‘लाठीचार्ज’ की जगह यह क्या छप गया!

डेस्क वाले बच गए, लिखने वाला रिपोर्टर सस्पेंड : राष्ट्रीय सहारा की एक और खबर सुनिए. पटना में इस अखबार में एक खबर में ‘लाठीचार्ज’ की जगह ‘लंडचार्ज’ छप जाने से बवाल मचा हुआ है. खबर लिखने वाले रिपोर्टर को सस्पेंड कर दिया गया है.

मामला 25 अप्रैल का है. सिटी एडिशन में फर्स्ट पेज पर नए बने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीपी ठाकुर के बारे में मुख्य खबर प्रकाशित हुई और इससे संबंधित साइड स्टोरी पेज नंबर दो पर. साइड स्टोरी लिखने के बारे में सुबह की संपादकीय मीटिंग में संपादक की मौजूदगी में तय हुआ था. रिपोर्टर से कहा गया कि वह नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी ठाकुर के सामने क्या-क्या चुनौतियां हैं, इसके बारे में खबर लिखे. इसी शीर्षक ‘प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के समक्ष हैं चुनौतियां’ से खबर छपी भी. इसी खबर में एक जगह लिखा गया- ”…अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर पुलिस लंडचार्ज…..”. पर कायदे से यहां होना चाहिए था ‘लाठीचार्ज’.

सुबह अखबार आते ही पूरे दफ्तर में हड़कंप मच गया. भाजपा कार्यालय से नेताओं के फोन आने लगे. मामला राष्ट्रीय सहारा के दिल्ली आफिस तक भी पहुंच गया. ऊपर से तत्काल कार्यवाही के आदेश आ गए. नाप दिया गया बेचार रिपोर्टर. रिपोर्टर का नाम है पंकज कुमार सिंह. पंकज के बारे में कहा जाता है कि उनकी कापी में आमतौर पर किसी को एडिट करने की जरूरत नहीं पड़ती इसीलिए चार-चार चेकप्वाइंट से उनकी कापी गुजरी पर किसी को ‘लंडचार्ज’ नजर नहीं आया. संपादक हरीश पाठक खुद साहित्यकार टाइप आदमी हैं. उन्होंने भी खबर को छपने से पहले देखा. डेस्क वालों ने भी देखा-सुना. पर किसी को भान नहीं हुआ कि ऐसी गलती जा रही है. पंकज का कहना है कि उसे भी नहीं पता कि यह चूक कैसे हो गई. पंकज को भी इस चूक पर अफसोस है. लेकिन लोग सवाल यह उठा रहे हैं कि दंड पंकज को क्यों दिया गया? डेस्क वाले सस्पेंड किए जाने चाहिए थे. आखिर रिपोर्टर की कापी को एडिट करने के लिए ही तो डेस्क वाले रखे जाते हैं. मजेदार यह देखिए की पंकज को उस खबर पर सस्पेंड किया गया जिसे पढ़कर खुद संपादक ने बाईलाइन देने का आदेश दिया.

वैसे, अखबारों में इस तरह की मानवीय गलती हो जाना कोई नई बात नहीं है. एक प्रकरण बनारस का है. अमर उजाला अखबार लांच हो चुका था. एक संपादक बदले जा चुके थे. दूसरे संपादक के रूप में संजीव क्षितिज बनारस में थे. एक दिन सुबह-सुबह खेल पेज पर लीड हेडिंग कुछ यूं प्रकट हुई- ‘सुधरते नहीं दिख रहे हैं सौरव गांगुली के बुर ग्रह.’ पता चला कि यह गलती जल्दबाजी में हेडिंग बदलने के कारण हुई. खेल पेज आखिरी पेज था जो फंसा हुआ था. जल्दी छोड़ने का दबाव था. उप संपादक ने हेडिंग बदलने का कहा और आपरेटर ने बदल दिया लेकिन जल्दबाजी में ‘बुरे’ में ‘र’ पर मात्रा लगाना रह गया. अगले दिन अखबार में खेद प्रकट किया गया.

