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दुख-दर्द

इसमें उस स्ट्रिंगर पोरवाल की क्या गलती?

बी4एम पर 1 जुलाई को एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें एक रिक्शा चालक एक पुलिस पुलिसकर्मी को पीट रहा है और दोनों ने शराब पी रखी है। इस मामले में फिरोजाबाद के एमएच वन के स्ट्रिंगर कृष्ण कुमार पोरवाल के खिलाफ रिक्शा चालक को उकसाने का मुकदमा दर्ज हो गया है। आप मुझे एक बात बताइये कि जब ये अधिकारी और पुलिसकर्मी पुलिस विभाग में भर्ती होते हैं तो ट्रेनिंग के दौरान इन्हें क्या यही सिखाया जाता है कि अपनी उस खाकी वर्दी का मजाक उड़ाकर दारू पीकर पब्लिक प्लेस पर हंगामा करो। अब इसमें उस स्ट्रिंगर पोरवाल की क्या गलती है? क्या पोरवाल या अन्य कैमरामैन उस सिपाही को उसके घर पहुंचाते?

बी4एम पर 1 जुलाई को एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें एक रिक्शा चालक एक पुलिस पुलिसकर्मी को पीट रहा है और दोनों ने शराब पी रखी है। इस मामले में फिरोजाबाद के एमएच वन के स्ट्रिंगर कृष्ण कुमार पोरवाल के खिलाफ रिक्शा चालक को उकसाने का मुकदमा दर्ज हो गया है। आप मुझे एक बात बताइये कि जब ये अधिकारी और पुलिसकर्मी पुलिस विभाग में भर्ती होते हैं तो ट्रेनिंग के दौरान इन्हें क्या यही सिखाया जाता है कि अपनी उस खाकी वर्दी का मजाक उड़ाकर दारू पीकर पब्लिक प्लेस पर हंगामा करो। अब इसमें उस स्ट्रिंगर पोरवाल की क्या गलती है? क्या पोरवाल या अन्य कैमरामैन उस सिपाही को उसके घर पहुंचाते?

एक रिपोर्टर का काम होता है सबसे पहले खबरें बनाना, ना कि उसकी मदद करना जो शराब पीकर एक रिक्शा चालक के साथ हंगामा काट रहा है। मैं तो यह कहता हूं कि इस घटना में अगर फिरोजाबाद में कृष्ण कुमार पोरवाल दोषी हैं तो वह पुलिसकर्मी भी उतने ही दोषी हैं जो उस समय फिरोजाबाद बस स्टैण्ड पर मौजूद थे और तमाशबीन बने दूर से हो रहे तमाशे को देख रहे थे लेकिन उन्हें किसी ने सजा नहीं दी क्योंकि वह पुलिस विभाग के जो हैं।

पुलिस की क्या कार्यशैली रहती है, ये तो आप लोग जानते हैं। अब देहरादून का मामला देख लीजिए। एक ईमानदार और सीधे-साधे इंसान को देहरादून पुलिस ने बदमाश बना दिया और उसका फर्जी एनकाउन्टर कर उसे मौत के घाट उतार दिया। वह लड़का रणवीर बदमाश था ही नहीं। वह नौकरी के लिए गाजियाबाद से देहरादून आया था जहां पुलिस ने उसे बदमाश बताकर उसको दस गोलियाँ मार कर मौत के घाट उतार दिया। चाहे कहीं की भी पुलिस हो, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कई बार फर्जी एनकाउन्टर हुये हैं। लेकिन वह गुनाह नहीं है और ये भी गुनाह नहीं है कि एक पुलिसकर्मी शराब पीकर एक रिक्शा चालक के साथ हंगामा करे। दोषी तो हमेशा ईमानदार लोगों को ही बनाया जाता है न कि आरोपियों को।

भड़ास4मीडिया पर कई लोगों ने अपने विचार भेजे। मुझे फैजाबाद के चन्दन श्रीवास्तव की बात बहुत अच्छी लगी। उन्होंने उस स्ट्रिंगर का दर्द महसूस किया जो कि अपने चैनल के लिये इतना रिस्क लेते हैं लेकिन चैनल उन पर मुसीबत आने पर पल्ला झाड़ लेता है। उस स्ट्रिंगर का दर्द मैं खुद महसूस कर सकता हूं कि इस समय उस पर क्या बीत रही होगी। मैं सभी शहरों के स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों से कहना चाहता हूं कि आज एक स्ट्रिंगर कृष्ण कुमार पोरवाल पर जो मुकदमा लिखा है, कल किसी और की बारी भी हो सकती है। इसलिये मेरे सोते हुये भाइयों, जाग जाओ और एकजुटता का परिचय दो, नहीं तो टूटी हुई माला के मोतियों की तरह बिखर जाओगे।

आपका छोटा भाई-

शोभित गुप्ता

[email protected]

फिरोजाबाद

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