जागरण ने चोरी का माल लाठियों के गज बेचा

राकेश शर्मा
राकेश शर्मा
दोस्तों, दैनिक जागरण में पेड न्यूज छपने का लोकसभा चुनाव का किस्सा तो आपको मालूम हो ही चुका है, अब विधानसभा चुनाव की हकीकत से भी आपको रूबरू करा देता हूं। सीमित दिनों में अधिक से अधिक माल बटोरने के लिए संघर्षरत प्रबंधन के हितैषियों के माध्यम से विधानसभा चुनाव में चोरी का माल, लाठियों के गज के मुहावरे को पूरी तरह से चरितार्थ होते मैंने खुद देखा।

हाल यह था कि कोई कालम, कोई पृष्ठ, कोई साईज और कोई दर तय नहीं थी। बस माल फेंकों और तमाशा देखो। जिसका छप गया तो ठीक नहीं छपा तो ठीक। हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुई एक उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में प्रमाण भेजे जाने के बाद भी जो घटनाक्रम सामने आया, उसकी जानकारी मिलने के बाद पेड न्यूज के मामले में अब दैनिक जागरण की विधानसभा चुनाव की हकीकत आपके सामने पेश कर रहा हूं। यह लड़ाई अब यहीं खत्म नहीं होगी, इसके लिए साथियों जितना भी संघर्ष करना पड़े करेंगे। सच्चाई पर पर्दा डालने के प्रयास में जुटे लोगों का सहयोग करने वालों की हकीकत भी अब समाज के सामने लाई जाएगी।

वैसे अतीत का जिक्र करते हुए आपको यह जानकारी भी दे दूं कि चुनावों में पत्रकारों के माध्यम से धन उगाही का सिलसिला दैनिक जागरण में पहले से ही चल रहा है। यह बात अलग है कि पहले विज्ञापन के तौर पर यह धन उगाही की जाती थी, लेकिन अब सीधे-सीधे पेड न्यूज छापकर मालिक शेयर धारकों के हिस्से का माल भी लूटकर घर ले जाते हैं। पूर्व में धन उगाही के लिए संवाददाताओं को बाकायदा टारगेट दिया जाता था,  इसका स्पष्ट उल्लेख आपको इस पत्र के साथ भेजी जा रही सूची एक में देखने को मिल जाएगा। जिसमें बाकायदा पत्रकारों को 2005 के विधानसभा चुनाव में लिखित टारगेट और चुनाव संबंधी दिशा-निर्देश  दिए गए हैं।

बहरहाल बात करते हैं 2009 के विधानसभा चुनाव की। हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद सितंबर के दूसरे सप्ताह में करनाल में पूरे प्रदेश के पत्रकारों की एक बैठक का आयोजन किया गया। मैं फरीदाबाद में भारी बरसात के कारण बैठक में समय से नहीं पहुंचा और पहले सत्र में बांटे गए ज्ञान को हासिल करने से वंचित रह गया। बहरहाल दूसरे सत्र में लोकसभा चुनाव में पेड न्यूज के कारण अखबार की हुई फजीहत को देखते हुए आदरणीय संपादक श्री संजय गुप्ता जी ने  विधानसभा चुनाव में यह सारी जिम्मेदारी चंडीगढ़ की प्रभारी मीनाक्षी जी को सौंपने का ऐलान किया। इस ऐलान के साथ ही चंडीगढ़ और नोएडा के बीच चलने वाली वर्चस्व की एक और लड़ाई की नींव तैयार हो गई।

पत्रकारों को हिदायत दी गई कि जो कोई भी राजनीतिक पार्टी इस काम के लिए संपर्क करे उसकी चंडीगढ़ में बात करा दी जाए। विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के ऐन पहले फरीदाबाद में मंथन नामक वार्षिक बैठक  का आयोजन किया गया। इसका किस्सा बाद में। इस बैठक में चंडीगढ़ से मीनाक्षी जी पहुंची थी और पेड न्यूज का चूल्हा गर्म होने लगा था। मैं दो दिन तक इस बैठक में भाग लेने के कारण कार्यालय नहीं जा पाया। दूसरी ओर राजनीतिक लोगों से संबंध बढ़ाने के लिए और अपना दबदबा दिखाने के लिए सदैव लालायित रहने वाले संतोष ठाकुर ने राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ अपना तालमेल बिठाना शूरू कर दिया था। बैठक के दौरान वे कई बार मीनाक्षी जी से बात करके चुनाव पैकेज फाइनल करने के लिए आग्रह कर चुके थे। मीनाक्षी जी से खुद बात करने की उनकी हिम्मत नहीं थी। इसीलिए मुझे वहां लगातार आगे किए हुए थे और राजनीतिक दलों के नेताओं से खुद संपर्क साधे हुए थे।

