जब हम 3 नवंबर को सुल्तानपुर स्टेशन पर उतरे तो स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया के सदस्य हमारा इंतजार कर रहे थे। उनमें भी वही जोश दिखा जो हम 1 नवंबर को अलीगढ़ से लेकर चले। राज ठाकरे के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान में हमें यहां 1000 सिगनेचर मिले। पर इन एक हजार हस्ताक्षरों में से मेरे लिए दर्जन भर हस्ताक्षर ज्यादा महत्वपूर्ण थे। जानते हैं क्यों? इन दर्जन भर लोगों ने कलम की बजाय अंगूठे से साइन किया। इन अपढ़ लोगों ने अपनी जिम्मेदारी को समझा, हमारी संवेदना को समझा, हमारी मुहिम को स्वीकारा।
कई बुजुर्ग लोग ऐसे मिले जिन्होंने हमारे अभियान के बारे में जानने के बाद युवाओं से भी ज्यादा जोश दिखाया। इस छोटे से जिले में पहले ही दिन मिले सपोर्ट से हम अभिभूत थे। एसएफआई के साथियों की सराहना करनी होगी जिन्होंने हमारा पूरा साथ दिया। युवा साथियों से विदाई लेकर हम अपने अगले पड़ाव लखनऊ की ओर चल पड़े।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 4 नवंबर को पहुंचे। रेलवे के रिटायरिंग रूम में हम सारी रात कल के बारे में सोचते रहे। सुबह 10 बजे ही हम लोग लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंच गए थे। साथी प्रेमपाल ने लोगों को आकर्षित करने के लिए नया
तरीका सोचा। योजना के मुताबिक हमने अपने पोस्टर की पोशाक पहन रखी थी। यूनिवर्सिटी में काफी लोगों का साथ मिला लेकिन कुछ छात्रों का रवैया हैरान कर देने वाला था।
ये छात्र मुहिम के बारे में बताने के बावजूद साइन करने से इनकार करते रहे। दिग्विजय सिंह देव और रामकृष्ण नाम के दो ऐसे साथी भी मिले जो हमारी मुहिम के बारे में जानकर हमारी तरह ही उत्साहित हो उठे। ये दोनों शाम को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने तक हमारे साथ बने रहे। ये दोनों लखनऊ से हमारे आने के बाद भी ए वायस आफ इंडियन यूथ के सहयोगी के तौर पर आगे का काम जारी रखे हुए हैं। यहां पर भी राज ठाकरे और एमएनएस कार्यकर्ताओं को लेकर जबरदस्त आक्रोश था।
आलम यह था कि साइन करते हुए वो लगातार अपशब्दों का प्रयोग करने से भी परहेज नहीं कर रहे थे। लड़कों के साथ लड़कियों ने भी कंपेन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। युवाओं ने आगे के बारे में हमारी योजना और मिशन के बारे में जानने के बाद आर्थिक मदद भी दी। हमें यहां पर मीडिया का भी पूरा सहयोग मिला तो पुलिसकर्मियों ने भी हमारा मनोबल बढ़ाया।
थैंक्स लखनऊ, जो तुम्हारा ऐसा साथ मिला….।
रात को 12 बजे हमारी ट्रेन थी और हम चल पड़े अपने अगले पड़ाव, इलाहाबाद के लिए।
अमर उजाला, अलीगढ़ के रिपोर्टर अशोक कुमार चार अन्य अलीगढ़ी युवाओं के साथ राज ठाकरे की विषैली राजनीति के खिलाफ अभियान पर निकले हुए हैं। उन्होंने भड़ास4मीडिया के लिए सुल्तानपुर और लखनऊ के अपने अनुभवों को कलमबद्ध किया है। वे इलाहाबाद में एक दिन रुकने के बाद आज अगले पड़ाव के लिए निकल चुके हैं। टीम के मनोबल को बढ़ाने के लिए आप अशोक को 09410644962 पर फोन कर सकते हैं या [email protected] पर मेल कर सकते हैं। अभियान के अंतिम चरण में अशोक और उनकी टीम दिल्ली पहुंचने वाली है। अशोक कुमार के इस अभियान के बारे में ज्यादा जानने के लिए क्लिक करें- राज को सबक सिखाने चला कलम का सिपाही