एक सज्जन ने बताया कि दैनिक जागरण, चंदौली (वाराणसी) एडिशन में फोटो कैप्शन में ‘चांदनी देवी’ की जगह ‘चोदनी देवी’ प्रकाशित हो गया था. यह घटना छह महीने पहले की है. इस गल्ती के लिए चंदौली के फोटोग्राफर को जिम्मेदार माना गया. इसलिए माना गया क्योंकि उसी ने फोटो के साथ कैप्शन लिखकर भेजा था और ‘आंख से अंधे और बुद्धि से पैदल’ डेस्कवालों ने हूबहू वही पब्लिश कर दिया.

अर्थ का अनर्थ करने वाली मानवीय गल्ती का कोई प्रकरण या घटनाक्रम अगर आपको भी याद आ रहा हो तो नीचे कमेंट के डब्बे में लिख सकते हैं

Comments on “‘लाठीचार्ज’ की जगह यह क्या छप गया!

  • aajkal public agenda me kaam kar rahe nadim akhtar ne prabhat khabar me munda ke interview me bure ki jagha bur chap diya tha. halaki usme nadeem ki galti kam kisi ki sararat bati ja rahe thi.

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  • प्रिय यशवंत जी,
    राष्ट्रीय सहारा से जो हुआ वो हुआ लेकिन आपके पोर्टल पर इस तरह के शब्द लिखे जाएंगे जो असभ्यता की पराकाष्ठा पार कर जाते हों इसकी उम्मीद कतई न थी. राष्ट्रीय सहारा ने तो गलती से लिखा पर आपके पोर्टल पर तो जानबूझ कर लिखा गया. किसी की गलती बताने का मुझे तो ये बड़ा असभ्य तरीका लगा

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  • Bahot bhadiya Yashwant bhai , Mann prasann ho gaya khabar padhkar, per galat aadmi ko saspend karney sey dukh bhi huwa.

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  • ajeet kumar says:

    jab 11 baje chhutne wale page ki khabare editor 10 baje tak apni jeb me rakhega to yahi hoga na. yaha kam karne wale batate hai ki editor harish pathak ko daily news paper ka koyee gyan nahi hai. samay par desk ko khabare nahi dete aur jab page late hota hai to chillate hai.

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  • Prakash Roy says:

    यशवंत जी, क्‍या इस खबर को इतनी प्राथि‍मकता से प्रकाशि‍त करना जरूरी था ? कम से कम आप तो शब्‍द और पत्र का सम्‍मान बचा ले जाते !

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  • Pradeep gaur says:

    If you are daily reader of news paper. you can see lot’s of print mistake. It’s not big issue. If you want punished them. So You can fined and other charges put of the guys.you don’t need to fire him.

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  • sachin kumar says:

    ak bar rojana sabkikhar me fron page par mayawati ki jagah maywati chhap gaya aur hamre edito usko bade hi gaur se pad liye pad pakad nahi paye aur us copy ko five bar bhi pada gaya fir bhi koi nahi pakad paya to ias tarah galti har kisi se bhi ho sakta ahi isme pankaj ji ko saspend nahi karna chahiye

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  • arjun singh says:

    aisa si hota rahega jab tak media me logo ko unki kabliyat nahi balki unke jack ke dam par rkha jayega. aaj media me kam karne wale telented logo ki kami nahi lekin jin logo ke pas telent hota hai unke pas sourse nahi hoti aur woh log piche reh jate hai Rastriya sahara jaise pratisthid news paper me is tarha se itni badi galti ka hona sach me sahara news paper ke liye bahut hi sharm ki baat hai. aur is ke liye dosi keval reporter hi nahi balki wo editor bhi jis ne itni badi galti hone di kisi bhi paper ya magazine me sampadk ki bhumika bahut imp. hoti hai aur rastriya sahara to hamare desh ka bahut hi jana mana paper hai phir ye galti kaise ho gayi. shame on you to all of u who write this stupid mistake

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  • Anshul Srivastava Reporter Akela Tv says:

    Pankaj Ji aap Ki Galti nhi hai aap se mistake ho gyi to desk wale kya kar rahe the wo haram ki tankha lete hai isme proof reader aur editor sabhi ko napna chahiye apko kyo kuch kaha gya aapki galti ye hai ki aapne galat likha but isme jo office staaf hai uski 100% galti hai aur unko kuch nhi gya

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  • suresh pandey says:

    are bhai sahara wale varanasi mein bhee isi thrh ka gul bahut pahle khila chuke hain. yahan jila panchayt adyksh ke liye ashobhniye chp gaya tha.