शुरूआती दिनों में चंडीगढ़ में मीनाक्षी जी के विश्वसनीय दिनेश कुमार जी ने चुनाव पैकेज के इच्छुक प्रत्याशियों को ऐसे-ऐसे पैकेज बताए कि उनकी चुनाव में फोटो तक छपवाने की मंशा हवा हो गई। खैर किसी तरह शुरूआत में पांच से ढाई लाख तक के पैकेज की बात तय हो गई। मंथन की बैठक को जैसे ही खत्म करके में कार्यालय पहुंचा तो संतोष ठाकुर जी छह प्रत्याशियों के पैकेज बुक कराने की एक सूची लेकर मेरे कैबिन में आ गए। इस सूची की फोटो कापी आप  पत्र के साथ संलगन सूची चार में देख सकते हैं। ये पैकेज संतोष ठाकुर और उप मुख्य संवाददाता बिजेंद्र बंसल की युगल जोड़ी  ने पहले से ही फाइनल कर दिए थे। लिहाजा मुझे इन प्रत्याशियों के लिए चंडीगढ़ में बात करने के लिए कहा गया।

खैर किसी तरह बात आगे बढ़ती रही।  इसी सारी भाग-दौड़ के बीच अचानक ही नोएडा में समाचार संपादक कमलेश रघुवंशी ने अड़ंगी लगा दी। जब फरीदाबाद से कुछ प्रत्याशियों के समाचार भेजे गए तो उन्होंने वे छापने से स्पष्ट इंकार कर दिया। उन्होंने मुझे साफ हिदायत दी कि मैं अपना पूरा ध्यान चुनाव की संपादकीय नीति के तहत कवरेज करने पर ही दूं। मुख्य मुद्दे पर आता हूं, तीन-चार दिन की इस आपाधापी के बीच चुनाव मैदान में उतरे अधिकांश प्रत्याशियों के समाचार पैकेज के तहत नहीं छपे। जबकि पैकेज नहीं देने वाले प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के समाचार मंगा-मंगाकर फोटो सहित छापे जाने लगे।

इस स्थिति में पैकेज लेने वाले कई प्रत्याशियों के समर्थकों ने पूरी पैमेंट देने से इंकार कर दिया और सुबह से ही उनके उलाहने सुनने को मिलने लगे। इसी दौरान चंडीगढ़ से दिनेश जी पैमेंट लेने के लिए आए। उनसे बातचीत के दौरान ही उप मुख्य संवाददाता बिजेंद्र बंसल ने पिछले दिनों के दौरान बिना पैकेज के छपे प्रत्याशियों के समाचारों की पूरी फाइल मार्क करके उन्हें दे दी। उनकी इस तत्परता के पीछे साफ था कि कवरेज सही ढंग से नहीं छपने के कारण उनकी युगल जोड़ी को ही ज्यादा नुकसान सहना पढ़ रहा था। युगल जोड़ी की सात अक्टूबर तक एकत्र की गई राशि 11 लाख रुपये थी, जो विज्ञापन के सहयोगी सतीश जी के पास रखी थी। इस राशि की संतोष ठाकुर के हाथ से बनाई गई डिटेल देखें सूची तीन में। बहरहाल मार्क की हुई फाइल के साथ ही दिनेश जी को  20.50 लाख रुपये की एकत्र हुई राशि भी सौंप दी गई। इस राशि की रिसीविंग सूची तीन में देखें। यहां यह भी बता दूं कि इस मार्क की हुई फाइल के कारण ही शायद मैं नोएडा में कुछ लोगों को पहले से भी ज्यादा खटकने लगा था।

इस स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मीनाक्षी जी नोएडा पहुंची। वहां उनकी क्या बात हुई इतना तो मालूम नहीं लेकिन इसके बाद माननीय निशीकांत जी का मुझे फोन आया और उन्होंने पूरे प्रकरण के बारे में पूछा। मैंने बिना किसी लाग लपेट के उन्हें यह भी बता दिया कि प्रत्याशियों से पैसा फरीदाबाद कार्यालय के माध्यम से ही लिया जा रहा है। उन्होंने इस बारे में फिर बात करने के लिए कहा, शायद मीनाक्षी जी उस समय उनके पास ही बैठी थी।

