मौर्य टीवी नहीं करेगा पेड न्यूज़ का कारोबार

मौर्य टीवी ख़बरों की खरीद-बिक्री नहीं करेगा। इस आशय की चैनल पर बाकायदा घोषणा की गई है। गुरूवार की रात ‘राजनीति-खेल सत्ता का’ नामक कार्यक्रम में पेड न्यूज़ पर बहस शुरू करने से पहले एंकर ने ऐलान किया कि मौर्य टीवी पेड न्यूज़ का विरोध करता है और वह संपादकीय सामग्री की आड़ में पेड न्यूज़ नहीं दिखाएगा। ये एक ऐसी घोषणा है जो पेड न्यूज़ के काले धंधे पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। यदि बाक़ी के चैनल और अख़बार भी इस तरह का इरादा कर लें तो इस कुप्रवृत्ति पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

इसके पहले झारखंड चुनाव के दौरान राँची से प्रकाशित होने वाले प्रभात ख़बर ने भी ऐसी ही घोषणा की थी। हालांकि इसके बावजूद चुनाव में बहुत सारे अख़बारों और चैनलों ने पेड न्यूज़ का कारोबार जमकर किया था। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि मौर्य टीवी और प्रभात ख़बर द्वारा की जा रही ऐसी घोषणाओं से एक नैतिक दबाव तो बनता ही है और उसका असर भी आज नहीं तो कल दिखेगा।

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने जा रहे हैं और अभी से पेड न्यूज़ का बाज़ार सजने लगा है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की तरफ से इस आशय के प्रस्ताव भी दिए जाने लगे हैं। ज़ाहिर है कि पत्र-पत्रिकाओं और चैनलों के लिए लोभ संवरण कर पाना मुश्किल हो रहा है। वैसे भी बिहार रेवेन्यू के लिहाज़ से कोई बहुत बड़ा बाज़ार नहीं है और यहाँ अख़बारों और चैनलों की भरमार भी हो गई है। चुनाव के पहले कई और चैनल आने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

ऐसे में ज़्यादातर मीडिया संस्थान इस चुनावी रिश्वतखोरी में शामिल होने से शायद ही परहेज़ करें। मगर इससे लड़ाई की तैयारियां भी की जा रही हैं। ख़बर है कि पटना के जागरूक नागरिक और मीडियाकर्मी मिलकर पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ माहौल बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

वैसे पेड न्यूज़ को रोकने की दिशा में चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से भी पहल कर दी है। पहली बार उसने ज़िला स्तर तक ऐसी कमेटियाँ गठित करने की घोषणा की है, जो पेड न्यूज़ पर नज़र रखेंगी। ज़ाहिर है कि पेड न्यूज़ पर किया जाने वाला खर्च प्रत्याशियों के खाते में जाएगी और उनके चुनाव खर्च का हिस्सा माना जाएगा।

इससे प्रत्याशियों पर भी दबाव बनेगा और रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर मीडिया संस्थानों की भी पोल खुलेगी। हालाँकि शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि पेड ख़बर का कारोबार करने वाले मीडिया संस्थान नए रास्ते तलाश लेंगे और राजनीतिक दल एवं उम्मीदवार झख मारकर इसमें उनका सहयोग देंगे।

Comments on “मौर्य टीवी नहीं करेगा पेड न्यूज़ का कारोबार

  • इस घोषणा का सभी अखबारों,न्यूज चैनलों को अनुकरण करना चाहिए।

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  • ram sharan yadav says:

    मौर्य टीवी की इस पहल का स्वागत है। उसने ऐसे माहौल में साहस दिखाया है जब सब पेड न्यूज़ के गटर में डूबकर तर जाने के लिए तत्पर हैं। देखना ये है कि बाकी चैनल औरमीडिया समूह की अतरआत्मा जागती है या नहीं। मैं सभी पत्रकारों और मीडिया की साख के लिए चिंता करने वालों से अपील करूँगा कि वे इस मुहिम में शामिल हों ताकि पेड न्यूज़ के कैसर को जड़ से ख़त्म किया जा सके।

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  • Todays, on 07.08.10 your channel has telecast live telecast of Janata Mahapanchayat from Charpa.Kindly clear us this is paid or unpaid .

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  • mukesh kumar says:

    पिंकू जी धन्यवाद आपका……आपने ये प्रश्न करके बहुत अच्छा किया है। इसी तरह के सवाल अगर तमाम जागरूक दर्शकों और पाठकों के मन में उठने लगें और वे आगे बढ़कर इसी तरह सभी पत्र-पत्रिकाओं और न्यूज़ चैनलों से सवाल करने लगें तो पेड न्यूज़ का कारोबार करने वालों की अपने आप हवा निकल जाएगी। हम सब की चुप्पी ने ही उनके हौसले बुलंद किेए हैं। मौर्य टीवी ने पेड न्यूज़ का कारोबार न करने की घोषणा ही नहीं की है बल्कि उसके ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने भी जा रहा है। उम्मीद है कि पेड न्यूज़ को ग़लत मानने वाले तमाम लोग इसका साथ देंगे।
    अब आपके प्रश्न का जवाब-जनता महापंचायत बिहार की चुनावी राजनीति की एक बड़ी घटना थी और उसे मौर्य टीवी ने पत्रकारीय नैतिकता तथा दायित्व के साथ कवर किया। प्रभुनाथ सिंह को और लालू यादव से उनके मिलन को उसी ढंग से प्रस्तुत किया जैसा कि किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चैनल को करना चाहिए।
    इस महापंचायत का एक हिस्सा प्रायोजित था और जो हिस्सा प्रायोजित था और जब वह प्रसारित हुआ तो बाकायदा स्क्रीन पर विज्ञापन लिखा गया। हमने उसे छिपाया नहीं और न ही ADVT लिखा जो कि बहुत से लोगों को समझ में ही नहीं आता। स्पष्ट है कि इसमें पेड और अनपेड कुछ नहीं था बल्कि संपादकीय सामग्री थी और विज्ञापन था और दोनों के बीच की विभाजक रेखा भी साफ खींची गई थी।
    उम्मीद है कि आपकी शंका का समाधान हो गया होगा।

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