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  • are bhaya agr SAHARA wale ese krenge to bahyaa hum to BESAHARAA ho jayenge
    ese kehte hai sawdaani hati durghatna ghati

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  • sagarbandhu says:

    kisi ki galati ko lekar is tarah majak nahi banana chahiya. akhabari duniya me afra-tafari ka mahaul hota hai. aise me kuch bhi chhap jana sambhav hai. yedi gambhirata se koi bhi akhabar pdhenga to pata chalega ki har akhbar me koi-n-koi galti munh chidha rahi hai. kam se kam heading me bhadda shabd n chhape, iske liye jimmedar sub-editor ko sharm ka ahsas jrur karwana chahie.

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  • It was shamefull for a news paper. But you should avoid taking notice of such adult words on this portal, as it is also a newsportal not different from a newspaper. If it was neccesary then indirectly would have been writen

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  • ek majedar dhatna muzaffarpur(bihar)ki bhi hai.1998 ki baat hai jab waha computer reporter nahi janta tha..matter type operator karta tha.hindustan paper me bhi operator jha jee ne bhi ek khabar ki heading aise lagaya.ling fail hone se vaishali express 3 ghante let,jabki khabar thi ki link fail hone se…..bechare jha jee the so bach gaye aur kaphi din tak logo ne maja unse uthhaya.

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  • pankaj kumar sharma says:

    yashwantji sabse pehle main aapko doshi maanta hoon, jo ki sab kuch jaante hue bhi itna ganda article publish kiya………. patna mein rashtra sahara ke patrakar ne jo kiya wo to jane-anjane mein hua hai……. per aapne to apne popularity ke liyesaari hadd paar kar di hai…… mujhe pata hai aapne bhi mass com kiya hai aur kafi struggle karke is mukaam tak pahunchey hai…… itne badey mukaam tak pahunchey ke baad aapse is terah ke bakwaas aur behuda article k chhapney ki maine kabhi ummeed bhi nahi ki hai….. aap bhi media law and ethics ko behtar tarike se samjhtey honge…….. per yahan aapne to media law aur ethics ki buri tarike se dhajjian udda di hai….. aap agey se aise behuda article apne bhadas mein nahi publish karenge….. waise main aapse kafi chhota hooon, per jo galat uske liye main apko bolunga zarur…….

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  • यशवंत says:

    भाइयों, कई लोग खफा हैं इस बात से कि यह खबर क्यों पब्लिश की गई और पब्लिश की गई तो उन गलत शब्दों को क्यों पब्लिश किया गया.
    मैं हो सकता हूं कि गलत होऊं पर अपनी बात रख रहा हूं.
    यह मीडिया पोर्टल आम जन से जुड़ा पोर्टल नहीं बल्कि मीडिया में काम करने वालो लोगों तक पहुंचने वाला और उनके जीवन के दुखों-सुखों, हलचलों को बताने वाला पोर्टल है. कई बार काम करते हुए नादानियों गल्तियां गड़बड़ियां अनजाने में हो जाया करती हैं इसीलिए इसे मानवीय चूक कहते हैं. पर हम मानवीय चूकों पर बात नहीं करेंगे तो ऐसी चूकों का प्रतिशत ज्यादा बढ़ेगा.
    दूसरी बात, खबर सिर्फ एक घटना पर केंद्रित नहीं है बल्कि इस ट्रेंड पर केंद्रित है. इसीलिए कई उदाहरण दिए गए हैं और लोगों से अपील भी किया गया है कि उनके जीवन में भी कहीं ऐसा कुछ हुआ हो तो बताएं. इससे जो एक जागरुकता मीडिया के साथियों में फैलेगी, उससे इन गल्तियों से बचा जा सकेगा. दूसरे, ऐसे मामलों में गल्ती का निर्धारण भी महत्वपूर्ण है. एक सिस्टम काम करता है अखबारों में इसलिए हर गल्ती के लिए सही दोषी की शिनाख्त की जानी चाहिए. रही बात आपत्तिजनक शब्द प्रकाशित करने की तो यह देखा जाना चाहिए यह किस संदर्भ में प्रकाशित किया गया है. संदर्भ व उद्देश्य पवित्र हैं तो अश्लीलता नहीं दिखेगी. पर हम हिंदी समाज के लोग कुछ शब्दों को लेकर कुंठा की हद तक पजेसिव हैं. इससे मुक्त होना चाहिए. अंग्रेजी में फक शब्द जिस धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है उसे हम बुरा नहीं मानते क्योंकि वह अंग्रेजी शब्द है पर यही अगर कोई हिंदी में इस्तेमाल कर दे तो उसका हम जान मार डालेंगे. यह दोहरी नैतिकता क्यों. कहा भी गया है कि अश्लीलता निगाह में होती है. एक संत के लिए अश्लीलता के मायने अलग होंगे और दुनियादार के लिए अलग. एक दिगंबर साधु नंगा होता है पर उसे हममें से कई लोग अश्लील कह सकते हैं लेकिन साधु के लिए वह अश्लीलता नहीं है बल्कि सहजता है.
    मेरे कहने का आशय यह है कि किसी भी चीज को कट्टरपंथी नजरिए व बने बनाए फ्रेम में नहीं देखना चाहिए. हर विषय के कई पहलू होते हैं. जो लोग इस खबर से पाजिटिव संदेश नहीं ग्रहण कर पा रहे हैं, वे अश्लील व श्लील शब्द पर अटके हुए हैं. संदेश यही है कि हमें अपना काम बहुत सावधानी से करना चाहिए ताकि गडबड़ी न्यूनतम हो. यह भी सच है कि गड़बड़ियां इंसान ही करता है. मशीन से हम गड़बड़ी की उम्मीद बिलकुल नहीं करते.
    उम्मीद करता हूं कि जिन लोगों को इस खबर के छपने से उनकी भावना को ठेस पहुंचने जैसा कुछ हुआ है तो वो माफ करेंगे.
    आभार
    यशवंत
    एडिटर
    भड़ास4मीडिया

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  • नरेश कुमार गुप्ता says:

    खबर में गलती से लाठी की जगह जो शब्द छपा वही भड़ास 4 मीडिया के लिए खबर है। वरना रोज देश भर के अखबारों में लाखों खबरें छपती हैं। ऐसे में उस एक शब्द को ही नहीं लिखा जाए तो भड़ास के लिए खबर क्या बनती? इसके लिए यशवंत जी को आगरा और रांची जाने की सलाह देने वालों को बताना जरूरी है कि इस साइट पर बच्चों के लिए कुछ भी नहीं होता है। भले ही यह केवल वयस्कों के लिए नहीं है पर बच्चों को यहां आने की भी क्या जरूरत है। और खबर क्या होती है बताने वालों को याद दिलाना वाजिब होगा कि कुत्ता आदमी को काटे तो यह खबर है आदमी कुत्ते को काटे तभी खबर बनती है और आपलोग चाहेंगे कि उस आदमी का नाम न दिया जाए – तो हो गई रिपोर्टिंग।

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  • अरे भाई जब फिल्मों मे मां बहन होती है तो कोई कुछ नही कहता सब को मजा आता है तो इसे भी सहो … नया युग है नया जमाना है आखिर हमने जो बोया है वही तो काटेंगे अब दर्द किस बात का मजे लो……..

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  • chaliye, heading to badal gayi. thanks bhadas4media. ye khabar yaha publish karna bilkul galat nahi hai. jo loag ese galat bata rahe hai ve apna elaaz agra-ranchi mei karayen.
    vishesh

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  • ambrish anand says:

    mai yaha yai kahna cahata hu ki ab press mai sirf boys hi nahi giral bhi kam kari hai. aur vo bhi apka isko dikhti hai. aisi khabar na hi prakasit kary to acha hoga. thanks

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  • M Sadanand says:

    A few months ago in Sahara Time another publication of Sahara Group, BJP’s new President’ s name was spelled as ‘Gadhakari’ instead of Gadkari, and not only once but 16 times in a piece that was barely 700 words long. And the Associate Editor who was incharge in those days is now expecting a hefty increment and probably promotion. Her protege is a well read person for he lifts stories and at times supposedly one-to-one interviews from different sources. But kya karen bhai naukari to karni hai.