उन्होंने आदेश दिया कि पैकेज लेने वाले प्रत्याशियों के नाम की सूची उन्हें भेजूं। मैं उस समय फरीदाबाद में चुनाव प्रचार के लिए आए पूर्व क्रिकेटर अजहरूद्दीन के दौरे की कवरेज के लिए गया था। इस कवरेज को किए बगैर ही मैं कार्यालय पहुंचा और उन्हें अविलंब सूची भेजी। तीन दिनों की आपाधापी के बीच कंपनी को आधे से अधिक की राशि का नुकसान उठाना पड़ा था। इसलिए चंडीगढ़ से हुई बातचीत में फाइनल हुआ कि जिस भी प्रत्याशी से जो भी मिले ले लो और उनके समाचार छाप दिए जाएंगे। इसमें कोई स्थान तय नहीं था ना और ही कोई दर तय थी।

इसी कारण दो लाख देने वाले लोगों के समाचार भी कई बार पांच लाख रूपये देने वालों से बढ़े छप जाते थे और हम किसी तरह प्रत्याशियों को तर्क देकर अपना पीछा छुड़ाने का प्रयास करते थे। बहरहाल चुनाव के अंत तक पहुंचते-पहुंचते चोरी का माल,लाठियों के गज का बचपन से पढ़ा जा रहा मुहावरा मुझे अपने सामने ही चरितार्थ होता दिखाई देने लगा था।

पूरे घटनाक्रम का निचोड़ आखिरकार यही रहा कि वर्चस्व की लड़ाई, माल बटोरने की भाग-दौड़ और लोकतंत्र की रक्षा करने के कई दायित्व एक साथ पूरे करते हुए मैंने 37.75 लाख रुपये की राशि चंडीगढ़ कार्यालय को सौंप दी। लोकसभा चुनाव के विपरीत इसमें से मेहनत (वैसे कमीशन ज्यादा उपयुक्त शब्द है) और भाग-दौड़ की एवज में एक धेला भी नसीब नहीं हुआ। फिलहाल कुछ घटनाक्रमों को जोड़ रहा हूं उसे एक कड़ी में पिरोने के बाद आपके साथ फिर से मुखातिब होऊंगा। वैसे आपको बता दूं कि दैनिक जागरण में किस तरह से भ्रष्टाचार की दलदल फैली हुई है, यह अभी सामने नहीं आ रही है। बहरहाल हाल में मिली कुछ जानकारियों  की बदौलत हर विभाग में बरती जा रही अनियमितताओं का आलम जानकर दिल यह कहने को मजबूर है कि :

वीरान गुलिस्तां करने को  बस एक ही उल्लू काफी है।

हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?

आपका

राकेश शर्मा

पूर्व मुख्य संवाददाता,

दैनिक जागरण।

Comments on “जागरण ने चोरी का माल लाठियों के गज बेचा

  • Sanjay Bhati Editor SUPREME NEWS says:

    besarmo par koi asar nahi ho raha .jagran me to patarkaro se ughai /vasuli ka dhanda chal raha hai par baki is sach ko kyo nahi dikhate khan hai desh bhar k tv chanel or akhbar .kaya sab k sab eak jase hai ? yesvant jee ,rakesh jee Supreme News k front page par chapa hai . pure desh me koi imandar adhakri hai k nahi koi karwahi nahi kar raha . rakess bhai Cort me dekhege lagta hai or to koi sune wala nahi hai . 100 karor janta ka ulu banane me lage hai. jagegi janta jagegi lage raho sathio jo bhi hoga dekha jayega .

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  • Baiju Gupta says:

    Danik jagran pahle se hi add ke liye mashhoor raha hai ye bat khu; kar samne ayi hai to koi chaukne vali bat nahi hai……. Yhan to kuch HEAD yise hai ki add ki wajah se hi salo sal apni kursi par bane hue hai………..>:

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  • Rakesh ji … ye to company decide kare gyee ki kise kya karna hain.. per jab patrkar . samachar se jyada , vigyapan pe dhyan dete hain….. aap ki bato se lagta hain…khisyani bili khambha noche…. koi baat nhi election to 5 saal pe attte hi rehete hain usme kama ligiyega

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  • ye sab brijendra bansal ko bachane ki chaal hain,,,,, rakesh ji aur brijendra bansal chor chor mausre bhai hain…….. jis tarah se brijender bansal ne aapko use kiya hain usse to yahi lagta hain ki woh faridabad ka manager adminstrator banaa chata hain……

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  • rakeshji it is better to lodge the FIR against the responsibles otherwise journalists will become the middlemen of the greedy owners and our noble profassional will become the lootwork. p sainath and others are doing something. let us support them . it is unfortunate that Press council of India surrendered before the owners lobby in the matter of paid news and it did not disclosed the name of players who are stabber too to our freternitty. yashwant ji let us do something to expose the people who benifited feom paid news.

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