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संविधान की आत्मा बनना है पत्रकारिता को : प्रेम शुक्ल

पत्रकारिता कोश के 10वें अंक का विमोचन संपन्न : पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा खंभा है, इसे और ईमानदार बनना है ताकि पत्रकारिता देश में संविधान की आत्मा और प्राण बन जाए। यह बातें ‘दोपहर का सामना’ के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल ने कही। वह आफताब आलम द्वारा संपादित पत्रकारिता कोश के 10वें अंक के विमोचन और हिंदुस्तानमीडिया डाट काम के उदघाटन समारोह में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने हिंदी-मराठी के बीच के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी देवकी मां है तो मराठी यशोदा माता है इसलिए हमें कामकाज, व्यवहार में हिंदी-मराठी का प्रयोग करते रहना है, भले ही ज्ञान की भाषा अंग्रेजी रहे।

पत्रकारिता कोश के 10वें अंक का विमोचन संपन्न : पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा खंभा है, इसे और ईमानदार बनना है ताकि पत्रकारिता देश में संविधान की आत्मा और प्राण बन जाए। यह बातें ‘दोपहर का सामना’ के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल ने कही। वह आफताब आलम द्वारा संपादित पत्रकारिता कोश के 10वें अंक के विमोचन और हिंदुस्तानमीडिया डाट काम के उदघाटन समारोह में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने हिंदी-मराठी के बीच के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी देवकी मां है तो मराठी यशोदा माता है इसलिए हमें कामकाज, व्यवहार में हिंदी-मराठी का प्रयोग करते रहना है, भले ही ज्ञान की भाषा अंग्रेजी रहे।

हिन्दी साहित्य परिषद, झुंझुनवाला कॉलेज (घाटकोपर, मुंबई) द्वारा आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि व महाराष्ट्र के वस्त्रोद्योग मंत्री आरिफ नसीम खान ने पत्रकारिता कोश की वेबसाइट की भूरि-भूरि प्रशंसा की और आधुनिक संचार क्रांति के इस दौर में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया। मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता कोश की पत्रकारिता सच्ची है। यह संपर्कों का पुल है। उन्होंने इसे निरंतर जारी रखने की बात कही।

इस अवसर पर हिंदी सांध्य दैनिक निर्भय पथिक के संपादक अश्विनी कुमार मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता कोश एक ऐसा आईना है जिसके माध्यम से भारतीय मीडिया का चेहरा साफ दिखाई पड़ता है। यह मीडियाकर्मियों के संपर्क सूत्र का एक अच्छा माध्यम है। मी मराठी चैनल के संपादक सचिन परब ने कहा कि जिस प्रकार भाषा दिलों को जोड़ती है उसी प्रकार पत्रकारिता कोश के माध्यम से मीडियाकर्मियों को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास सफल हुआ है। उन्होंने वेबसाइट के बारे में कहा कि अब लोगों को भारतीय मीडिया से संबंधित सूचनाएं जानने व पढ़ने के लिए साल भर इंतजार नहीं करना पड़ेगा बल्कि अब यह कभी भी इंटरनेट पर अपडेट किया जा सकेगा।

मध्य प्रदेश सूचना केंद्र की उप निदेशक मोहिनी भड़कमकर ने पत्रकारिता कोश को बहुपयोगी बताया जबकि एस.आई. डब्ल्यू.एस.कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. दयानंद तिवारी ने कोश को देश में इस प्रकार की एकमात्र पत्रिका बताया जिसमें समस्त मीडियाकर्मियों की सूचनाएं एक साथ नियमित रूप से प्रकाशित की जाती हैं। हिंदी विद्या प्रचार समिति के सचिव डॉ. राजेंद्र सिंह ने समिति तथा आर.जे. कॉलेज के शैक्षिक कार्यों का परिचय देते हुए कहा कि वे हिंदी भाषा के विकास और प्रचार प्रसार के लिए दृढ़ संकल्प हैं। झुंझुनवाला कॉलेज की प्रचार्या डॉ. उषा मुकुंदन ने कहा कि हिंदी सबसे मधुर भाषा है और यह देश में सबसे अधिक बोली जाती है।

कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. रजनीकांत मिश्र की सरस्वती वंदना से हुआ तथा श्री सुरेश मिश्र, श्री प्रदीप पांडेय, डॉ. मुकेश गौतम, श्री अभय मिश्रा, श्री आलोक भट्टाचार्य, श्री कपिल कुमार, ओबैद आजमी, आदि ने अपनी हास्य रचनाएं प्रस्तुत किए। तत्पश्चात सभी अतिथियों का शॉल व पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया जबकि पत्रकारिता कोश के मुखपृष्ठ डिजाइनर खान एहसान तथा वेबसाइट के डिजाइनर ओबैद आजमी का विशेष सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष एड. विजय सिंह, नवभारत के पत्रकार अखिलेश मिश्र, आदि सहित सैकड़ों मीडियाकर्मी और रचनाकार मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन झुंझुनवाला कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ. मिथिलेश शर्मा तथा केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उप संस्थान के सहायक निदेशक श्री अनंत श्रीमाली ने किया। आभार प्रदर्शन कोश के सहायक संपादक श्री राजेश विक्रांत ने किया।

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0 Comments

  1. kamta

    May 2, 2010 at 2:09 pm

    समस्‍या का हल संविधान के बाहर है ऐसा कभी हम लोग मानते थे।

  2. Dheeraj Prasad

    May 3, 2010 at 11:23 am

    नमस्कार मेरा नाम धीरज प्रसाद है CNEB न्यूज़ नॉएडा से |
    श्री मान प्रेम जी आपने एक दम सही बात कही है, मीडिया अब के समय में सबसे अधिक शक्तिवान है, और रही बात जन संपर्क की तो जीतनी हिंदी हिंद के लिए आदरणीय है उतनी ही मराठी भी, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हिंदी और मराठी के नाम पर कई बार लहू बहा चुके है| अरे वह दिन वह लोग भूल जाते है जब राष्ट्रीय गान में हिंदी और मराठी को जोड़ कर देश को आजादी दिलाई गई थी, स्वतंत्र की देवी ने कभी यह नहीं सोंचा था की मेरे नाम को ले कर चार असामाजिक लोग कभी अपने ही देश में आतंक मचाएंगे|
    खैर| मीडिया लगातार आगे बढ़ता ही जा रहा है, पर मै उन सभी आदर्नियो से कहना चाहूँगा जो पत्रकारिता के क्षेत्र को आगे लेन का भरपूर प्रयास कर रहे है जो देश को मीडिया से भर देना चाहते है, जो यह सपने देख रहे हैं, की एक दिन वह भी आएगा जब हिंदुस्तान का प्रत्येक नागरिक स्वय एक पत्रकार होगा,
    पर महोदय यह तभी तो पूरा होगा न जब मीडिया के क्षेत्र में से महिलाओ के साथ हो रहे दुराचार समाप्त होंगे, आप इसका भी ध्यान रखे |

    धन्यवाद – आपका मित्र
    धीरज प्रसाद, CNEB न्यूज़

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