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  • nitin sharma says:

    sir, galti to ho hi jati hai is lekh main reporter ki kya galti hai desk walo ko check karna caheyen tha jo reporter per karwai hue hau vah najayaj hai

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  • जब अखबार में छप ही गया तो इन्होनें छाप के कौन सा गुनाह कर दिया???

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  • Vibhor, Nainital says:

    is ghatana se do baaten ujagar ho rahee hain. Pahlee yah ki kahin n kahin reportar ke dimaag main wah awanchhit shabd chal raha tha. Jo buddhijivee maane jaane waale patrakarita jagat ke logon ke badlte dimaang ka parichayak hai. Doosara aakhir main pege nikalne kee jaldee, jis karan n to sampadak aur n hee desk use dekh paayee. lekin laatheecharge kee jagah aisa bina milta julta shabd likhana waakayee chintaajanak hai, ismain kewal particular akhbaar ko dosh dena theek nahin hai, Aisa kahin bhee ho sakta hai.
    yahan to log jaan boojh kar galtiyan karte hain, aur fir galtee ka sudhaar karne kee bajaaye use besharmee se dohrate bhee hain, Jaise Dainik Jagran ke Nainital Edition ne kal 27 April ke ank main nainital main huee hatya ke mritak ka naam “shajaad” kee jagah “shamshad” chhap diya, chaliye yahan tak galtee hona to theek hai, Aaj 28 ke ank main Police kee vigyapti main saaf saaf naam aane ke baawjood bhee akhbaar apnee galtee dohra raha hai.

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  • विनोद जैन says:

    य़शवंत जी अश्लीलता,आ्म सामाजिक कुंठा और नजरिए पर आपका भाषण पढ़ा, लिखा अच्छा है लेकिन सहमत नहीं हुआ जा सकता. नागा साधु का उदाहरण देते हुए अश्लीलता को देखने वाले तक सीमित कर दिया आपने अच्छा है लेकिन हम पत्रकार हैं और अगर वाकई हैं तो शब्दों से खेलना भी खूब जानते हैं क्या आप इन शब्दों को किसी और रूप में नहीं छाप सकते थे (मेरा मतलब पर्यायवाची से है) जिससे बिना अर्थ बदले आपकी खबर न सिर्फ दमदार हो जाती बल्कि आप पर ऐसे आरोप भी न लगते. ध्यान रखिए अगर आप कहते हैं कि हां ऐसा हो सकता है तो आपका लिखा भाषण बिलकुल बकवास हो जाएगा और अगर कहते हैं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते तो माफ कीजिए ये पोर्टल बंद कीजिए और कोई और काम ढूंढिए आपको पत्रकारों की पत्रकारिता करने का कोई हक नहीं. आपके जवाब की प्रतीक्षा में……..विनोद जैन

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  • vijay singh says:

    kuch bhi galat nahi likha hai, iss khabar me. jo chij pathako ko atani hai. use kliyar karne k liye vah shabd likhna jaruri tha.

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  • Chandan Singh (Patna) says:

    Yashwant J

    Galtiya Hindi Paper mai koi am bat nahi hai… lekin gultia esi nahi honi chahie jisse koi bibad utpan ho.. Sahara ne jo chhapa use apne es portal mai published kiya ye achhi bat hai esi padkar kam se kam media walo ka dhiyan kendrit hoga…..

    Bat un aptti janak Sabdo ki jise apne published kia… ye word ko agar hum galt view se dekhenge to galt hai anytha nahi….. ese aki sabdo ka use hum television ke Vigyapan mai sunte hai or dekhte hai…..

