मीडिया 75 फीसदी भारतीयों से दूर हुआ : साईनाथ

: पत्रकार खुद को पतित न करें, हालात बदलने में लगे लोगों-संगठनों का सपोर्ट करें : पी साईनाथ ने पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कई ऐसी बातें कहीं जिससे मीडिया इंडस्ट्री की दशा-दिशा के बारे में रियलिस्टिक समझ विकसित करने में मदद मिलती है. उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री के लिए एकाधिकार रोधी विधेयक की मांग की. वरिष्ठ पत्रकार पी. साईंनाथ कहते हैं कि मीडिया समूह बहुत तेजी से कारपोरेट वर्ल्ड का हिस्सा बनते जा रहे हैं.

ऐसे में उनके लिए भी वही सब नियम-कायदे रखने चाहिए, जैसे नियम कायदे कानून अन्य कम्पनियों के लिए बने हुए हैं. साईनाथ के मुताबिक पेड न्यूज से लड़ने की दिशा में पहला कदम एकाधिकार रोधी विधेयक लाना का होना चाहिए जिससे मीडिया जगत की कम्पनियों को ऐसे निवेश करने से रोकता हो, जिससे हितों का टकराव होता है. साईनाथ शुक्रवार को दिल्ली में पेड न्यूज विषयक व्याख्यान में बोल रहे थे. दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की ओर से आयोजित व्याख्यान में साईनाथ ने कहा कि धन देकर विज्ञापननुमा समाचार लगवाना बिजनेस के अनैतिक तौर-तरीकों का नतीजा है. कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित व्याख्यान में प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ के ग्रामीण मामलों के संपादक पी साईनाथ का किसान-मजदूर-गरीब के प्रति मीडिया की उपेक्षा के बारे में कहना है कि इन्हें खुद से अलग करके मीडिया वालों ने 78 फीसदी भारत को खुद से दूर कर लिया है. उन्होंने कहा कि अब कोई अखबार या मीडिया समूह खेती व मजदूरों की हालत की रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों की नियुक्ति नहीं करता.

साईनाथ के मुताबिक मीडिया की कंपनियों ने गैर-मीडिया क्षेत्रों में जमकर निवेश किया है. मीडिया कंपनियों की गैर-मीडिया कंपनियों के बीच तालमेल हो चुका है, समझौता हो चुका है. इसी कारण बड़े घपले घोटाले की खबरें नहीं छपतीं. कई मीडिया कंपनियां तो गैर मीडिया कंपनियों के शेयर इस आधार पर ले लेती हैं कि उनके खिलाफ नकारात्मक खबरें नहीं छपेंगी, समय-समय पर उनके विज्ञापन फ्री में छापे जाएंगे. बिजनेस लीडर्स अवार्डों पर व्यंग्य करते हुए साईनाथ बोले कि मीडिया व गैर मीडिया कंपनियों के बीच अनैतिक तालमेल का नतीजा हैं ये एवार्ड जहां दोनों एक दूसरे की पीठ थपथपाते दिखते हैं. ये मीडिया वाले हेल्थ, सोशल वर्क आदि क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को एवार्ड नहीं देते क्योंकि इन्हें एवार्ड देने से मीडिया कंपनियों को कोई फायदा मिलता नहीं दिखता. मीडिया कंपनियों के नायक सिर्फ बिजनेस दिलाने वाले लोग हो गए हैं.

न्यूज चैनलों पर पर दिखाए जाने वाले प्रमोशनल प्रोग्रामों की भी साईनाथ ने पोल खोली. उनका कहना था कि फिल्मों को लांच करने से पहले न्यूज चैनलों पर उनसे संबंधित कार्यक्रम फिल्म वालों से पैसे लेकर दिखाए जाते हैं और दिन भर तरह तरह से दिखाए जाते हैं. इन्हें प्रमोशनल कार्यक्रम कहा जाता है. सोचिए, प्रमोशनल प्रोग्राम, इकोनामिक स्लोडाउन, बिजनेस लीडर एवार्ड जाने कैसे कैसे शब्द ईजाद किए गए हैं जिससे सच्चाई का पता नहीं चलता. इन शब्दों की चासनी से झूठ को किसी नैतिकता की तरह परोसा जाता है. आज ऐसा दौर आ चुका है जब कोई मीडिया कंपनी आईपीएल के दक्षिण क्षेत्र की टीम का मालिक बन जाती है तो एक अन्य मीडिया कंपनी कोलकाता नाइट राइडर्स में पैसे लगाने लगती है. इन मीडिया कंपनियों से यह उम्मीद करना कि वे आईपीएल या इन इवेंट्स के खिलाफ कुछ भी निगेटिव प्रकाशित करेंगी, बेमानी है.

साईनाथ के मुताबिक कारपोरेट घराने में तब्दील हो चुकीं मीडिया कंपनियां खबरों की बिक्री को कभी नहीं रोकेंगी. मीडिया का जो ढांचा है वह पतित हो गया है. पी साईनाथ ने अपील की कि अब लड़ाई ईमानदार पत्रकारों को लड़ने होगी. उन्हें यथास्थिति वाली मानसिकता से निकलकर निजी स्तर पर ऐसे काम करने होंगे जिससे वे खुद भ्रष्ट व पतित होने से बच सकें और अनैतिकता के खिलाफ आवाज उठाने वाले संगठनों, लोगों को मजबूती प्रदान कर सकें. साईनाथ ने कहा कि पत्रकार अपनी पहचान छुपाकर भी अनैतिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं. अनैतिक हरकत करने वाले मीडिया संगठनों को पोलपट्टी उचित मंचों पर पहुंचा सकते हैं. महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज से संबंधित साक्ष्य खुद को भेजे जाने की घटना का भी जिक्र पी साईनाथ ने किया. उन्होंने बताया कि किसी पत्रकार ने अपनी पहचान छुपाकर ये सारे साक्ष्य उन्हें मेल किए थे.

Comments on “मीडिया 75 फीसदी भारतीयों से दूर हुआ : साईनाथ

  • akhilesh tiwari says:

    chalo kahin se roshani to dikhi.media k alambardaron se kya kahen. unhen to paid news; promostinal news pe sharm bhi nahin aati. badhe media gharno k bajay dobara laghu patron ki taraf lautna hoga.

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  • Sainath jee, Bhashanbajee se kuch nahin hoga kyonki is desh me log Bhashanbajon par vishwas karna chor chuke hain… koi aur rasta agar hai to bataeye. Bhagat singh kee khoj mat kijiye. logon ko Mohra film kee kahanee yaad aa jatee hai.

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