खबर में ‘प्रधान संपादक’, प्रिंटलाइन में ‘संपादक’

मृणाल पांडे का नाम हटा : ‘हिंदुस्तान’ अखबार का पांच सितंबर का जो अंक प्रकाशित हो रहा है, उसमें प्रिंट लाइन से प्रमुख संपादक पद और मृणाल पांडे का नाम, दोनों हटा दिया गया है। इनकी जगह संपादक का पद और शशि शेखर का नाम प्रकाशित किया जा रहा है। हालांकि एचटी मीडिया की ओर से जारी आंतरिक मेल और हिंदुस्तान में आज प्रकाशित हो रही खबर, दोनों में शशि शेखर को क्रमशः ‘एडिटर इन चीफ’ और ‘प्रधान संपादक’ कह कर संबोधित किया गया है पर प्रिंट लाइन में शशि शेखर के नाम के साथ सिर्फ संपादक शब्द जा रहा है। हिन्दुस्तान में आज शशि शेखर की ज्वाइनिंग के संबंध में जो खबर प्रकाशित हो रही है, उस हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं-


शशि शेखर बने हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक

शशि शेखरनई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर ने शुक्रवार को ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक का कार्यभार संभाल लिया। शशि शेखर ‘हिन्दुस्तान’ के साथ ही एचटी मीडिया के अन्य हिन्दी प्रकाशनों कादम्बिनी, नंदन और हिन्दुस्तान के आनलाइन संस्करण के भी प्रधान संपादक होंगे। शशि शेखर हिन्दी पत्रकारिता के प्रिंट और टेलीविजन दोनों माध्यमों के 29 साल के गहरे और विविधतापूर्ण अनुभव के धनी हैं। एचटी मीडिया में कार्यभार संभालने से पहले उन्होंने ‘अमर उजाला’ के समूह संपादक और अध्यक्ष (संपादकीय) के रूप में सात वर्षों तक कार्य किया।

शशि ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत हिन्दी दैनिक ‘आज’ से की। उनके समय में इस अखबार का विस्तार समूचे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हुआ। ‘आज’ के बाद वह एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में प्रमुख न्यूज चैनल ‘आजतक’ से जुड़े और इसके न्यूज कंटेंट और वीकेंड प्रोग्रामों को शक्ल देने में महती भूमिका निभाई। उनको बहु-स्थानीय और बहु-राज्यीय संस्करण निकालने और उसके प्रबंधन का समृद्ध अनुभव है। हिन्दी पट्टी की उनकी गहरी समझ ने उन्हें हिन्दी भाषी राज्यों में अखबारों के सफल संस्करण निकालने में बड़ी मदद की। उनके सान्निध्य में काम कर चुके कई प्रशिक्षु आज विभिन्न टीवी चैनल और अखबारों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। शशि खुद बहुमुखी प्रतिभा के लेखक हैं और विभिन्न सम-सामयिक मुद्दों पर टीवी कार्यक्रमों का संचालन करते रहते हैं। वे 1983 से अभी तक ‘आजकल’ नाम से लोकप्रिय कालम भी लिखते आ रहे हैं जो पहले ‘आज’ और ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होता रहा है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग से स्नातकोत्तर शशि शेखर ने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है।


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