    Jin sajano ko Bura lag raha hai unki mansikta ya eye frame un galat sabdo ki kendrit ho rahi hai….. ya unki soj undevelop hai……

    Take care

    Reply
  • vijay pal singh says:

    अरे आप सभी को ये समझना चाहिए कि इस पोर्टल का आम आदमी नही बल्कि हम ख़ास जिन्हें हम लोकतंत्र का चौथा स्तंभ समझने की भूल करते है उनके लिए हैं….और ऐसी गलतियां गाहे-बगाहे हो जाती हैं इसलिए हम सभी को इस गलती को एक सबक के तौर पर लेना चाहिए….और ऐसी मानवीय भूल सिर्फ अखबार ही नही टीवी में भी होती हैं….मुझे याद हैं एक वाक्या जब मैं सहारा समय यूपी में हुआ करता तो एक महिला एंकर ने खेल की खबरों के दौरान लंबी कूद की जगह पढ़ दिया था लंबी चू?….तो ऐसी गलतियां हो जाती हैं….

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  • बात जबलपुर के अखबार नवीन दुनिया की है. इसके संपादक हुआ करते थे मुन्दर शर्मा. बड़े ही धाकड़ और वरिष्ठ पत्रकार. उनके ही अख़बार में प्रिंट लाइन में संपादक का नाम ही गलत छपता रहा मुन्दर शर्मा की जगह “बन्दर शर्मा” और ऐसा कोई एक दो दिन नहीं दो महीने तक होता रहा. जब किसी पत्रकार ने मुन्दर शर्मा की चुटकी लेते हुए कहा की आजकल आपके अखबार के संपादक बदल गए हैं क्या? तो मुन्दर शर्मा ने कहा नहीं तो उस पत्रकार ने बताया की प्रिंट लाइन में तो किसी और का नाम जा रहा है. तब गलती का खुलासा हुआ और मुन्दर शर्मा का गुस्सा आसमान पर था.

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  • anupnarayan singh says:

    pankaj ko bali ka bakara banaya gaya hai sahara mangment ko ess par bichar karna chahya anoop n singh 9934651533

    Reply
  • mai yaswant ji ke sath hu kuki koi bhi galti ko batane wala hi sachcha mitra hota hai aur media me media ke khabar nikalne wale yaswant ji ne sirf ek galti ko batane ki bat nahi kar rahe hai balki es tarah ki galti ko sudharne ke liye baithe logo ke kamchori ko dikhaya hai aur jaldibaji me galti ko na karne ki salah di hai yeha media ki galti aur uthan ki khabar chapti hai so media ko chatkara banane ke liye sabhi yehi karte hai agar khabar me chat pata sabad nahi rahega to isse padega kaun———aap bhi nahi padege kuyn yaswant ji hek kahi na

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  • ranjan das says:

    khbar dikhane se phle ye to sochna th ki gltia insano se hi hoti hai. aur gltio se hi insan sikhta hai. is khbr ko prne k bad hsi jrur aye aur dukh bhi hua. akhbaro me gltia jrur hoti hai magar aisa phli bar dekah. chlo khbr likhte bqt dhyan pura ab likhne pr rhega. aur dua krte hai aage aisa kuch prne ko na mile.

    Reply
  • AMARJEET SHARMA says:

    मै यसवंत जी के साथ हु क्यूँकी कोई भी गलती को बताने वाला ही सच्चा मित्र होता है और मीडिया में मीडिया के खबर निकलने वाले यसवंत जी ने सिर्फ एक गलती को बताने की बात नहीं कर रहे है बल्कि इस तरह की गलती को सुधरने के लिए बैठे लोगो के कामचोरी को दिखाया है और जल्दीबाजी में गलती को न करने की सलाह दी है यह मीडिया की गलती और उत्थान की खबर चपटी है सो मीडिया को चटकारा बनाने के लिए सभी यही करते है अगर खबर में चटपट शब्द नहीं रहेगा तो इससे पढ़ेगा कौन ———आप लोग भी नहीं पड़ेगे ——– क्यूँ यसवंत जी तहिक कही न मीडिया खबरी लाल जी

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  • yashwantwa sahi hai.
    jo chhapa wo hindi patrakarita ke liye itihas ban chuka hai.
    ab chhipakar kya kijiega?

    rashtriya sahara main, suna hai, khabar ke shabdon ko badalkar, ese hi shabdon ko, newsroom mein zor-zor se parhkar sunane ki purani rawayat hai. suna hai, wahan esa chhapa bhi hai. magar tab yeh kam operator page banate hue karte the. ab shayad operator nahin hote. copy editor khud page banate hain. ho sakta hai kuchh paginator ab sub editor ho gaye hon aur purani aadaton se baz naa aa rahe hon.

    khuda maaf kare.

