भ्रष्ट मीडिया घरानों के नाम खोलेंगी पार्टियां!

चुनाव आयुक्त बोले- हम सिर्फ चुनावी समय के शेर : पैसे लेकर खबर छापने के चलन को लेकर राजनैतिक दलों में मीडिया के खिलाफ असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। भाजपा-कांग्रेस जैसी पार्टियों का कहना है कि अगर चुनाव आयोग कहे तो वे उन मीडिया घरानों के नाम बताने को तैयार हैं, जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टियों से पैसे लेकर खबर छापने की पेशकश की थी।

भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने स्वीकार किया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भुगतान के बदले खबर छापने या प्रसारित करने (पेड न्यूज) की पेशकश की गई थी। सभी राजनीतिक दलों ने पेड न्यूज को कदाचार बताते हुए ऎसे प्रचलन पर रोक लगाने की मांग की। हालांकि भाजपा-कांग्रेस दोनों ने ही ऎसी पेशकश करने वाले मीडिया घरानों के नाम उजागर करने से बचते हुए कहा कि वे उनके नाम सिर्फ चुनाव आयोग को बताएंगे। वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने दावा किया कि विदिशा सीट पर चुनाव अभियान के दौरान कुछ मीडिया समूहों ने उनसे पेड न्यूज छापने की पेशकश की थी।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और भारतीय वूमेन्स प्रेस कॉर्प्स की ओर से प्रायोजित खबरों पर आयोजित एक संगोष्ठी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज (भाजपा), माकपा महासचिव प्रकाश करात और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इस कदाचार पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए जाने की मांग की। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि चुनाव आयोग के कहने पर वे व्यक्तिगत रूप से इस बारे में उसे विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएंगे। मनीष ने कहा कि प्रेस की आजादी और प्रेस के मालिक की आजादी के बीच स्थित विरोधाभास को दूर करने की आवश्यकता है।

चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने आयोग से पेड न्यूज के प्रचलन की बात तो कही है लेकिन किसी ने औपचारिक शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ चुनावी समय के ही शेर हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए आयोग अपनी मशीनरी का विस्तार करेगा। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरत इस बात की है कि मीडिया आत्मनियमन करे। माकपा महासचिव प्रकाश कारत ने पेड न्यूज, प्रायोजित खबरों को चुनावी धांधली घोषित करने की मांग की। करात ने कहा कि मीडिया द्वारा आत्म नियमन इस समस्या को हल करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। करात के इस सुझाव का अन्य दोनों पार्टियों ने समर्थन किया। करात ने कहा, “प्रायोजित खबरों को चुनावी धांधली घोषित किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान कानून इसकी इजाजत नहीं देते तो कानून में उचित बदलाव किए जा सकते हैं।” करात ने कहा कि चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता इस समस्या का समाधान नहीं है।

वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने दावा किया कि विदिशा सीट पर चुनाव अभियान के समय एक मीडिया संगठन की ओर अपने पक्ष में लिखने के लिए एक करोड़ रुपए के पैकेज की पेशकश की गई थी जिसमें विभिन्न स्थानों पर उनके दौरे और उससे जुड़े चित्र शामिल थे। सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रायोजित खबरों को चुनावी कदाचार घोषित करने के लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी।

Comments on “भ्रष्ट मीडिया घरानों के नाम खोलेंगी पार्टियां!

  • ramesh jain says:

    paid news kewal akhbar hi nahi chhapte hai .Electronic media bhi inse aage hi hai. \pue o
    package ke dum par candidate ko hero ban kar dikhta hai.TRP ke hisab se darshko ko murkh banate hai.Kahi bahas to shuru ho is bhrat evam anaitik santh ganth ki.Print media par sevice tax lagaya tha to ye rashtra hit ki duhai dete nahi thkte the.Kya.
    Ramesh jain

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  • Rohit Rohan says:

    I think this will be the great move, we need to create media’s image very clear not like a pet of any political party, and those media company should be out from the industry who does this kind of job.

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  • ashutosh bajpai [senior jounalist] INDORE says:

    [b]pichle kuch salo se katipaye akhbar keval vigyapan par hi zinda hai. ye akhbar apne yahna ke editor, reporter aur marketing karmchariyon ko tarah -tarah ke sapne dikhate hain aur phir dhire se vigyapan ke track par le aate hain. kul-milakar ek hi funda hota hai ki vigyapan laoge to unki naukri rahegi. BJP sansad Smt. Shushma Swaraj apni jagah 1000% sahi hai ya satya hai. vigyapan nhi dene ke karan kai sampadak aur reporter apni naukri kho chuke hai. CONGRESS, BJP aur anya rajnidhik dalo se appeal hai ki we bhrasht aur keval vigyapan k adhar par zinda rehne wale akhbaro k khilaf bhartiya chunao aachar sahita me koi praodhan laaye anyatha ye akhbar malik lok-tantra ko to nuksan pahuchaynge hi sath hi chouthe stambh aur patrkaro ko bhi bhrasht aur sadak pe lane se baaj nhi ayenge. swargiya Prabhat Joshi ka kehna sahi tha ki aise kathit akhbaro ko sarkar ko “newspaper” k bajaye pomplet ki shreni me la dena chahiye. akhbar ki aad me dhan kamane wale kathit akhbar maliko ke nam sabhi partiyo ko ek jut hoke janta k samne lana chahiye.

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  • It is very necessary to curb media at this stage otherwise it will become a big problem to solve. Media houses are growing into “Mandi” where every thing is on sale news, views, owner, publisher, editor, reporter. everyone has its rate, one just need to pay and buy.

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  • Chandrabhan Singh says:

    Is khabar ko padne ke bad mujhe koi ascharya nahi kyonki Bhrast Netaon ki Political Partiya aage hoker paid news ke liye media ko invite karti hai. Imandari to usme hai jab in Bhrast Netaon ki Political Partiyon ka vigyapan bhi media nahi dikhaye. Imandari ke saath Political Partiyon ko Janta ke samne ANETIK media Gharano ka nam batlana chahiye verna samjha jayega ki ve bhi Imandar nahi hai.
    Chandrabhan Singh, Jaipur cbs_naruka@rediffmail.com

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  • इसमें कोई नयी बात नहीं कि पत्रकारों को उनके चैनेलों और अखबार के मालिकों ने व्यापारी बना डाला है। हर चैनल व अखबार किसी बडे घराने या बडे राजनैतिक पार्टी के रहमो करम पर चल रहा है। और उममें काम करने वाला बडे से बडा पत्रकार काठ का घोडा बन कर रह जाता है। सच तो यह है कि चौथे स्तम्भ कहे जाने वाली बात भी अब झूठ सी लगती है।

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  • abhimanyu pandey says:

    jo neta media par ungli utha rahe hainwo pehle apne ander jhank kar dekhe jab yahi neta log rajniti me naye naye aate hain to khabron me rehne ke liye kya kuch nahi karte yahan tak ki sirf naam chapwane ke liye patrakaron ko dasion phone karte hain aur kai tarah ke pralobhan dete hai aur jab aadhe adhoore neta ban jate hain to media ko doshi thahrate hain.sushma swaraj ji apne dil par haath rakhe aur jawab de ki unhone kabhi paise dekar khabre nahi lagwain. yadi neta log itne pak-saaf hain to patrakarita ke bade naamon ko kimti gift bhej bhej kar kyon favour me likhne ki baat karte hain.sou choohe khakar billi haj ko chali.

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