिजनेस पर केंद्रित <strong>'मनी मंत्र'</strong>। नई लांच मैग्जीन महिलाओं के लिए है। नाम है <strong>'बिंदिया'</strong>। 9 मई को इसका पहला अंक बाजार में आया। 84 पन्नों की इस पत्रिका का मूल्य बीस रुपये है। दिल्ली से प्रकाशित होनी वाली यह पत्रिका मासिक है। पर्ल ग्रुप की पत्रिकाओं के ग्रुप एडिटर <strong>श्रीकांत त्रिपाठी</strong> 'बिंदिया' के भी प्रमुख हैं। मैगजीन में महिलाओं की जिंगदी के हर पहलू को समेटने की कोशिश की गई है।</p>

पर्ल ग्रुप ने मीडिया फील्ड में अपने पांव को और फैलाते हुए एक टीवी न्यूज चैनल और दो मैग्जीनों के बाद अब तीसरी मैग्जीन भी लांच कर दी है। पहले से जो दो मैग्जीन निकल रही हैं, उनमें से एक राजनीतिक मैग्जीन ‘शुक्रवार’ है और दूसरी बिजनेस पर केंद्रित ‘मनी मंत्र’। नई लांच मैग्जीन महिलाओं के लिए है। नाम है ‘बिंदिया’। 9 मई को इसका पहला अंक बाजार में आया। 84 पन्नों की इस पत्रिका का मूल्य बीस रुपये है। दिल्ली से प्रकाशित होनी वाली यह पत्रिका मासिक है। पर्ल ग्रुप की पत्रिकाओं के ग्रुप एडिटर श्रीकांत त्रिपाठी ‘बिंदिया’ के भी प्रमुख हैं। मैगजीन में महिलाओं की जिंगदी के हर पहलू को समेटने की कोशिश की गई है।

उन्हें फैशन, खान-पान, करियर के अलावा रोजमर्रा की जिंदगी और उसमें आने वाली परेशानियों के हल से संबंधित हर चीज मुहैया कराई जाएगी। पत्रिका को देश के तमाम हिस्सों में पहुंच को सुनिश्चित करने का काम चल रहा है ताकि छोटे शहरों की महिलाओं को भी इसका लाभ मिल सके। बाजार में पहले से ही ‘गृहशोभा’ और ‘मेरी सहेली’ जैसी महिला केंद्रित पत्रिकाएं मौजूद हैं, ऐसे में बिंदिया उनसे कैसे निपटेगी? इस सवाल ग्रुप एडिटर श्रीकांत त्रिपाठी कहते हैं- ”हमारी कीमत कम है और हम ज्यादा सार्थक कंटेंट मुहैया कराएंगे। हम हर चीज को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं। रणनीति की बदौलत ही हमारी पत्रिका ‘शुक्रवार’ सफल है। हमारी सभी पत्रिकाओं के नाम देसीपन लिए हुए हैं। ये पत्रिकाएं पाठकों को बरबस अपनी ओर खींचती हैं।” 

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