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  • aapne yah khabr publish karke bahut accha kiya hai jisse hame likhte samay or satark ho jaenge yadi koi ise ashleel kahta hai to vah jaroor aapse jalta hoga ya nadan hoga

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  • rajesh vajpayee unnao says:

    sha..bas yashwantji. kam say kam ek aapki he site hai jissay bade bade swanaamdhanya naamcheen khatmal ab maaray dar kay kalamkaro ka shoshad patrakaro kay baykhabar honay par he kartein hai. vino jain ki abhi itni badi position nahi ho gayi hai jo wah aap dwara mahaj laparwahi ya chook ki taraf sirf kalamkaro ko aagah karneie kay udeshay say likhi gayi vastawik sabdawali ko asabha karar dey.yeh portal general public kay liye nahi balki jagrook va samay kay saath chalnein wale joshiley patrakaro ka hai isliye bhadas nein patrakaro ko sajag va likhatey samay chaukanaa rahnein ka mantra dya hai.vino jain ko sabd kay praog par na jakar uskay vastavik pravog ki anivarta ko samaghnein ki koshish karna chahiye tab phir unka gyanpatal vikshit hoga aur wah yashwant va bhadas kay marm ko samajh sakaygay.

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  • यशवंत जी आप से ऐसी उम्मीद नही थी..अगर अखबार वालों से गलती हो गई थी तो कम से का आप तो ऐसा नहीं करते..आप ने भी बेशर्मी की इंतेहा कर दी…

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  • Salman Ahmed says:

    Respected Yashwant Bhai,
    I am fine and you must be same.
    Bhadas4Media is getting popularity day after day, and every next day is better than past day. No doubt this website has become very famous in very little days in India and abroad.
    But before yesterday heading of one story made me upset and I was not able to defend my favorite site before my friends. The heading was about the news published in Sahara daily Patna. Really this mistake was the outcome of disproof reading or discomposing, but the reporter has been made escape goat.
    Bhai, the wrong word published in the paper by mistake, but you published it knowingly, so this is the biggest blunder of journalism, and this blunder is not suitable the journalist like you.
    I hope this mistake will make you aware in future, because the mistakes make the men perfect.
    This is good that you changed your head line after reactions.
    As a well wisher and as a junior I have one request for you, if it is acceptable for you.
    Please publish one apologize note. By the apologize note we can defend ourselves in future, and our rivals will be not able to use this mistake to defame me.
    You can say the issue has become cold and old, so no need to publish the apologize note, but you should know the rivals are waiting for like these opportunities. I think the apologize note will be beneficial for Bhadas4Media, for you and for all of us.
    This is my request, if you can change it into action that will be good and if you can not do that is also fine.
    Aap Ka Bhai
    Salman Ahmed

    Reply
  • Piush Jain says:

    khabar main lathi ki jagah jo chapa wahi to bhadas ke liye khabar hai. warna kutte ne aadmi ko kata is tarah ki khabren to punjab kesari jaise national samachar patr main har roj chapti hi rehti hain.
    Piush Jain
    Ambala City.

    Reply
  • yashwnt jee sachmuch galtiyon se bachaw karne ka kya upay sujhaya hai aapne.patrakar bade sammanit log hote hain. lekin jis ashlil shabd ko chhapkar aap rating badhana chahte hain kya woh sahi hai? aatmchintan karke dekhiye.lagta haikuchh dino men log rating ke chakkar men mastram ki kitaben bhi aapne sammanit portalo par jari karenge aur mastram ko mahan aur lokpriya sahityakar batayenge.aap jaise piyyakaron se logon ko isse adhik ummid rakhna bemani hai.

    Reply
  • manish mehta says:

    धनबाद (झारखण्ड) में एक जगह है- जोड़ापोखर. इस जगह से सम्बंधित एक खबर ‘हिंदुस्तान’ में छपी थी. लेकिन डेस्क की गलती से इस जगह का नाम छाप गया था- लौड़ापोखर. इस गलती पर बात-बहस जरुर हुई थी. मगर किसी पर कार्यवाई नहीं हुई. रिपोर्टर से कुछ कहने की जगह डेस्क वालो को ही खरी-खोटी सुना कर छोड़ दिया गया था. मगर राष्ट्रीय सहारा ने गलत तरीके से एक निर्दोष को सूली पर चढ़ा दिया है.
    मनीष कुमार

    Reply
  • harivansh sharma says:

    धनबाद (झारखण्ड) में एक जगह है- जोड़ापोखर. इस जगह से सम्बंधित एक खबर ‘हिंदुस्तान’ में छपी थी. लेकिन डेस्क की गलती से इस जगह का नाम छाप गया था- लौड़ापोखर. इस गलती पर बात-बहस जरुर हुई थी. मगर किसी पर कार्यवाई नहीं हुई. रिपोर्टर से कुछ कहने की जगह डेस्क वालो को ही खरी-खोटी सुना कर छोड़ दिया गया था. मगर राष्ट्रीय सहारा ने गलत तरीके से एक निर्दोष को सूली पर चढ़ा दिया है.

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  • भूखन दा says:

    यशवंत भाई ई खबर पढ़ के तो मस्तराम की किताब बाला मजा आ गया। ऐसी खबरें छापते रहिये। दूसरे पोर्न स्टोरी वाली साईट पर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

    Reply
  • भूखन दा says:

    यशवंत भाई ई खबर पढ़ के तो मस्तराम के किताब वाला मजा आ गया।

    Reply
  • Ira sonbhadra says:

    Not only reporters are responsible for such news diverted from its original meanings but it should include all the seniors where the news goes through
    sir, we just want to know where mr. editor has gone to whom finally the news is handed over. I want to say editor mr. pathak should be responsible for such blunders and also his senior mr. ranvijay singh who appointed such a irresponsible EDITOR. As far Mr. Pathak is concerned, I just want to know he is the same person who sexually harassed a female photographer, UNGER(BIHAR) to that extent she committed suicide, resulting he was dismissed by DAINIK HINDUSTAN in this allegation ?
    IRA SONBHADRA
    BHAGALPUR,BIHAR

    Reply
  • kamal.kashyap says:

    maniye yashwant ji kisi newspaper main galat chap jaye to babal aur aapki site par ho to majedar… sir apni site ek jimmedar site hai aap se nivedan hai ki apne yha bhi sabdo ko edit kiya jye….. kamal kashyap

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  • sukhvinder saini says:

    Yashwant ji Jo aapne chapa vo Sahi tha Ya galt Main Ye nahi Janta. Lakin us per jo bhas ho rahi wo thik hai. Kyonki mera manna hai ki jis khabar per koi comment na ho wo Khabar hi nahi hoti.

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  • Dilip singh sikarwar says:

    mughe yad aaya. bat yhi koi 6-7 mah purani hai. bhopal-delhi se prakashit samay jagat ki ek khabar me chandel k sthan pr chu….shesh yathawat prakashit ho gya tha. mmaine is bare me sampadak ko bhi btaya tha.- Dilip sikarwar-9425002916

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  • YASHWANT BHAI- APKI TAREEF ME 1 SHER.( JAISA LIKHTE HAIN LIKHTE RAHIYE. JITNE COMMENT KARNE WALE SAMNE AAI HAIN.KASH VASTOVE ME AISA BARABAR KARTE TO DESH KE BHRASHTACHAR ME KUCHH KAMI ZAROOR HO JATI) …Dande se ya joote se bhale maar kahunga. Sach baat ko 1 bar kya 100 bar kahunga. Tum dhotee ko lungi agar kahte ho to kaho. Pagal hun mai janghiya ko jo salwar kahunga.

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